यदि आप अपने सपने को जीना चाहते हैं, तो अपने सपने को चुनें। लोग चाहे कुछ भी कहें।

यह पंक्तियाँ बेंगलुरु में रहने वाली एक लेखिका पर सटीक बैठती हैं. कहानियों को अपना जीवन समझने वाली इस लेखिका ने समाज की मुख्यधारा के बने रीति-रिवाजों की जगह अपने सपनों को जगह दी. आम भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार में बेटा हुआ तो इंजिनियर और बेटी हुई तो डॉक्टर की अवधारणा की जगह लेखन को अपना पेशा चुनना अपने आप में चुनौतीपूर्ण हैं. लम्बे संघर्ष के बाद वो अपने आप को स्थापित कर पायी हैं. पेशे से एक लेखक, स्वतंत्र पत्रकार और कहानीकार का नाम हैं नमीता रेन्ची.

नमीता रेन्ची कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में रहती हैं और बचपन से इन्हे कविताओं और कहानियों का शौक रहा. वर्ष 2017 में उन्होंने अपना ब्लॉग शुरू किया और बड़े पैमाने पर ब्लॉग और कविताएं लिखना शुरू किया. समाज और उनको प्रेरित करने वाले लोगो के इंटरव्यू के बाद उनकी सफलता की कहानियां लिखना शुरू किया. कलम और कविता की ताकत को समझते हुए समसामयिक मुद्द्दों पर अपनी बेबाक राय रखी.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान नमीता रेन्ची बताती हैं कि कविताओं को मैंने अपना जीवन का मिशन बना लिया क्योंकि कविताए पहले पाठक या श्रोता का मनोरंजन करती हैं लेकिन उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव का संचार भी करती हैं. कभी-कभी स्वतंत्र लेखन को पत्रकारिता ही माना जाता हैं लेकिन शब्दों को पिरोकर उनसे जादू बिखेरना इतना आसान भी नहीं हैं.

nameeta blog
ब्लॉग के जरिये अपनी रचनाए पाठकों के पास लाती हैं नमीता

नमीता आगे बताती हैं कि मैं एमिली पार्कर के नाम से लिखती हूं जबकि कविताओं और बाकी लेखों को कलमबद्ध करके मेरे नाम नमीता रेन्ची से प्रकाशित किया जाता है. मैंने अपने जीवन के अनुभवों को एक ब्लॉग (nameeta.co.in) की शक्ल दी हैं जहाँ पर मैं अपनी ज़िन्दगी के अच्छे या बुरे अनुभवों से लोगो को मुखातिब करवाती हूँ.

अपने बचपन और परिवार के बारे में नामिता कहती हैं कि केरल के अल्लेप्पी जिले के एक मध्यम वर्गीय परिवार में मेरा जन्म हुआ और बचपन वही गुजरा. सामान्य CBSE स्कूलों से शिक्षा प्राप्त की और पढ़ने की बचपन से ही रूचि रही. मेरे माता-पिता ने मुझे कहानी की किताबें दिलाकर सबसे अच्छा काम किया और इसके बाद मुझे कहानी सुनना और सुनाना अच्छा लगने लगा.

बैंगलोर यूनिवर्सिटी से कम्युनिकेशन में पढाई करने के बाद मैंने कई न्यूज़-पेपर और पत्रिकाओं में काम किया. कुछ समय काम करने के बाद अपने ब्लॉग के माध्यम से लोगो को अपनी रचनाए पेश की. शुरुआत में कुछ दिक्कत हुई लेकिन समय के साथ सब सही होता गया. कई बार मेरी लेखन की प्रतिभा को उपहास किया गया और मुझे नौकरी करने के लिए कहा गया लेकिन मुझे मेरे पैशन और प्रतिभा पर पूरा भरोसा था.

नमीता आगे बताती हैं कि मैं हमेशा से किताबी कीड़ा थी और हमेशा किताबों को अपने बेहतर दोस्त के रूप में पाया. अगर आप लेखक बनना चाहते हैं, तो लिखते रहें. किसी को आपसे सवाल करने का अधिकार नहीं हैं. अगर आप डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं, तो किसी को भी आपत्ति नहीं होती हैं तो लेखक बनने से लोगो को आपत्ति क्यों होती हैं. अपनी कला पर काम करो और इसे बेहतर बनाते जाइये. आपको पता भी नहीं लगेगा कि कब आपका जूनून आपका पेशा बन गया.

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लेखन के दौरान नमीता

नमीता रेन्ची की कविताएँ विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित हो रही हैं. इसके साथ ही उनका कविता संकलन ‘365 Days of Poetry‘ भी इस साल के अंत में प्रकाशित होगी. उनके उपन्यास “The Best BONSAI People” पर भी काम चल रहा हैं.

इसके साथ ही नमीता रेन्ची के पास स्वतंत्र लेखकों की एक टीम है, जो कई परियोजनाओं पर काम करती हैं. इसके साथ ही कंटेंट राइटिंग, फोटोग्राफी में भी इनकी दिलचस्पी हैं. उनकी रचनाए आमतौर पर सरल शब्दों में होती हैं और रोजमर्रा की ज़िन्दगी को छूती हुई कहानियां कहती हैं.

नमीता रेन्ची आगे बताती हैं कि मुश्किलों का सामना करते हुए आपको अपने सपने या जूनून को जीना चाहिए. उसके लिए जिए जो आप चाहते है, चाहे वो कोई भी हो. लेखन के क्षेत्र में अपने शब्दों का समझदारी से उपयोग करें क्योंकि शब्दों के हेरफेर में अर्थ का अनर्थ हो सकता हैं.

अगर आप भी नमीता रेन्ची से संपर्क करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक कीजिये.

बी पॉजिटिव इंडिया, नमीता रेन्ची के लेखन कार्य की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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