दो भाई मिलकर अपने पिता की कंपनी को एक छोटी सी फैक्ट्री से बढाकर देश भर में फैला देते है. परिवार में बंटवारे के बाद एक बार फिर नयी शुरुआत करते है. प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाते है.

उस समय देश में प्लास्टिक का चलन शुरू ही हुआ था. अतः प्लास्टिक से निर्मित वस्तुए बेचना काफी मशक्कत का काम था. लेकिन बेहतरीन रणनीति और मार्केटिंग के चलते आज वो प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं को बेचने में भारत ही नहीं अपितु एशिया में टॉप फाइव कम्पनीज से आते है.

आज उनके बनाये प्रोडक्ट हर भारतीय की दिनचर्या का हिस्सा है. 1934 में शुरू हुए सफर ने 2018 तक आते-आते हज़ारों करोड़ो रुपये का सफर तय कर लिया. आज हम बात कर रहे है देश के प्लास्टिक किंग पारेख बंधुओं और उनकी कंपनी या ब्रांड नीलकमल (Nilkamal Group) की.

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नीलकमल ब्रांड आज प्लास्टिक से निर्मित फर्नीचर के साथ ही उद्योगों के लिए प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बनाने के लिए जाना जाता है. 1981 में अपने परिवार के बिज़नेस से अलग होकर वमनराय और शरद पारेख ने नीलकमल की स्थापना की. आज पुरे देश में उनके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट फैले हुए है तथा देश के हर कोने में उनके प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किये जाते है.

उन्होंने भारत के साथ ही बांग्लादेश और श्रीलंका में भी जॉइंट वेंचर के रूप में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स खोली है. जर्मनी तथा फ्रांस की कई कम्पनीज से उनके अनुबंध है जिसके जरिये नयी तकनीक का इस्तेमाल नीलकमल में किया जाता है.

at home store
@Home Store

नीलकमल ने प्लास्टिक से निर्मित घरेलु उत्पादों को आम ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए @Home नाम से एक रिटेल श्रृंखला शुरू की है. जो देश के बीस से अधिक शहरों में अपनी पहुँच बना चुकी है. एक ही छत के नीचे कुर्सी, टेबल , साजो-सज्जा के सामान, फर्नीचर , घरेलु सामान मिलते है जिसके चलते नीलकमल ब्रांड की मध्यमवर्गीय लोगों में पहुँच बढ़ी है.

आज नीलकमल भले ही देश का जाना-माना ब्रांड बन गया हो लेकिन इसकी शुरुआत की कहानी बहुत दिलचस्प है. 1934 में Vrajlal पारेख ने मेटल बटन बनाने के लिए एक फैक्ट्री की स्थापना की. वमनराय और शरद पारेख ने अपने अन्य भाइयों के साथ मिलकर इस कंपनी को आगे बढ़ने का काम किया. 1950 तक आते-आते उन्होंने विंडसर नाम की कंपनी का अधिग्रहण किया और नेशनल प्लास्टिक के नाम से प्लास्टिक उत्पाद बनाने शुरू किये.

प्लास्टिक बटन से हुई शुरुआत से नेशनल प्लास्टिक ने प्लास्टिक गिलास के साथ कई अन्य घरेलु उपयोग के सामन प्लास्टिक में बनाना शुरू किया. वजन में हलके होने के साथ ही वाजिब दाम के चलते इनके प्रोडक्ट्स ने भारतीय मार्केट में तहलका मचा दिया. इनके प्रोडक्ट्स को खूब सफलता मिली लेकिन 1981 आते-आते परिवार में बिज़नेस का विभाजन हो गया.

nilkamal products
nilkamal products

1981 की शुरुआत में उन्होंने नीलकमल नाम से प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बेचना शुरू किया. उन्होंने डेरी और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में काम आयने वाले लकड़ी और मेटल के कंटेनर की जगह प्लास्टिक के कंटेनर बनाने का फैसला किया.

वजन में हलके होने के साथ ही गुणवत्ता एवं लम्बे समय तक चलने के कारण इनके प्रोडक्ट्स को मार्केट ने हाथो-हाथ लिया. जल्द ही देश की सभी डेयरी एवं अन्य संस्थानों में कंटेनर के रूप में नीलकमल के प्रोडक्ट्स ही जाने लगे.

1990 तक उन्होंने बड़े उद्योगों तक ही अपने आप को सीमित रखा क्योंकि तब तक लोग प्लास्टिक के प्रोडक्ट्स घरों में उपयोग लाने से कतराते थे. 1991 में उन्होंने प्लास्टिक की कुर्सी एवं टेबल बनाना शुरू किया लेकिन लोगों ने इसे नहीं ख़रीदा.

इसके चलते नीलकमल ने शादी ब्याह में काम करने वाले टेंट और डेकोरेटर्स से संपर्क किया. शुरुआत में उन्हें मुफ्त में कुर्सियां दी और उन्हें फीडबैक देने के लिए बोलै गया.

वजन में हल्की होने के साथ ही मजबूत कुर्सी ने उन लोगों का काम आसान बना दिया. नीलकमल को देशभर से कुर्सी के लिए आर्डर आने लगे. इसके चलते उनके प्रोडक्ट्स की बिना कोई मार्केटिंग के लोगो तक पहुँच बन गयी. आज नीलकमल ग्रुप के कुर्सी एवं टेबल देश के हर घर में उपलब्ध है.

कुर्सी एवं टेबल के व्यापार ने नीलकमल ब्रांड को मजबूती दी. नीलकमल ने इसके साथ ही प्लास्टिक से बने कई उत्पादों का निर्माण किया जिनमे इंडस्ट्रीज की जरूरत से लेकर आम भारतीय के किचन में काम आते है. देखते ही देखते उनका कारोबार बढ़ गया और आज वो देश में महीने की चौदह लाख से ज्यादा कुर्सी एवं टेबल्स बेचते है.

Parekh Brothers
Parekh Brothers : (L-R) Hitesh Parekh, Manish Parekh and Nayan Paekh

एक बार प्रोडक्ट्स हिट होने के बाद नीलकमल ग्रुप ने अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का विस्तार करना जारी रखा. देश में सफलता के बाद उनके प्रोडक्ट्स विदेशों में भी जलवा बिखेर रहे है. आज उनके प्रोडक्ट्स सौ से जायदा देशो में निर्यात होते है.

2005 में उन्होंने @Home नाम से प्लास्टिक मेड होम फर्नीचर और एप्लायंसेज के लिए रिटेल श्रंखला शुरू की जो कि प्लास्टिक इंडस्ट्री के प्रोडक्ट्स के लिए अपने आप में अनूठी थी. आज उनके देश के 20 से ज्यादा शहरों में स्टोर्स है.

नीलकमल ग्रुप हमेशा से ही नवाचार के लिए जाना जाता है. इसी के चलते प्लास्टिक बटन से शुरू हुआ उनका सफर अभी फर्नीचर, मैट्रेस्स , मटेरिल हैंडलिंग और होम डेकॉर के प्रोडक्ट्स तक पहुँच चूका है.

शरद और वमनराय ने जो सफर शुरू किया था उसे अब उनके बेटों ने संभाला है. हितेन, मनीष और नयन पारेख इस ग्रुप को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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