पंजाबी शादियाँ अपने आप में एक ट्रेडमार्क होती है. भारी-भरकम बजट के साथ ही डीजे, भांगड़ा और नाच-गान इसका मुख्य आकर्षण होते है. लेकिन समय के साथ अब पैसों की बर्बादी रोकने और लोगों को पंजाब और पंजाबी साहित्य से जोड़ने के लिए एक दम्पति ने अलग फैसला लिया. उनके इस फैसले को चारो-तरफ से तारीफे मिल रही है.

पंजाब में होशियारपुर के इंजीनियर दूल्हे संदीप सिंह सहोता और पंजाबी की असिस्टेंट प्रोफेसर दुल्हन कौरपाल ने अपनी शादी रविवार को एक नए अंदाज में की। गांव भारटा-गणेशपुर में शादी की तैयारियां आम शादी की तरह ही थीं, लेकिन अंदर आयोजन स्थल का नजारा कुछ अलग सा था।

डीजे की बजाय साहित्यकारों, कवियों और शेर-ओ-शायरी से बारातियों और घरातियों का मनोरंजन किया गया। खाने-पीने के स्टॉल के साथ किताबों का स्टॉल भी लगाया गया।

शादी में मेहमानों ने कवियों की रचना और गजल पर भांगड़ा किया। किताबों के शौकीन पूरे परिवार ने खाने-पीने के स्टॉल के साथ यहां दो स्टॉल पंजाबी साहित्य और अन्य किताबों के भी लगाए।

मेहमानों ने खानेपीने के साथ किताबें भी खरीदीं और पंजाबी साहित्य की तारीफ की। प्रोग्राम में आए 455 मेहमानों ने करीब 9,000 रुपए की किताबें खरीदीं ।

लड़की के पिता प्रीतनीत पुरी पंजाबी कहानीकार हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया, “पूरा परिवार किताबें पढ़ने का शौकीन है। इंटरनेट के इस युग में लोगों में किताबें पढ़ने की रुचि घटती जा रही है।

हर कोई जल्दी में है, साहित्यिक किताबों के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है, इसलिए इस आयोजन में मैंने खाने-पीने के 25 स्टॉल के साथ किताबों के भी दो स्टॉल लगवा दिए।”

पंजाबी साहित्य और शायरों की किताबें रखी गई थीं। ये सब बेटी और दामाद को भी पसंद आया है। शादी समाराेह में पंजाबी के 112 प्रसिद्ध शायर मौजूद थे।

पूरा विश्व जहाँ भारतीय संस्कृति और साहित्य की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है जबकि देश के युवा पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे है . ऐसे में इस प्रकार के नवाचार उम्मीद की किरण बनकर आये है. इनका समाज में स्वागत करना चाहिए.

स्टोरी साभार : दैनिक भास्कर

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