क्रिकेट दीवाने भारत में सचिन तेंदुलकर भगवान की तरह पूजे जाते है और उनके कवर एवं स्ट्रैट ड्राइव के भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लाखों लोग दीवाने है । जब वो अपने बैट जिस पर MRF कंपनी का स्टीकर लगा होता था, से चौके लगाते तो पूरा भारत ख़ुशी से झूम उठता । इसी कंपनी का स्टीकर विराट कोहली, पृथ्वी शॉ , शिखर धवन और दक्षिणी अफ़्रीकी बल्लेबाज AB डिविलयर्स के बैट पर भी देखते है । क्रिकेट के महान बल्लेबाजों एवं गेंदबाजों को स्पांसर करने वाले MRF(मद्रास रबड़ फैक्ट्री ) की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है ।

दक्षिण भारत के मद्रास (अब चेन्नई ) में खुली एक टायर फैक्ट्री आज भारत की सबसे बड़ी टायर निर्माता कंपनी है । इसी की साथ वो विश्व की 14 वी बड़ी टायर निर्माता कंपनी है । इस कंपनी ने अपनी स्थापना के बाद से ही मार्केट में कई रिकॉर्ड स्थापित किये है । इस कंपनी को भारतीय शेयर मार्केट में सबसे महंगे शेयर का गौरव हासिल है । इसके एक शेयर की कीमत लगभग 70,000 है और कुल मार्केट कैप 28,000 करोड़ के आसपास है ।

हौसला हो तो इंसान कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है। कुछ ऐसा ही एमआरएफ टायर कंपनी के मालिक के एम मेमन मैपिल्लई ( K M Mammen Mapillai ) ने कर दिखाया। एक वक्त था जब मेमन केरल की सड़को पर एक बैग में बैलून या गुब्बारे बेचा करते थे । लेकिन अपने लगन और हिम्मत के दम पर एमआरएफ जैसी कंपनी खड़ी कर दी। आज एमआरएफ टायर की मार्केट कैप 28 हजार करोड़ की हो चुकी है।

एमआरएफ टायर यानी मद्रास रबर फैक्ट्री आज टायर इंडस्ट्री में बड़ा नाम है, लेकिन एक दौर था जब इस कंपनी को शुरू करने वाले शख्स के एम मेमन मैपिल्लई ने सड़कों पर बैलून बेचे थे। मेमन आजादी से पहले केरल की सड़कों पर पैदल घूमकर एक बैग में बैलून रखकर बेचा करते हैं। मेमन के पिता ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था और जेल भी गए थे। मेमन के पिता जब जेल में थे तो वह बैलून बेचकर परिवार चलाया करते थे औऱ साथ में पढ़ाई भी करते थे।

Sachin Tendulkar MRF
टेस्ट मैच में शतक लगाने के बाद अभिवादन करते सचिन तेंदुलकर | Image Source

मेमन ने ग्रेजुएशन भी टायर मैन्युफैक्चरिंग में ही की और फिर करीब 6 साल तक बैलून का कारोबार करने के बाद 1946 में ट्रीड रबर बनाना शुरू कर दिया। 24 साल की उम्र में ही मेमन ने बिजनेस शुरू कर दिया था। शुरुआत में एक छोटे से कमरे में बैलून और बच्चों के खिलौने बनाने वाले मेमन दस्ताने और गर्भनिरोधक बनाने लगे और अपना पहला ऑफिस चीटे स्ट्रीट, मद्रास में खोला ।

धीरे-धीरे यह  रबड़ से बने उत्पादों को बहुत ज्यादा मात्रा में बेचने लगे । यही यही कारण है कि 1956 तक आते-आते यह कंपनी रबर के क़ारोबार में बड़ा नाम बन गया और 50% से अधिक शेयर का मालिक बन गया। रबर प्रोडक्ट्स में सफलता के बाद उन्होंने टायर के बिजनेस में जाने का फैसला किया था ।

मेमन ने 1960 में प्राइवेट लिमिडेट कंपनी बनाई। उनको रबर और टायरों के बारे अच्छी जानकारी थी।  1961 इस कंपनी के लिए बहुत बड़ा साल बनकर आया जब यह संयुक्त राज्य अमेरिका  में स्थित मैन्सफील्ड टायर एंड रबर कंपनी के साथ मिलकर  टायर बनाना चालु किया , और उसी साल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री  के कामराज ने  MRF  का पहला टायर लॉन्च किया। 1967 में एफआरएफ अमेरिका को एक्सपोर्ट करने वाली पहली कंपनी बन गई, तो वहीं 1973 में कंपनी ने देश में पहली बार नायलान टायर लॉन्च किया।

साल 1979 तक कंपनी का नाम विदेश में फैल चुका था, लेकिन इसी साल अमेरिकी कंपनी मैंसफील्ड ने एफआरएफ से अपनी हिस्सेदारी खत्म कर ली। इसके बाद कंपनी का नाम एमआरएफ लिमिटेड हो गया। इसके बाद मेमन ने छोटी-बड़ी कई कंपनियों के साथ टाईअप कर कंपनी को एक नए मुकाम पर पहुंचाया।

मारुति 800 भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ी में से एक  गिनी जाती है उस गाड़ी में जिस टायर का  उपयोग किया गया वह भी MRF के द्वारा बनाया गया था। 1989 में इस कंपनी ने हस्ब्रो इंटरनेशनल यूएसए,  जो दुनिया के सबसे बड़ी खिलौना बनाने वाली कंपनी में से एक है उसके साथ फनस्कूल इंडिया  का शुभारंभ किया। अमेरिका, यूरोप, प्रशांत क्षेत्र , सहित कंपनी का कारोबार कुल मिलाकर 65 देशों में फैल चुकी है जहाँ यह अपने उत्पादों का निर्यात करती है ।

क्रिकेट और MRF का बहुत करीब का रिश्ता है और MRF विश्व क्रिकेट के कई बड़े टूर्नामेंट को प्रायोजित कर चुकी है । ICC द्वारा दी जाने वाली रैंकिंग का मुख्य स्पांसर भी MRF कंपनी ही है । रबर से बने उत्पादों को छोड़ दिया जाए तो यह कंपनी एक फाउंडेशन भी चलाती है । जिसका नाम MRF पेस फाउंडेशन है। जिसकी शुरुआत 1987 में ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज डेनिस लिली के सहयोग से किया गया ।

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आँध्रप्रदेश स्थित MRF का टायर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट | Image Source

यह फाउंडेशन तेज गेंदबाजों को प्रशिक्षित करने का काम करती है । अगर हम बात करें कुछ ऐसे खिलाडी के बारे में जो इस कंपनी के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं । तो वह हैं जवागल श्रीनाथ, इरफान पठान, मुनाफ पटेल, वेकेंटेश प्रसाद, आर पी सिंह, जहीर खान, श्रीसंत ,हेनरी ओलंगा, हीथ स्ट्रीक , ग्लेन मैकग्रा,  मिचेल जॉनसन के अलावा और भी कई खिलाडी हैं जिन्होनें MRF पेस फाउंडेशन के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया। 

अगर देखा जाए तो यह कंपनी अपने उत्पाद  के उच्च गुणवत्ता के लिए खासतौर पर जानी जाती है । यही कारण है कि 2001 में सर्वप्रथम इसे जेडी पावर अवार्ड मिला। जेडी पावर अवार्ड उस कंपनी को दिया जाता है जिसके उत्पाद की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है । 2001 से लेकर 2018  तक यह अवार्ड इस कंपनी को 12 बार दिया जा चूका है। इसके साथ- साथ और भी कई प्रकार के अवार्ड है जो इस कंपनी को अब तक मिल चूका है । साल 2003 में 80 साल की उम्र में मेमन का निधन हो गया। लेकिन मेमन तब तक कंपनी को टायर के फील्ड में नंबर वन बना दिया।

मेमन के जाने के इनके बेटों ने बिजनेस की कमान संभाली और कंपनी लगातार ग्रोथ करती रही। यह मेमन की हिम्मत और उनके बेटों की काबिलियत ही है कि आज एमआरएफ 28 हजार करोड़ की कंपनी बन चुकी है। इसके एक शेयर की 70 हजार रुपए है, जो भारत में सबसे ज्यादा है।

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