जब कोई भी प्रोफेशनल जॉब शुरू करता है तभी MBA या MTech करना चाहता है और कोई भी महिला कर्मचारी जब अपने दूसरे बच्चे को जन्म देती है तो नौकरी छोड़ने का विचार करती है लेकिन इस देश में ऐसे भी एक महिला प्रोफेशनल हुई है जिसने ऊपर लिखी दोनों बातों को झुठलाया है । इसके साथ ही साइकोलॉजी में मास्टर्स करने के बाद भी आईटी इंडस्ट्री में आने का फैसला किया और अपनी मेहनत के बलबूते न केवल शानदार काम किया बल्कि देश की टॉप आईटी कंपनी में वाईस प्रेजिडेंट के पद तक पहुंची । अपने हार्ड वर्क के चलते उन्होंने अपने प्रोफेशनल कैरियर में सब कुछ हासिल किया जो कि आज का युवा करना चाहता है । इस जुझारू एवं मेहनती महिला का नाम है नंदिता गुर्जर (Nandita Gurjar) ।

आजकल इनका एक इंटरव्यू मीडिया में छाया हुआ है जो उन्होंने एक रेडियो स्टेशन के प्रोग्राम आयरन लेडी में दिया । मीडिया एवं लाइमलाइट से दूर रहने वाली नंदिता ने भारत की टॉप आईटी कंपनी इनफ़ोसिस में एच आर (HR) डिपार्टमेंट के हेड के रूप में काम किया है तथा इनफ़ोसिस की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

शुरुआती जीवन एवं पहली नौकरी

हैदराबाद से आने वाली नंदिता गुर्जर (Nandita Gurjar) ने अपनी पढाई निज़ाम कॉलेज और ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से पूरी की । उन्होंने साहित्य में ग्रेजुएशन एवं साइकोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया था । जब वो पोस्ट-ग्रेजुएशन कर रही थी तभी उनकी शादी हो गयी थी अतः ससुराल में आकर उन्होंने अपनी पढाई पूरी की । पढाई ख़त्म करने के बाद वो माँ बन चुकी थी और तीन साल बाद उन्होंने एक और बच्चे को जन्म दिया । अपने दोनों बच्चों के लालन-पालन के बाद 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने काम करना शुरू किया ।

आईटी क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्होंने NIIT से कंप्यूटर में डिप्लोमा किया और देश की दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) में उन्होंने बतौर कंसलटेंट काम करना शुरू किया । वो अपने बैच में इकलौती नॉन-इंजीनियर थी लेकिन कड़ी मेहनत के चलते जल्द ही उनका प्रमोशन बतौर एसोसिएट इंजीनियर के रूप में हो गया । जब नंदिता ने 1992 में विप्रो ज्वाइन की तब उनका मेहताना 2000 रुपये मासिक था और वो उस समय अपने सहकर्मियों से लगभग तीन गुना कम था लेकिन जल्द ही उन्हें प्रमोशन के चलते मोटी पगार मिलना शुरू हो गयी ।

इनफ़ोसिस में नंदिता का प्रवेश

नंदिता हमेशा से ही कठोर मेहनत को किस्मत से ज्यादा मानती है और इसी के चलते उन्हें आईटी क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलती गयी । 1999 में उन्होंने इनफ़ोसिस में काम करना शुरू किया और इसके बाद मिले मौकों को भुनाने के चलते वो ह्यूमन रिसोर्स (HR ) में काम करने का मौका मिला । नंदिता ने अपने क्लाइंट के साथ ही अपनी कंपनी के वर्क कल्चर को सुधारने के लिए काम करना जारी रखा । एक डेवलपर से एग्जीक्यूटिव बनी नंदिता को सभी की समस्याओं को बारीकी से समझने में ज्यादा समय नहीं लगा ।

कर्मचारियों के काम की गुणवत्ता को सुधारने के लिए उन्होंने ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट सेण्टर की स्थापना की जिसके चलते इनफ़ोसिस के कर्मचारियों को वक्त के साथ बदलती टेक्नोलॉजी सीखने में काफी मदद मिली जिसके चलते इनफ़ोसिस को कई करोड़ रुपये की डील साइन करने का मौका मिला । ट्रेनिंग सेण्टर की सफलता ने नंदिता को टॉप मैनेजमेंट के सामने लाने में मदद की और इनफ़ोसिस ने अगले कुछ वर्षों में 27000 से ज्यादा इंजीनियर को अपनी टीम में शामिल किया । पुणे एवं मैसूर में अलग से विशेष ट्रेनिंग सेण्टर खोले गए जो कि नए इंजीनियर को ट्रेनिंग देने में काम आते है ।

सफलता के सातवे आसमान पर

नंदिता  ने सफलता की सीढियाँ चढ़ते हुए 2013 में इनफ़ोसिस के HR हेड का पद संभाला और महिला एवं पुरुष कर्मचारियों को कई सहूलियतें देने का काम किया जिसमे महिला कर्मचारियों को अपने बच्चे के रख-रखाव के लिए घर से काम करने का विकल्प भी शामिल है । इनफ़ोसिस में वक्त के साथ हुए सभी परिवर्तनों में नंदिता ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई है ।

नंदिता ने अपने दूसरे बच्चे के जन्म के बाद अपना कैरियर शुरू किया है और अभी वो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एग्जीक्यूटिव MBA के पश्चात अपना कैरियर ख़त्म कर रही है । उन्होंने अपने दृढनिश्चय एवं मेहनत से वो सब कुछ हासिल किया जबकि महिलाये अक्सर कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करते हुए संघर्ष करती हुई नजर आती है ।

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