जब तक आप कोई काम कर नहीं लेते है तब तक ये असंभव ही लगता है.

यह पंक्तियाँ इस प्रगतिशील किसान पर सटीक बैठती है. राजस्थान जैसा सूखा प्रदेश जहाँ पर पीने के पानी की किल्लत रहती है और साल में राज्य के अधिकांश हिस्से में केवल एक फसल होती है. उस प्रदेश में खेतीबाड़ी में नवाचार करने के लिए अपनी शानदार नौकरी एवं पुश्तैनी व्यवसाय छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं है. लेकिन इस युवा ने असंभव को संभव कर दिखाया है. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के शानदार करियर से प्रगतिशील किसान बनने वाले युवा का नाम है नवदीप गोलछा (Navdeep Golecha).

राजस्थान के जोधपुर शहर में एक कारोबारी परिवार में जन्मे नवदीप गोलछा अभी ‘नेचुरा फार्म (Natura Farm)‘ के नाम से एग्रीटेक कंपनी चलते है जो अनार, पपीता और नीम्बू का कई देशों में निर्यात करती है. 2016 में खेती की शुरुआत करने वाले नवदीप ने पिछले वर्ष 70 लाख से ज्यादा का टर्नओवर किया है और इस वित्त वर्ष में 1.5 करोड़ का लक्ष्य रखा है. इनके फार्म से निकले फलों की बाजार में खासी डिमांड रहती है और विदेशों के साथ ही भारत की बड़ी रिटेल कम्पनीज रिलायंस फ्रेश, बिग बाजार भी उनके प्रोडक्ट्स को खरीदती है.

Navdeep Golecha Natura Farms India
नवदीप के फार्म पर काम करते स्थानीय लोग | तस्वीर साभार : Natura Farms के इंस्टाग्राम पेज से

नवदीप अभी अपने फार्म के जरिये 15 से ज्यादा लोगो को प्रत्यक्ष और 50 के आसपास लोगों की अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार दे रहे है. इसी के साथ नवदीप साथी किसानों को कीटनाशक मुक्त या आर्गेनिक खेती के बारे में मुफ्त में ट्रेनिंग देते है. आगामी योजनाओं के तहत नवदीप अपने फार्म पर फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट के साथ ही आर्गेनिक उर्वरक संयंत्र के जरिये कई लोगो को रोज़गार देंगे.

नवदीप एक कारोबारी परिवार से आते है और उनका परिवार कई वर्षों से रियल एस्टेट के व्यवसाय में लगा हुआ है. उन्होंने अपनी शुरुआती पढाई जोधपुर से की और इसेक बाद ग्रेजुएशन के लिए वो मुंबई आ पहुंचे. मुंबई के प्रतिष्ठित कॉलेज UPG कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने यूके से पोस्ट ग्रेजुएशन किया.

यूके में वो कॉलेज टॉपर रहे और इसके बाद उनका चयन रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड में इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में हो गया. कुछ समय उन्होंने नौकरी की लेकिन उनके पिताजी ने उन्हें भारत लौटने के लिए कहा. इसके बाद नवदीप अपनी जॉब छोड़कर वापस जोधपुर आ गए.

Navdeep Golecha Natura Farms India
नवदीप का फार्म | तस्वीर साभार : Natura Farms के इंस्टाग्राम पेज से

बी पॉजिटिव से खास बातचीत में नवदीप ने बताया कि जोधपुर वापस आने के बाद मेरे पास दो विकल्प थे या तो मैं अपने पुश्तैनी कारोबार में शामिल हो जाऊ या खुद के लिए कुछ करू. मैंने दूसरा विकल्प चुना और खेतीबाड़ी करने का निर्णय किया. उस समय तक मुझे खेतीबाड़ी के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था. इसके लिए मैंने कई किसानों, कृषि अधिकारीयों एवं प्रोफेशनल के साथ लम्बी बातचीत की.

इसके बाद मैंने अपनी जमीन का साइल एवं वाटर टेस्ट करवाया जिससे मुझे मेरे फार्म के बारे में योजना बनाने में आसानी हुई. इसके बाद जंगल के रूप में पड़ी जमीन को साफ करके खेती योग्य बनाया. जब जमीन एवं पानी की व्यवस्था हो गयी तो मैंने महाराष्ट्र के एक एग्री प्रोफेशनल की मदद ली.

यह 2016 की शुरुआत का समय था और मैंने अनार, पपीता और नीम्बू की खेती करना शुरू किया. रिसर्च करके खेती करने के बजाय खुद से प्रयोग करके खेती करना उचित समझा. डेढ़ साल तक एग्री प्रोफेशनल से खेती की बारीकियां सींखने के बाद मैंने खुद से काम करना शुरू कर दिया.

जब पहली फसल लगा रहे थे तो आसपास के किसानो के मनोभाव का उन्होंने गजब का उदाहरण दिया.

नवदीप बताते है कि मेरे फार्म के आसपास अब तक किसी ने खेती नहीं की. जंगल या उजाड़ जमीन थी. जब मैंने फार्म के लिए काम शुरू किया तो किसान बोल रहे थे कि कुछ नहीं है पिताजी का पैसा है तो ऐसे ही यह लड़का व्यर्थ कर रहा है. जब मैंने अनार के पौधे लगाए तो बोला गया कि पौधे तो लग गए लेकिन इन पर फूल थोड़े न लगेंगे. जब फूल आने शुरू हुए तो बोला गया कि इन पर फल थोड़े न लगेंगे. जब फल लग गए तो बोले कि हमारे क्षेत्र में अनार जैसा महंगा फल कौन खरीदेगा. जब अनार विदेशों में निर्यात होने लगे तो किसानों को नवदीप पर विश्वास हुआ और अब क्षेत्र के कई किसान उनसे जुड़े हुए है.

Navdeep Golecha Natura Farms India
साथी किसानों एवं विद्यार्थियों को मुफ्त में ट्रेनिंग देते है नवदीप | तस्वीर साभार : Natura Farms के इंस्टाग्राम पेज से

नवदीप बताते है कि भारतीय किसानो को परम्परागत खेती से आगे बढ़कर नयी तकनीक एवं सोच का दायरा बढ़ाना होगा. सरकारी योजनाओं का लाभ एवं नवाचार से किसान खेतीबाड़ी को मुनाफे का सौदा बना सकता है.

नवदीप कहते है कि उनकी 80 फीसदी से ज्यादा उपज निर्यात होती है और उन्होंने अब खुद भी एक्सपोर्ट का लाइसेंस ले लिया है. ऐसा करने वाले वो राजस्थान के पहले अनार उत्पादक है. हमने अनार, पपीता और नीम्बू को कीटनाशक मुक्त रखा है और समय-समय पर प्रयोगशाला में टेस्ट करवाए जाते है. अभी हम 40 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे है और हर साल 20 एकड़ खेती बढाने का लक्ष्य है. हम अनार के साथ ही लगभग सारे फल की खेती करना चाहते है जिससे कि हमारा कृषि फार्म एक रोल मॉडल बन सके.

आय के बारे में नवदीप बताते है कि हमने जब पौधे लगाए तो प्रति पौधा 700 रूपये खर्च आया था. इसी के साथ हर वर्ष पौधे पर 300 से ज्यादा का खर्च आ जाता है और हमारी इनकम एक पौधे से 800 रुपये हो रही है जिसे हम 1000 रुपये प्रति पौधा करने में लगे हुए है. पिछले वर्ष 70 लाख के आसपास टर्नओवर था और इस साल हमने 1.5 करोड़ का लक्ष्य रखा है. इसी के साथ 15 स्थानीय लोगों को महीने की दस हज़ार के आसपास सैलरी भी दे रहे है.

Navdeep Golecha Natura Farms India
अवार्ड समारोह के दौरान नवदीप | तस्वीर साभार : Natura Farms के इंस्टाग्राम पेज से

जॉब और पुश्तैनी व्यवसाय छोड़कर खेती करने के निर्णय के बारे में नवदीप कहते है कि यह बिल्कुल संभव था कि अपने पुश्तैनी व्यवसाय में मैं ज्यादा पैसे कमा सकता था लेकिन मुझे खेती करने में जो आनंद और शुकुन मिलता है वो शायद बैंक अकाउंट में बढ़ते जीरो से नहीं मिलता. इसके साथ ही मुझे ग्राउंड जीरो पर काम करने का मौका मिल रहा है और कई किसानों की मदद भी कर सकता हूँ.

नवदीप ‘नेचुरा फार्म’ का सारा काम खुद सँभालते है. रिसर्च, खेती, प्रोडक्शन के साथ ही मार्केटिंग का काम भी खुद ही करते है. हफ्ते में चार से पांच दिन फार्म पर ही गुजारते है. इसके साथ ही साथी किसानों की मदद को हमेशा तैयार रहते है. कई कॉन्फ्रेंस एवं कृषि टॉक्स में नियमित रूप से भाग लेते है.

बी पॉजिटिव, नवदीप गोलछा जैसे प्रगतिशील किसान और युवा को खेतीबाड़ी में नवाचार करने के लिए बधाई देता है. हम उम्मीद करते है कि आप से प्रेरणा लेकर के देश के किसान भाई भी अपना जीवन स्तर ऊपर उठाएंगे.

Comments

comments