तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा’ । इस गीत की पंक्तियां इंसानियत के एक विशेष संदेश को दर्शाती है।

सौहार्द व भाईचारे के पाक माह(रमजान) में 16 मई 2019 को इंसानियत का एक बड़ी मिसाल देखने को मिली। एक घायल की जान बचाने के लिए अपना रोज़ा तोड़ कर इंसानियत का धर्म पहले निभाया।

राजस्थान के  लाॅयन्स क्लब कोटा टेक्नो के सचिव व टीम जीवनदाता के संयोजक भुवनेश गुप्ता बताते है कि एमबीएस अस्पताल में दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में 48 वर्षीय अरनेठा जिला बूंदी निवासी राजेन्द्र शर्मा भर्ती थे। दुर्घटना में उनका पैर टूट गया था और दुर्लभ ग्रुप के रक्त ए नेगेटिव की लगातार जरूरत पड़ रही थी।

उन्होने भी ने अपने स्तर पर कई प्रयास किए। अंत में टीम जीवनदाता के जुड़े विट्ठल गौतम से संपर्क किया। गौतम ने भुवनेश गुप्ता से दुर्लभ ग्रुप ए नेगेटिव का डोनर तलाशने हेतु चर्चा की।

ए नेगेटिव ग्रुप के अधिकतम डोनर अपनी व्यस्तताओ में शहर के बाहर थे। अंत में गोविन्द नगर में टायर पंचर की छोटी सी दुकान चलाने वाले ए नेगेटिव रक्त ग्रुप के खालिद मोहम्मद से संपर्क हुआ। गुप्ता व गौतम ने उन्हे ए नेगेटिव रक्त की जरूरत बताई और उनको रक्तदान करने हेतु अनुरोध किया।

खालिद मोहम्मद रोजे कर रहे थे। फ़ोन काॅल पर तो वह कुछ देर धर्मसंकट में रहे, पर उन्होने कहा कि मजहब ने सिखाया है कि किसी भी धर्म से पहले इंसानियत का धर्म बड़ा होता है। फेसबुक व वाॅटसएप पर भी खालिद टीम जीवनदाता के निरंतर पोस्ट से बहुत ज्यादा प्रभावित था।

वह तुरंत एमबीएस ब्लड बैंक आए और जूस पिया व रक्तदान किया। इंसानियत के दर्जे को इतना बड़ा मानन के भाव को वहां मौजूद अधीक्षक के निजी सहायक शर्मा देखकर अभिभूत हो गए। उन्होने इस सदभावनापूर्वक किए गए जीवनदायिनी कार्य के प्रति कृतज्ञता जाहिर की। स्वयं के अतिरिक्त अन्य परिवारजन को भी प्रत्येक तीन माह में रक्तदान करने के अपने संकल्प को दोहराया।

बी पॉजिटिव इंडिया, खालिद मोहम्मद एवं टीम जीवनदाता के कार्यो की सराहना करता है और उम्मीद करते है कि आपसे प्रेरणा लेकर देश में धार्मिक सद्भाव को नयी ऊंचाइयां मिलेगी।

( ये स्टोरी बी पॉजिटिव इंडिया के साथी जगदीश धाकड़ ने की है )

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