हरियाणा के भिवानी जिले के छोटे से गांव हांसी से आने वाले इस खिलाड़ी ने क्रिकेट के बाद सबसे ज्यादा महंगे प्लयेर बनने का गौरव हासिल किया है। पिछले साल प्रो कबड्डी प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर चैम्पियन बनने वाले इस खिलाड़ी को छठे सीजन में हरियाणा स्टिलार्स टीम ने डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा में खरीदा हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यह कीमत भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री से भी ज्यादा हैं। कबड्डी जैसे खेल से सफलता की बुलदियों को छूने वाले इस खिलाड़ी का नाम है मोनू गोयत (Monu Goyat)

क्रिकेट प्रेमी इस देश में पिछले कुछ सालों से कबड्डी में भी रुचि बढ़ी हैं। आईपीएल की तर्ज पर शुरू हुई प्रो कबड्डी लीग ने न केवल कबड्डी खेल को बदल दिया बल्कि कबड्डी के खिलाड़ियों की भी ज़िन्दगी बदल दी हैं। मोनू गोयत ने पटना पायरेट्स को पिछले संस्करण में विजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रदीप नरवाल और मोनू गोयत की जोड़ी का तोड़ पूरे टूर्नामेट में किसी के पास नहीं था। प्रदीप जहां पटना के स्टार थे लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में कई बार मोनू गोयत ने अपनी टीम पटना पायरेट्स की नैया पार लगाई।

हरियाणा के भिवानी जिले से देश के कई कबड्डी प्लेयर्स निकले है और उसी परंपरा को मोनू गोयत ने आगे बढ़ाया।  एक किसान परिवार में जन्मे मोनू गोयत ने नौ साल की उम्र से ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। उनके चाचा विजेंद्र सिंह जो भी अपने समय में एक प्रसिद्द कबड्डी प्लयेर रह चुके है , ने मोनू गोयत को बहुत प्रभावित किया था।

एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले मोनू गोयत ने कबड्डी खेलने के साथ ही अपने परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए 2010 में भारतीय सेना में काम करना शुरू कर दिया। भारतीय सेना में आने के बाद मोनू गोयत को कबड्डी के लिए एक बेहतरीन मंच मिला जिसके चलते उनके खेल में लगातार निखार आने लगा।  वो अपने प्रदर्शन से लगातार कबड्डी सर्किट में अपनी पहचान बना रहे थे।

इसी बीच 2011 में कबड्डी खेलेते वक्त वो चोटिल हो गए जिसके चलते उन्हें लगभग एक साल से ज्यादा समय तक कबड्डी कोर्ट से दूर रहना पड़ा।  इस मुश्किल समय में उनके परिवार और कोच ने उनकी बहुत मदद की। चोट के चलते उन्हें अपनी तकनीक में भी परिवर्तन करना पड़ा जो आगे जाकर उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ।

2014 में भारतीय कबड्डी में नए युग का सूत्रपात हुआ और देशी समझे जाने वाले इस खेल में ग्लैमर और पैसे का तड़का लगा जिसे आज हम प्रो कबड्डी लीग के नाम से जानते हैं। कबड्डी प्लेयर्स अब हर घर में पहचाने जाने लगे तथा क्रिकेट के बाद कबड्डी को सबसे ज्यादा प्यार मिला । आर्मी के सख्त नियमों के चलते मोनू गोयत को प्रो कबड्डी के शुरुआती तीन सीजन में खेलने का मौका नहीं मिला। इन सबसे निराश होने के बजाय मोनू गोयत ने अपने खेल को सुधारने पर ध्यान दिया ।

2016 में आर्मी ने प्रो कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अपने खिलाड़ियों को भेजा जिनमें मोनू गोयत भी एक थे। शुरुआती नियमों के चलते उन्हें बंगाल वॉरियर्स ने 18 लाख रुपए में खरीदा। कोरियन स्टार जांग कुन ली के साथ उनकी जुगलबंदी ने सभी को प्रभावित किया। भले ही सीजन में बंगाल वॉरियर्स का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा लेकिन मोनू गोयत ने अपने खेल से दर्शकों के साथ ही टीम सेलेक्टर्स के दिल में भी जगह बनाई।

साल के अंत में खेले गए पांचवे सीजन में मोनू गोयत ने पटना पायरेट्स का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला जिसे उन्होंने दोनों हाथों से भुनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। अपनी टीम को चैम्पियन बनाने के साथ ही वो टूर्नामेंट स्कोरर लिस्ट में चौथे नंबर पर रहें। यहां पर भी मोनू ने प्रदीप नरवाल के साथी के रूप में अपनी पहचान बनाई ।

जून 2018 में हुई नीलामी में मोनू गोयत देश के सबसे महंगे कबड्डी प्लयेर बने। उनके कंधों पर सपोर्टिंग रेडर की जगह मुख्य रेडर की जिम्मेदारी दी गई। कबड्डी जैसे खेल में बरस रहे पैसे ने इस बार छह प्लेयर्स को करोड़पति बना दिया जिनमें से एक नाम मोनू गोयत भी हैं।

हरियाणा के छोटे से गांव से निकलकर देश के सबसे महंगे गैर क्रिकेट खिलाड़ी बनने वाले मोनू गोयत से देश के सभी कबड्डी खेलप्रेमियों को काफी उम्मीदें हैं। मोनू गोयत ने अपनी पहचान बनाने के लिए कठिन संघर्ष किया और जब परिस्थितिया अनुकूल नहीं होने के बावजूद धेर्य नहीं खोया और जैसे ही मौका मिला अपने खेल की बदौलत आज कबड्डी खेल में अपने आप को स्थापित कर दिया।

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