माना कि अंधेरा घना है, मगर दिया जलाना कहां मना है ।

यह पंक्तियाँ उत्तरप्रदेश के एक प्रधान पर सटीक बैठती हैं. गांव को बदलने के लिए इनका जज्बा और कार्यशैली अनुकरणीय हैं. सामान्य परिवार से निकलकर गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए प्रायसरत हैं. कानपूर के पास का गांव जिसे पहले आसपास के लोग भी नहीं जानते थे लेकिन आज अमेरिका में पढ़ने वाली रिसर्च स्कॉलर से लेकर मुंबई में काम करने वाले सामाजिक संस्थान इस गांव में काम करना चाहते हैं.

गांव के युवाओं के लिए सुविधा-संपन्न स्टेडियम हो या किसानों के लिए ऑरगनिक फार्मिंग की जानकारी प्रदान करना हो. महिलाओं के लिए सिलाई-बुनाई की ट्रेनिंग हो या सरकारी स्कूलों की मुलभुत व्यवस्थाओं को पूरी करना हो. कहने को एक गांव हैं लेकिन नवाचारों के लिए देश में अपना अनोखा स्थान बना सकता हैं. यह सब संभव किया हैं गांव के युवा प्रधान नीरज कुमार ने.

उत्तर-प्रदेश के कानपूर जिले के सरसौल विकास प्रखंड के तुसौरा ग्राम पंचायत के प्रधान नीरज कुमार ने नवाचारों से अपने गांव को राष्ट्र-पटल पर ला दिया हैं. स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही सरकारी योजनाओं को लागु करवाने में इनका कोई सानी नहीं हैं.

pradhan with villagers
ग्रामीणों के साथ चर्चा करते हुए नीरज कुमार

विधायक से लेकर सांसद निधि कोष हो या उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के साथ मिलकर अपने गाँव का विकास करवा रहे हैं नीरज कुमार. उनकी पंचायत में उच्च-स्तरीय संसाधनों युक्त स्टेडियम का निर्माण करवाया गया जिसमे युवाओं को आर्मी, नेवी एवं पुलिस फोर्सेज में जाने की ट्रेनिंग दी जाती हैं. योग्य प्रशिक्षक एवं मार्गदर्शन के बलबूते कई ग्रामीण युवाओं का चयन हो चूका हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में नीरज कुमार बताते हैं कि गांव के विकास के लिए कार्यरत हैं क्योंकि पुरे क्षेत्र में हम सबसे युवा प्रधान हैं. अगर हमारे से कोई चूक हो गयी तो युवाओं के लिए प्रधानी के पद पर आना मुश्किल हो जायेगा. लोगो की अपेक्षाए अधिक हैं लेकिन सरकार एवं प्रशासन के साथ समन्वय और सामाजिक संस्थाओं की मदद से कई नवाचार किये हैं जो निश्चित ही गांव की दिशा और दशा बदलने का काम करेंगे.

Masal Yatra
ग्रामीणों के साथ मसाल यात्रा का आयोजन किया नीरज कुमार

नीरज कुमार बताते हैं कि मेरा जन्म तूसोरा के मंधना गांव में हुआ. पिता कानपूर में HAL की ऑफिसर्स कॉलोनी में माली का काम करते थे और घर में मेरे अलावा एक बहन और तीन भाई हैं. सभी ने गांव के ही सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की जहाँ पर ब्लैकबोर्ड और जर्जर स्कूल भवन के अलावा कोई सुविधा नहीं थी.

भाइयों ने आगे पढाई नहीं की लेकिन मुझे आगे पढ़ने का मौका मिला. कानपूर यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध कॉलेज से कंप्यूटर में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद नौकरी एवं आगे की पढाई करने के लिए जद्दोजहद शुरु हुई.

एनआईटी अगरतला में चयन भी हुआ लेकिन आर्थिक दिकक्तों के कारण प्रवेश नहीं ले पाया. कुछ समय प्रयास किये लेकिन MCA में प्रवेश नहीं मिला तो दिल्ली आकर सिविल सर्विसेस की तैयारी करना उचित लगा. सरकारी नौकरी लगने के बाद घर की स्थिति सुधारने के लक्ष्य से दिल्ली पहुंचा. दिल्ली पहुँच कर कई सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़ा और दोस्तों ने भी पढ़ने के लिए मदद की. इसके बाद त्योहारों पर घर आना होता था लेकिन हर साल गांव में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलता.

school bench
गांव के स्कूल में बेंच एवं कुर्सी की व्यवस्था की गयी

अब मेरे पास दो विकल्प थे या तो व्यवस्था या प्रशासन को कोस कर चुप हो जाऊ या फिर परिवर्तन के लिए कुछ करू. मैंने दूसरा विकल्प चुना और शिक्षा के जरिये गांव की तक़दीर बदलने की ठानी. इसी समय दिल्ली और गांव के बीच दौड़ जारी रही लेकिन एक दिन दिल्ली की अलविदा कह कर गांव आने का निर्णय किया.

गांव में बच्चों को पढ़ाने के साथ ही गांव की समस्याओं को लेकर प्रखर आवाज़ उठाई. देखते ही देखते गांव का सहयोग मिलना शुरू हो गया, युवा, बुजुर्ग और महिलाये भी गांव को बदलने के लिए हमारे साथ हो गयी.

2015 में गांव में प्रधान के चुनाव होने थे और गांव के लोगो ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए बोला गया. मैं बच्चों को पढ़ाने में व्यस्त था और चुनाव लड़ने के लिए पैसे भी नहीं थे लेकिन गांव के लोग और खासकर युवा चुनाव लड़वाने पर अड़ गए. गांव के ही लोगो ने सब व्यवस्थाए की और क्राउड फंडिंग के जरिये हमने भी चुनाव प्रचार शुरू किया. चुनावों में शराब एवं पैसों का लेनदेन आम बात हैं लेकिन हमने इन दोनों के लिए मना कर दिया.

Neeraj Kumar at village
गांव के लोगो को जागरूक करते हुए नीरज कुमार

पुरे गांव एवं युवाओं के साथ के कारण चुनाव में जीत मिली और अब कंधो पर बड़ी जिम्मेदारी आ गयी. अपेक्षाओं का बोझ ज्यादा था तो मेहनत दुगुनी करने की कोशिश की. गांव के युवाओं के लिए रोज़गार की व्यवस्था के लिए ट्रेनिंग की शुरुआत की. पंचायत भवन से लेकर सारे सरकारी भवनों में पौधा-रोपण एवं पुनर्निर्माण किया. गांव को आगे ले जाने के लिए विभिन्न मंचो एवं माध्यमों का इस्तेमाल करना शुरू किया.

गांव के हर व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना हमारा लक्ष्य रहा हैं. स्वच्छता अभियान से लेकर उज्ज्वला योजना और आवास योजना के जरिये लोगो की मदद की. सरकारी स्कूल में भवन के साथ ही टाट-पट्टी हटाकर बेंच एवं कुर्सियों की व्यवस्था की. जल्द ही कंप्यूटर और प्रोजेक्टर के जरिये स्मार्ट क्लास बनाने पर काम चल रहा हैं.

किसी भी काम में सफल होने के लिए जन-भागीदारी बहुत आवश्यक हैं और इसे ही हमने अपना हथियार बनाया. युवाओं के लिए रोज़गार की ट्रैनिग, प्रशिक्षक की व्यवस्था, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास, स्कूल में शिक्षा की समुचित व्यवस्था और गांव के प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी योजना का लाभ पहुँचाना हमारा ध्येय रहा हैं. सरकार एवं निजी सामाजिक संस्थाओं जैसे एनजीओ, बैंक एवं लोगो के साथ मिलकर गांव के विकास के लिए काम किया जा रहा हैं.

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स्वच्छता अभियान के लिए घर-घर जाकर लोगो को जागरूक करते है नीरज कुमार

नुकड़ नाटक के माध्यम से समय पर जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जाते हैं. एल सी डी प्रोजेक्टर के माध्यम से भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं. समय समय पर किसानों के जमीन सम्बन्धी मुद्दों के लिये लडाई व आंदोलन आदि में भी सहयोग करते रहते हैं.

सामूहिक प्रयासों का परिणाम भी देखने को मिल रहा हैं, कुछ युवाओं को नौकरी लगी हैं तो छात्रों के शिक्षा परिणाम में भी आशातीत वृद्धि हुई. गांव के लोगो के जीवन स्तर में सुधार हुआ हैं लेकिन अभी बहुत कार्य करना बाकी हैं. डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के ‘मिशन 2020 ‘ को सफल बनाना हैं. गांव के युवाओं को इतना सक्षम बनाना हैं कि उन्हें नौकरी ढूढने के लिए देश के अन्य राज्यों में भटकना न पड़े.

नीरज कुमार ने यह सिद्ध किया हैं कि अगर प्रयास किये जाए तो गांवों की तक़दीर बदल सकती हैं. कभी टूटी-फूटी सड़क वाले गांव में अब सेंसर से रोड लाइट कण्ट्रोल होती हैं. एक बस के लिए इंतज़ार करने वाले गांव में हेलिपैड बन चूका हैं. खेलने के लिए मैदान के लिए तरसने वाले बच्चे अब उच्चस्तरीय स्टेडियम में योग्य प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.

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योग्य प्रशिक्षकों के जरिये युवाओं को दी जाती हैं ट्रेनिंग

नीरज कुमार को ग्रामीण विकास के लिए कई सरकारी एवं गैर-सरकारी मंचों से सम्मानित किया जा चूका हैं और यह क्रम अनवरत जारी हैं.

अगर आप भी नीरज कुमार से संपर्क करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, नीरज कुमार के ग्रामीण विकास कार्यो की सराहना करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश के युवा समाज एवं गांव के विकास में अपना योगदान देंगे.

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