देश में महिलाओं की हालत किसी से छुपी हुई नहीं है । कम उम्र में शादी, दहेज़ प्रथा एवं घरेलु उत्पीड़न जैसी कई समस्याओं का सामना आधी आबादी को करना पड़ता है । शिक्षा एवं रोजगार के आभाव में यह बेटियां इन दंशों को झेलकर बच भी जाये तो परिवार पर बोझ बनाने की मुसीबत आ जाती है क्योंकि उच्च शिक्षा के अभाव में इन्हे ढंग का रोजगार नहीं मिल पाता है । इन सभी के बीच मुंबई की एक महिला ट्रैन चालक उम्मीद की किरण बन कर आयी है जिसने आज से पच्चीस वर्ष पूर्व ट्रैन का चालक बनने का निर्णय किया और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पच्चास चालकों के बैच में वह टॉपर बनी थी । नारी शक्ति कि इस मिसाल का नाम है मुंबई की रहने वाली और एशिया की पहली डीजल इंजन ट्रैन चलाने वाली ट्रैन चालक मुमताज काजी

आज शिक्षा एवं तकनीक के युग में लड़कियों का पढ़ना बहुत आसान है लेकिन आज से पच्चीस वर्ष पूर्व कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि पुरुषों के प्रभुत्व वाले ट्रैन चालक के क्षेत्र में कोई महिला भी काम कर सकती है । इस असंभव से काम को संभव बनाने वाली शख्सियत का ही नाम है मुमताज काजी ।

मुमताज 20 वर्ष की थीं, तब उन्होंने पहली बार ट्रेन चलाई थी। 47 वर्षीय मुमताज 1991 से भारतीय रेलवे में नौकरी कर रही हैं। वह कई तरह की रेलगाड़ियां चला लेती हैं और फिलहाल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-ठाणे पर मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेन चलाती हैं। यह रेलवे मार्ग किसी महिला ड्राइवर द्वारा चलाया जानेवाला देश का पहला और सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला मार्ग है।

उनके पिता रेलवे में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके है और वो घर पर अक्सर अपने बच्चों के सामने ट्रैन ड्राइवर्स के रोमांचक सफर के बारे में बातें करते थे । मुमताज ने भी इन कहानियों को सुनकर ट्रैन ड्राइवर बनने का इरादा मन में पक्का कर लिया । उन्होंने बारहवीं की पढाई के बाद रेलवे के ड्राइवर बनने के लिए आवेदन कर दिया । लिखित परीक्षा में मुमताज ने टॉप किया । अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने परीक्षा तो पास कर ली लेकिन उनके पिता ने उनको रेलवे ज्वाइन करने के लिए मना कर दिया ।

जब उन्होंने 1989 में रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन दिया था तब उनके पिता ही उनके खिलाफ खड़े थे। लेकिन बाद में उनके सहकर्मियों के समझाने एवं मुमताज की लगन को देखकर, वह थोड़े नरम पड़े और बेटी को अपना पसंदीदा काम करने की इजाजत दे दी।

Mumtaz Kazi award
पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी से नारी शक्ति सम्मान ग्रहण करती मुमताज काज़ी | Image Source

शुरुआत में उन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन सहकर्मियों एवं परिवार वालों के सहयोग से उन्होंने अपना काम जारी रखा और आज उन्हें ट्रैन के चालक के रूप में लगभग 27 वर्ष हो गए है । अब पूरा परिवार मुमताज पर गर्व करता है। वह सायन में रहती हैं । उन्होंने नंदुरबार के एक बिजली इंजीनियर मकसूद काजी से शादी की है, जिससे उनके 14 वर्षीय बेटा तौसीफ और 11 वर्षीय फतेन हैं।

मुमताज ने अपने पसंद के क्षेत्र में काम करके कई कीर्तिमान बनाये है जिनमें वो भारत के साथ ही एशिया की पहली डीजल इंजन चालक बनने का भी गौरव प्राप्त है । आज मुमताज के नाम कई खिताब हैं। 1995 में उनका नाम लिमका बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में दर्ज हुआ, 2015 में उन्हें रेलवेज जनरल मैनेजर अवॉर्ड से नवाजा गया ।

मुंबई की मुमताज एम काज़ी को, जो देश ही नहीं पूरे एशिया की पहली डीजल इंजन ड्राइवर हैं, 2017 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया। मुमताज को तीन साल पहले पहली डीजल इंजन चालक होने का गौरव प्राप्त हुआ था। हर साल महिला दिवस पर अलग-अलग क्षेत्र की कई महिलाओं को इस पुरस्कार से नवाजा गया, जिनमें से एक मुमताज भी हैं। नारी शक्ति पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए की राशि और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है।

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