आज हर चीज के लिए ऑनलाइन बुकिंग का जमाना है तो फिर अपने अंतिम संस्कार के लिए भी लोग पीछे क्यों रहें। वह भी इंटरनेट के ऐसे युग में जब हर काम के लिए अलग-अलग वेबसाइट हैं। लोगों ने अंतिम संस्कार करवाने और करने वाले लोगों के लिए एक वेबसाइट भी बना ली है।

वो वेबसाइट के जरिये अंतिम संस्कार में होने वाले सभी कर्मकांडों का धार्मिक मान्यताओं से निर्वहन करते है. हिन्दू धर्म के साथ ही पारसी, बौद्ध , मुस्लिम, ईसाई एवं जैन धर्म के अनुसार लोगों का अंतिम संस्कार करने की सेवाए देते है. इस अद्भुत स्टार्ट-अप का नाम है : मोक्षशील (Mokshshil).

अहमदाबाद में रहने वाले डॉ अभिजीत सिंह (Abhijeet Singh) और डॉ बिल्वा देसाई सिंह (Bilva Desai Singh) के दिमाग की उपज है यह कंपनी. दोनों ही मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ ही पीएचडी होल्डर है. वर्तमान में L J Institute of Management Studies में प्रोफेसर है. दोनों ने 2010 में शादी कर ली और साथ ही यह स्टार्टअप भी चला रहे है.

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दोनों ने मिलकर मोक्षशील नाम से एक नई कंपनी शुरू की जो की लोगो के लिए 5000 रुपए में सामान्य सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। अखबार में श्रद्धांजलि प्रकाशित करवाने, अस्थि विसर्जन करने, प्रार्थन सभा की व्यवस्था करती है. अन्य सेवाओं जैसे कि भोजन-प्रसादी और अंगदान के लिए अलग-अलग शुल्क तय किया जाता है .

इसके साथ-साथ यह कंपनी पंडित से लेकर श्मशान घाट बुक कराने, शव वाहन, अर्थी, मालाएं और मिट्टी के बर्तन ही उपलब्ध कराने का कार्य करती है. कंपनी ने अपने साथ 350 से अधिक पंडितों को जोड़ रखा है जिनके जरिये सभी कार्य पुरे होते है. अभी कंपनी अपनी सेवाए अहमदाबाद, गांधीनगर और बड़ौदा में अपनी सेवाए दे रही है.

किसी भी व्यक्ति को इनकी सेवाए लेने के लिए उन्हें कॉल करना होता है. मोक्ष मैनेजर उनसे बेसिक जानकारी लेकर उनके लिए अंतिम संस्कार की व्यवस्था कर देता है. एक घण्टे में पंडित जी कस्टमाइज अंतिम संस्कार किट लेकर घर पर पहुँच जाते है. अलग-अलग जरॉरोअतों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाए की जाती है.

Mokshshil Team
Mokshshil Team एक इवेंट के दौरान | Image Credits : Facebook Page/Mokshshil

बिल्वा देसाई कॉलेज प्रोफेसर है व उनका कहना है कि शहरों में परिवार ऐसी त्रासदी का सामना करने के लिए तैयार नहीं होते हैं। बिल्वा देसाई ने कहा कि मेने भी 2012 में अपनी मां को खोया है. और उस कठिन परिस्थिति में अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थाए करना बड़ा मुश्किल रहा.

बिल्वा ने कहा कि हमने चार हजार लोगो पर किये गए सर्वे में देखा कि करीब 76 फीसदी लोग अब भी अंतिम संस्कार की विधि से अंजान हैं. व 37 फीसदी लोगो को अंतिम संस्कार करते समय विभिन्न परेशानियों से जूझना पड़ता है.

यह मार्केट बहुत बड़ा है और सबसे बड़ी बात यह है कि लोग इस पर बात करने से कतराते है. शहरों में इस तरह की व्यवस्थाए करना बहुत मुश्किल वाला काम है.

अभी मोक्षशील में दस से अधिक लोग काम करते है. उनको गुजरात स्टार्टअप फण्ड से बीस लाख रुपये का फण्ड भी मिला है. जिसके जरिये वो अपनी कंपनी के विस्तार में खर्च करने के लिए योजनाए बना रहे है. देश के दूसरे शहरों में भी इस तरह कि सर्विसेज की आवश्यकता है लेकिन मोक्षशील मार्केट की लीडर है.

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