जब भी निर्णय लेने का समय आये तो अपने दिमाग की जगह दिल की सुननी चाहिए

इन्ही पंक्तियों को जीने वाली महिला कार्यकर्ता ने समाज सेवा के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया है. घर का काम करने के साथ ही सामाजिक संस्थाओं से जुड़ने से शुरू हुआ सफर अब एक फाउंडेशन का रूप ले चूका है. इनका फाउंडेशन समाज के निर्धन, विकलांग, बेसहारा, वृद्ध या दिव्यांग महिलाओ और पुरुषों के साथ ही बच्चो की सहायता करता है. इसी के साथ बच्चो के भिक्षावृत्ति एवं महिलाओं को वेश्यावृत्ति के चंगुल से मुक्त कराकर उनके पुर्नउत्थान की दिशा में भी कार्य कर रहा है. ‘श्रुति फाउंडेशन (Shruti Foundation)‘ की स्थापना करने वाली समाजसेविका का नाम है श्रीमती नीतू श्रीवास्तव.

छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में रहने वाली नीतू श्रीवास्तव का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा भिलाई में हुई. स्कूल में पढ़ने के दौरान ही वो सामाजिक कामो में रुचि लेती थी. भिलाई स्थित मिशनरीज में काम करने वाली नन के साथ कुष्ठ रोगियों की सेवा में भी अपना योगदान दिया था. इसी दौरान उन्हें स्कूल टाइम में स्काउट गाइड की तरफ से राज्यपाल के. एम चांडी जी ने राज्यपाल अवार्ड से भी सम्मानित किया.

पढाई में तेज नीतू ने समाज शास्त्र के साथ ही राजनीती शास्त्र में भी पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. इसी के साथ इलेक्ट्रॉनिक में आईटीआई और PG कंप्यूटर का कोर्स भी किया.साथ ही ब्यूटी पार्लर का भी कोर्स किया और 1 ब्यूटीशियन बनकर अपने ब्यूटी पार्लर की शुरुवात की. पांच साल तक पार्लर चलाने के बाद सामाजिक कार्यो के चलते उन्होंने अपना पार्लर बंद करना पड़ा क्योंकि उनका रुझान समाजसेवा की तरफ ज्यादा हो चुका था.

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दिव्यांगजनों की मदद करती नीतू श्रीवास्तव

अपने सामाजिक रुझान को देखते हुवे उन्होंने एक संस्था का निर्माण करने की सोची. उन्होंने श्रुति फाउंडेशन की स्थापना 3 मार्च 2019 को की . यह संस्थान समाज के वंचित और उपेक्षित वर्ग की सहायता करना, समाज के निर्धन असहाय बच्चों की शिक्षा से लेकर उनका विवाह स्वरोजगार दिलाए जाने में सहयोग प्रदान करना, समाज में रक्तदान करने हेतु प्रोत्साहित करना, जरुरतमंद मरीज’ को रक्त उपलब्ध कराने मे सहयोग करना और समाज में पूर्ण शराबबंदी कराने की दिशा में कार्य करने जैसे कई सामाजिक बदलाव का प्रयास किया जा रहा है.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान नीतू श्रीवास्तव ने बताया कि मैंने समाजसेवा की शुरुआत तो 2013 में ही कर दी थी लेकिन उस समय मै फील्ड में बिल्कुल नई थी. सामाजिक कार्य का अनुभव तो था. घर परिवार में भी मेरे अलावा किसी को इस फील्ड में मेरे जैसी रुचि नही थी. इसलिए उस समय बिल्कुल अकेली थी लेकिन फिर भी ईश्वर पर विश्वास और खुद की मेहनत पर भरोसा करके आगे बढ़ती गई. इसके बाद वो सोशल मीडिया की मदद से लोगो के संपर्क में आती गयी.

उस समय के दौरान कई सामाजिक संगठनों से जुड़ने का मौका मिला और सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन वैचारिक मतभेद के चलते खुद की ही संस्था शुरू करने का फैसला किया. इसी तरह ‘श्रुति फाउंडेशन‘ की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया गया.

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अस्पताल में मरीज के साथ नीतू श्रीवास्तव

नीतू श्रीवास्तव आगे बताती है कि श्रुति फाउंडेशन प्रदेश स्तर का एनजीओ है और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इसका विस्तार किया जा चुका है. अभी हमारे साथ 300 के आसपास स्वयंसेवी जुड़े हुए है. श्रुति फाउंडेशन के कार्यों को समाज के साथ ही प्रिंट एवं टीवी मीडिया द्वारा काफी बार सराहा गया है.

अपने संघर्षों के बारे में नीतू श्रीवास्तव बताती है कि आम गृहणी होने के नाते मेरी परिवार एवं बच्चों के प्रति जिम्मेदारियां रही. शुरुआत में परेशानियां होती थी लेकिन परिवार के सहयोग से सब दिक्कते हल हो गयी. इसी के साथ मुझे समाजसेवा के कार्यों में आगे बढ़ने का अवसर मिलता गया। लेकिन एक बात की जरूर ख़ुशी है कि मैं वो काम कर रही हु जो मेरे दिल को अच्छा लगता है.

भविष्य की योजनाओं के बारे में नीतू श्रीवास्तव बताती है कि एक ही छत के नीचे हम वृद्धाश्रम और अनाथाश्रम खोलना चाहते है ताकि बुजुर्गो को बच्चो का प्यार और बच्चो को नाना – नानी,दादा- दादी का प्यार मिले. इसके साथ ही गरीब बच्चों के लिए प्राइमरी स्कूल बनाना चाहती है. जहा इंग्लिश माध्यम से शिक्षा देकर उनकी नींव मजबूत की जा सके.

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स्कूली बच्चों के साथ नीतू श्रीवास्तव

नीतू श्रीवास्तव कहती है कि अगर आप के अंदर जुनून है,कुछ करने की चाह है तो अपने आत्मविश्वास को बनाये रखिये. परेशानी एवं संघर्ष के दौर से घबराने के बजाय सतत प्रयास करते रहिये.

अगर आप भी नीतू श्रीवास्तव और ‘श्रुति फाउंडेशन‘ के पुनीत कार्य में सहयोग करना चाहते है तो इस नंबर +91-7000984706 पर संपर्क करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, नीतू श्रीवास्तव और श्रुति फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों की सराहना करता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर लोगो के जीवन में बदलाव आएगा.

( ये स्टोरी बी पॉजिटिव इंडिया के साथी अजय कुमार पटेल ने की है )

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