Navalkishor Ahir safed chandan : देशभर में करीब 70% लोग खेती-किसानी कर अपना जीवन यापन करते हैं, लेकिन सही उपकरणों और सही तकनीक की जानकारी ना होने की वजह से आज भी देश में करोड़ों किसान गरीबी में जीने के लिए मजबूर हैं.

एक तरफ देश का अन्नदाता किसान भूखों मर रहा है, वहीं कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो गेंहू धान की पारंपरिक खेती को छोड़कर लाखों की कमाई कर रहे हैं. आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी खेती सबसे ज्यादा रिटर्न दे सकती है. इसके लिए सब्र की जरूरत है और यह लांग टर्म इन्वेस्टमेंट हैं.

सफेद चंदन का पेड़ पहाड़ी और रेगिस्तानी प्रदेशों में भी लगाया जा सकता है. राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ौद के किसान नवलकिशोर अहीर (Navalkishor Ahir) ने चंदन की खेती कर ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे कृषि विभाग भी हैरान है.

राजस्थान के ही दौसा जिले के एक किसान की खबर पढ़कर नवलकिशोर ने भी सफ़ेद चन्दन की खेती करने का निर्णय किया. इसके लिए उन्होंने झालावाड़ कृषि विभाग की नर्सरी से संपर्क किया. लेकिन सफ़ेद चन्दन के पौधों की अनुपलब्धता के चलते उन्हें दो महीने तक इंतज़ार करना पड़ा.

300 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से उन्होंने 351 सफ़ेद चन्दन के पौधे मंगाने के लिए सरकरी नर्सरी में आवेदन किया. झालावाड़ नर्सरी ने कर्नाटक सरकार के सहयोग से नवल किशोर को पौधे उपलब्ध करवाए. उनमे से कुछ पौधे जलवायु से तालमेल न बिठा पाने के चलते नष्ट हो गए.

आज नवलकिशोर के खेत में लगभग 300 सफ़ेद चन्दन के पौधे लगे हुए है. आज वो पांच से छह फ़ीट के हो चुके है. नमी वाला वातावरण देने के लिए उन्होंने पपीता के पौधे भी साथ में लगाए है.

मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए अरहर की दाल और मक्के की फसल भी लगाई है. नवलकिशोर अपने खेत में केवल जैविक खाद का ही इस्तेमाल करते है जो वो स्वयं तैयार करते है. इसके साथ ही कीटनाशक के लिए भी घरेलु नुस्खों का उपयोग करते है.

पौधों की लंबाई अब दिनों दिन बढ़ रही है. यह उसकी मेहनत और पत्नी के साथ का ही नतीजा था कि आज 9 महीने बाद उनके पौधों की लंबाई 6 इंच से बढ़कर 5 फीट हो गई है.

उन्होंने बताया कि सफ़ेद चन्दन की खेती से हुए मुनाफे का तीस प्रतिशत वो भारतीय सेना को दान करेंगे. इसी के साथ मरुप्रदेश के अन्य किसानों की सहायता के लिए भी तैयार है.

सरकार ने सफेद चंदन की खेती करने को वैधता दे दी है. इस खेती में आप 80 हजार लगाकर 60 लाख तक की कमाई कर सकते हैं लेकिन जरूरत है तो सब्र और कड़ी मेहनत की.चन्दन की एक किलो लकड़ी दस हजार रुपए तक में बिक रही है.

इसी एक किलो लकड़ी की कीमत विदेशों में तो बीस से पचीस हजार रुपए तक है।.इस पेड़ की खास तरह की खुशबू और इसके औषधीय गुणों के कारण भी इसकी पूरी दुनिया में भारी डिमांड है.

Comments

comments