भारत में अनेकता में एकता को यह मंदिर साकार कर रहा है.भारत में हिन्दू धर्म के साथ ही अन्य धर्म को मानाने वाले लोग शांति से रहते है और देश में ऐसे कई उदाहरण मिल जाते है जिनमे कभी मंदिर में नमाज़ पढ़ी जाती है तो मस्जिद में रथ यात्रा का ठहराव होता है.

गुरूद्वारे में चलने वाले लंगर प्रतिदिन लाखों लोगों को बिना कोई धर्म के भेदभाव के सबको गर्म खाना परोसते है. यही हमारा भारत है और यही हमारी सांस्कृतिक धरोहर है.

एक ओर जहां देश में समय- समय पर धर्म के नाम पर लोगों को बांटा एवं भड़काया जाता है लेकिन पूर्वोत्तर राज्य असम में सामाजिक सद्भाव की एक कहानी लोगो की जुबान पर है.

असम का प्रसिद्ध 500 साल पुराना मंदिर | तस्वीर साभार : ANI

असम के गुवाहाटी शहर के नजदीक रंगमहल गांव में एक मुस्लिम परिवार पिछले 500 सालों से शिव मंदिर की देखरेख कर रहा है. इस मंदिर में न केवल हिंदू बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी मन्नत मांगने के साथ श्रद्धा व्‍यक्‍त करने आते हैं. नेशनल मीडिया के साथ ही पूरे इलाके में इस शिव मंदिर की चर्चा है.

कई पीढ़ियों से इस मंदिर की देखरेख करने वाले मतिबर रहमान बताया, ‘ भगवान शिव मेरे नाना की तरह हैं. मैं उन्हें ‘नाना’ कहता हूं. यह मंदिर 500 साल पुराना है. हमारा परिवार इस मंदिर की देखभाल करता है. इस मंदिर में हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों के लोग आकर प्रार्थना करते हैं.’

मंदिर की देखभाल करने वाले मतिबर रहमान| तस्वीर साभार : ANI

रहमान ने कहा कि मुसलमान इस मंदिर में आकर ‘दुआ’ करते हैं तो वहीं हिंदू यहां ‘पूजा’ करते हैं. सभी की मनोकामनाएं यहां पूरी होती हैं.

उन्होंने कहा कि वह खुद इस मंदिर में ‘दुआ’ करते हैं. उनका परिवार पीढ़ियों से इस मंदिर का देखभाल देखभाल कर रहा है. इस इलाके में यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता का एक उदाहरण माना जाता है.

बी पॉजिटिव , गुवाहाटी के परिवार को सामाजिक सद्भावना फ़ैलाने के लिए शुभकामना देता है. उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर हमारे पाठक भी देश की अखंडता को बनाये रखने में अपना योगदान देंगे.

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