अपने पिता से विरासत में मिली एक गाय और भैंस को इन्होने अपनी लगन और मेहनत के दम पर एक डेयरी फार्म में तब्दील कर दिया है । छोटे से आईडिया के बाद इन्होने अपने गांव में ही पशुपालन का काम शुरू किया और आज वो लगभग 90 हज़ार प्रति महीने की आय अर्जित कर रहे है । उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने इनको पशुपालन क्षेत्र में “गोपाल पुरुस्कार ” से नवाजा है । यह कहानी है मध्यप्रदेश के रीवा जिले से सटे मैदानी गांव के नीरज यादव( Neeraj Yadav) की ।

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विरासत में मिली गाय और भैंस के दूध की उनके पड़ोसियों में काफी मांग थी , जिसने नीरज को इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रेरित किया । पड़ोसियों की मांग पर उन्होंने दूध सप्लाई करना शुरू किया और धीरे-धीरे उनके बेड़े में सात गाय और पांच भैंस समेत 21 मवेशियों की संख्या हो गयी है और उनका छोटा सा डेयरी फार्म भी बन गया है । आज वो लगभग दिन का 100 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे है ।

इस दूध उत्पादन से उन्हें महीने में लगभग 90 हज़ार की आय होती है और इसके साथ ही गाय और भैंस के बछड़े से सालाना एक से दो लाख की अतिरिक्त आय हो जाती है । पशुपालन में अच्छी आमदनी के बाद नीरज ने अपने छोटे भाई को भी अपने साथ काम पर लगा दिया है जिससे दोनों भाई एक दूसरे के सहयोग से अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे है ।

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एक गणना के अनुसार नीरज के पास उपलब्ध मवेशियों से 100 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन होता है , जिसके अनुसार महीने का लगभग 3000 लीटर दूध का उत्पादन होता है । डेयरी में दूध की कीमतों के अनुसार लगभग 45 रुपये प्रति लीटर कीमत मिल जाती है , जिससे उन्हें 1.35 लाख की कुल आय होती है । मवेशियों के चारे एवं खुराक के प्रबन्धन में लगभग 45 हज़ार का खर्चा होता है जिससे उन्हें महीने में लगभग 90 हज़ार की न्यूनतम आमदनी होती है ।

नीरज की डेयरी में भैंसों एवं गायों की उत्कृष्ट नस्ले है जो ज्यादा दूध देने के साथ ही स्वस्थ रहती है । भेंसो में उनके पास मुर्रा और गायों में जर्सी, साहीवाल और गिर प्रजाति शामिल है । नीरज के कुनबे में गाय की सात और भैंस की पांच बछिया है जिनमे से 4 बछिया बेचने के लिए तैयार है, जिससे नीरज को इस साल लगभग डेढ़ लाख की अतिरिक्त आय होगी ।

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पशुपालन में उत्कृष्ट कार्य के चलते मध्य प्रदेश सरकार ने विकासखंड स्तर पर पशुपालन विभाग की और से “गोपाल पुरुस्कार ” दिया गया है । उन्हें यह पुरुस्कार राज्य शासन की योजना के तहत दिया गया है जिसमे ऐसे किसानो को पुरुस्कृत किया जाता है जो मवेशियों का उचित ललन-पालन के साथ ही अच्छी आमदनी प्राप्त करते है ।

भारत में जहाँ किसानो की हालत ख़राब है लेकिन नीरज ने पशुपालन के क्षेत्र में अपने ढृढ़ निश्चय के साथ ही अच्छी नस्लों की गाय-भैंस रखकर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे है । नवीनीकरण एवं जागरूकता के कारण नीरज आज अच्छा जीवन स्तर जी रहे है और उन्हें आजीविका के लिए नजदीकी शहरों की तरफ पलायन नहीं करना पड़ा । नीरज ने अपनी कार्य कुशलता से एक बड़े किसान वर्ग जो कि अभी मुसीबत के दौर से गुजर रहा है , के सामने एक उदाहरण पेश किया है ।

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Be Positive नीरज के जैसे आधुनिक किसानों को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि नीरज की कहानी से प्रेरित होकर अन्य किसान भी आत्महत्या जैसे भयावह कदम ने उठाकर आजीविका के लिए मिश्रित खेती का प्रयोग करेंगे । भारत को गांवों से मजबूत बनाने के लिए नीरज जैसे किसानों की जरूरत है ।

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