देश में नेताओं के यह हाल है कि ग्राम प्रधान या पार्षद बनने पर काफिले के साथ चलते हैं. महँगी गाड़ियों के साथ ही समर्थकों की लम्बी फेहरिस्त होती हैं. चुनाव जीतने के पांच साल के अंदर ही नेताओं की आय कई गुना बढ़ जाती हैं. लेकिन देश में ऐसे भी नेता हुए हैं जिनके पास न कोई गाड़ी हैं और न ही कोई बंगला या कोठी. जनता की सेवा में उन्होंने सब कुछ लुटा दिया हैं और सामान्य ज़िन्दगी जीते हैं. ऐसी ही कुछ कहानी हैं उत्तरप्रदेश के कानपूर के सात बार विधायक रह चुके भगवती सिंह.

यूपी के उन्नाव जिले में एक गरीब परिवार में जन्मे 98 साल के भगवती सिंह सात बार विधायक रह चुके हैं. लेकिन ना तो इनके पास अपना कोई घर है और ना ही कोई गाड़ी. उम्र के इस पड़ाव में बेटे के साथ किराये के मकान में रहते हैं. आज जहां प्रधान, पार्षद सभासद, विधायक और सांसद बनने के बाद नेताओं के पास अकूत संपत्ति हो जाती है, वहीं यूपी विधानसभा में सात बार जाने वाले धनकुट्टी निवासी पूर्व एमएलए भगवती सिंह के पास खुद का घर तक नहीं हैं.

MLA Bhagwati Prasad
उम्र के इस पड़ाव में अपने घर पर ही रहते हैं भगवती सिंह

भगवती सिंह विरशाद का जन्म 30 सितंबर 1920 को उन्नाव जिले में एक मजदूर के घर में हुआ था. उनाव में पांचवी तक की पढ़ाई करने के बाद भगवती सिंह कानपुर अपने पिता के पास आ गए. यहीं से उन्होंने मिडिल की पढ़ाई और ग्यारह साल की उम्र से यहाँ की कपड़ा मार्केट में लिखा-पढ़ी का काम करने लगे. काम के दौरान मज़दूरों के लिए आंदोलन करते रहे और पढ़ाई भी. कानपुर से ही उन्होंने हिंदी में विशारद किया और इनका नाम हो गया भगवती सिंह विशारद.

साल 1952 में जय प्रकाश नारायण ने खुद इन्हें दिल्ली बुलाकर कानपुर की जनरलगंज से टिकट दिया, लेकिन वो चुनाव हार गए. बाद साल 1957 में पीएसपी पार्टी से उनाव के बारासगवर सीट से चुनाव लड़े और जीत गए. साल 1962 में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए. साल 1967 में कांग्रेस से चुनाव लाडे और जीत हासिल की. 1991 तक सात बार विधायक बने भगवती सिंह विशारद.

उनके साथ रह रहे बेटे दिनेश सिंह के मुताबिक़ बाबूजी परिवार से ज्यादा जनता का ख्याल रखते थे. हम लोग रात में सोते समय जान पाते थे की बाबूजी आ गए हैं. इस चीज का अफ़सोस तो रहता है की कुछ किया नहीं न ही घर बना पाया, लेकिन लोग समाज इज्जत की निगाह से देखते है तो सारा मालाल दूर हो जाता है.

MLA Bhagwati Singh facilitation
भगवती सिंह का स्वागत करते स्थानीय नेता

भगवती सिंह की सादगी सिर्फ उन्नाव या कानपुर ही नहीं दिल्ली तक मशहूर थी. वो साइकिल से क्षेत्र में भ्रमण करते थे. लोगों का दुःख दर्द समझने लिए पांच-पांच दिन तक क्षेत्र में रहते थे. घर नहीं बनाने सवाल पर वो कहते हैं कि पहले लोग जनसेवा के लिए राजनीति करते थे. अगर घर बनाता तो सात बार चुनाव न जीत पाता.

आजकल लोग अपने लिए राजनीति करते हैं, यही दो पैर गाड़ी है. पांच बेटे में सबसे छोटे की मौत हो गयी. बाकी बाहर रहते हैं. एक बेटा और एक भतीजा मेरे पास रहता है. परिवार को मलाल रहता है कि घर नहीं बन पाया और आज भी किराये पर है , लेकिन उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है.

बी पॉजिटिव इंडिया, भगवती सिंह विरशाद की सादगी और जनता की सेवा के जज्बे को सलाम करते हैं. उम्मीद हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश के जन सेवक देश निर्माण में अपना योगदान देंगे.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

Comments

comments