एक पेशेवर वकील जिसे खाने-पीने का शौक था तो वकालत छोड़कर खाने के बारे में रिसर्च करना शुरू कर दिया। विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोगों से पारम्परिक भारतीय खाने के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद घर एवं परिवार वालों के दबाव के बाद भी अपने शौक को अपना बिज़नेस बनाते हुए एक रेस्टोरेंट खोला और आज वो सात रेस्टोरेंट वाली फ़ूड चैन की मालिक है। ‘मोगली‘ रेस्टोरेंट के नाम से फ़ूड चैन चलाने वाली उद्यमी का नाम है: निशा काटोना (Nisha Katona)

उनका रेस्टोरेंट मुख्यतया: भारतीय व्यंजनों को थोड़ा सा तड़का लगाकर पेश करता है। उनके रेस्टोरेंट पर न केवल गुणवत्ता पूर्ण एवं स्वादिष्ट मिलता है बल्कि विदेश में भी देशी खाने की कमी पूरा करता है।

निशा काटोना ब्रिटेन के लिवरपूल में वकालत करने वाली एशियाई मूल की पहली महिला वकील बनी थीं। वे पारिवारिक और बच्चों से जुड़े मामलों की वकील थीं। करीब 20 साल का वकालत का उनका करिअर काफी सफल भी था। लेकिन 2014 में उन्होंने अचानक यह पेशा छोड़ने का फैसला कर लिया।

परिवार और दोस्तों की सलाह के विपरीत जाते हुए निशा ने रेस्टोरेंट खोलने का फैसला किया। इसका नाम उन्होंने मोगली रखा। मोगली नाम जंगलबुक के पात्र से प्रभावित नहीं है। निशा अपनी बेटियों को मोगली पुकारती थीं। इसलिए उन्होंने रेस्टोरेंट का नाम भी मोगली रखा।

तमाम आशंकाओं को गलत साबित करते हुए निशा ने न सिर्फ इस रेस्टोरेंट को सफल बनाया, बल्कि आज की तारीख में वे ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों में मोगली चेन के सात रेस्टोरेंट की मालिक हैं।

Nisha Katona | Photo Credits : Liverpool BID Company

मोगली रेस्टोरेंट पारंपरिक भारतीय खाने के लिए लोकप्रिय है। निशा बताती हैं कि उनके पिता 1960 के दशक में भारत से ब्रिटेन आए थे। उनके परिवार ने समय के साथ खुद को ब्रिटिश माहौल में पूरी तरह ढाल लिया लेकिन ब्रिटिश खाना भारतीय खाने की जगह नहीं ले पाया। इस वजह से भारतीय खाने के प्रति निशा का रुझान बचपन से रहा।

वकालत के दिनों में भी निशा यूट्यूब पर भारतीय खाने से जुड़ा चैनल चलाती थीं। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय परिवारों से अलग-अलग तरह का खाना बनाना सीख कर उसका वीडियो वे इस चैनल पर अपलोड करती थीं।

निशा कहती हैं कि यह रेस्टोरेंट खोलने के पीछे उनका मकसद यह था कि वे दुनिया को दिखाएं कि भारतीय घर में और स्ट्रीट पर किस तरह का खाना खाते हैं। उनके रेस्टोरेंट की तमाम डिशेज घरेलू रेसिपी पर आधारित हैं। निशा भारतीय खाने पर तीन किताबें भी लिख चुकी हैं। ‘पिंप माई राइस‘, ‘द स्पाइस ट्री‘ और ‘मोगली स्ट्रीट फूड’ उन किताबों के नाम हैं।

निशा कहती हैं कि लोग भारत के बारे में कहते हैं कि वहां महिलाओं को ज्यादा अवसर नहीं मिलते हैं। लेकिन ब्रिटेन की स्थिति भी बहुत ज्यादा अलग नहीं है। जब उन्होंने रेस्टोरेंट शुरू करने का फैसला किया तो उन पर ऐसा न करने के लिए काफी दबाव डाला गया। परिवार के सदस्यों और दोस्तों को भी उम्मीद नहीं थी कि उनका बिजनेस सफल होगा।

बी पॉजिटिव , निशा काटोना के संघर्ष को सलाम करता है। विपरीत हालातों में भी अपने जूनून को जीने के साहस से हमारे पाठक प्रेरणा लेंगे ।

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