ट्रांसजेंडर्स की हालत देश में किसी से छिपी हुई नहीं है, भीख मांगने के अलावा कोई भी काम करने पर उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है और उन्हें फिर उनकी हालत पर छोड़ दिया जाता है।  देश में किन्नरों का काम शुभ मौकों पर लोगों के घरों पर जाकर बधाई देने या ट्रेनों, बसों, दुकानों में लोगों से पैसे मांगकर गुजारा करने तक ही माना जाता है लेकिन कुछ लोग होते है जो इन लोगों का दर्द समझते है और इन्हे सम्मानित जीवन जीने के मौके उपलब्ध करवाते है । इन्ही लोगों में से एक है  निमेश शेट्टी (Nimesh Shetty)

Nimesh Shetty

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पेशे से आर्किटेक्ट निमेश ने कुछ दिनों पहले ही नवी मुंबई में एक रेस्त्रां खोला है और इन्होने एक नयी पहल करते हुए अपने होटल में ट्रांसजेंडर्स को काम पर रखा है । कई देशों का दौरा कर चुके कैफै के मालिक निमेश के मुताबिक, “हमने तय किया है कि हमारे कैफे में केवल हिंदी बोली जाएगी। विश करने के लिए गुडमॉर्निंग या गुड ईवनिंग की बजाय सिर्फ नमस्कार का इस्तेमाल करेंगे। हालांकि, जिन कस्टमर्स को हिंदी समझने में दिक्कत होती हैं, उनसे हम अंग्रेजी में बात करते हैं। कैफे में रखे गए किन्नरों को काम के साथ इस बात की भी ट्रेनिंग दी गई है।

शेट्‌टी बताते हैं कि जिन किन्नरों को हमने जॉब पर रखा है, वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने किन्नरों को जॉब देकर एक पाॅजीटिव पहल की है। ताकि उन्हें समाज से जोड़ा जा सके। आज की यंग जेनेरेशन काफी मैच्यार है। वह यह नहीं देखती है कि किसे काम पर रखा गया है। अब तक कैफे में आने वाले लोगों से हमें अच्छा रिस्पांस मिला है। शेट्‌टी इस बात से खुश हैं कि कैफे में आनेवाले लोगों ने उनकी इस पहल को सराहा है।

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किन्नरों को काम पर रखने के बारे में कैफै के मालिक निमेश शेट्‌टी भास्कर को बताते हैं कि आर्किटेक की पढ़ाई के दौरान मैं एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था। उस दौरान मेरी नजर किन्नरों की बदहाली पर पड़ी। इसके बाद मैंने किन्नरों के लिए काम करने वाली कई एनजीओं से कॉन्टेक्ट किया। इसमें मुझे सोशल वर्कर गौरी सावंत से काफी मदद मिली।

शेट्‌टी कहते हैं कि, “मैंने तय किया कि किन्नरों को लेकर लोगों के मन में बनी धारणा बदलना जरुरी है। यह तभी मुमकिन होगा जब उन्हें बेहतर जॉब मिले। शेट्‌टी ने बताया कि उनके पिताजी पहले से होटल इंडस्ट्री में थे इसलिए कैफै खोलने में मुश्किल नहीं हुई।

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नवी मुंबई का एक रेस्टोरेंट किन्नरों की जिंदगी में अलग तरह से बदलाव ला रहा है। इसके पीछे सोच है कि उन्हें भी समाज की मेनस्ट्रीम में शामिल किया जा सके। दो हफ्ते पहले खुले ‘थर्ड आई (Third Eye) ’ नाम के इस कैफे में फिलहाल 6 किन्नरों को नौकरी दी गई है। इस कैफे में किन्नर ही कस्टमर्स को खाना परोसते हैं। किचन संभालने की जिम्मेदारी भी इन पर है। इस कैफे में कुल 20 इम्पलॉई है।

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कहानी साभार : दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान टाइम्स

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