आज पूरा भारत मराठी भाषा दिन (Marathi Bhasha Din) मना रहा है ।

भारत में हिंदी के अलावा कई अन्य भाषाएँ भी बोली जाती है जिनमे मराठी, बांग्ला, उड़िया , गुजराती, कन्नड़, तमिल , तेलुगु के साथ ही 1000 से अधिक बोलियाँ है। इन क्षेत्रीय भाषाओँ के विकास के लिए कई साहित्यकारों ने अपनी कलम से भाषा-रूपी वट वृक्ष को सींचा है । इन्ही साहित्यकारों में से अग्रिम श्रेणी के साहित्यकार है विष्णु वामन शिरवाडकर जिन्हें साहित्य जगत में कुसुमाग्रज (Kusumagraj) के नाम से जाना जाता है । मराठी भाषा के विकास में अभूतपूर्व योगदान के कारण इनके जन्मदिन को मराठी भाषा दिन के रूप में मनाया जाता है ।

कुसुमाग्रज एक उच्च दर्जे के मराठी कवि, नाटककार के साथ ही उपन्यास, लघु कथा के महारथी थे। उन्होंने अपनी कलम से देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भी योगदान दिया तथा पिछडो एवं दलितों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया । लगभग पांच दशक से लम्बे अपने लेखन के करियर में उन्होंने 16 कविता संग्रह , 3 उपन्यास , 8 लघु -कथा संग्रह , 7 निबंध संग्रह , 18 नाटक और 6 एकल नाटकों का सृजन किया ।

उनके द्वारा लिखा गया कविता संग्रह विशाखा (Vishakha) ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं को प्रेरित करने में महत्ती भूमिका निभाई और आजादी के बाद इस कविता संग्रह को भारतीय साहित्य की अनुपम कृति का दर्जा दिया गया। इसके अलावा उनके द्वारा लिखा गया नाटक नटसम्राट (Natsamrat) आज मराठी साहित्य में सर्वोच्च स्थान रखता है । इस नाटक के लिए कुसुमाग्रज को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरुस्कार मिले है जिनमे साहित्य अकादमी अवार्ड और देश के सबसे बड़े सम्मानों में से एक पद्म भूषण के साथ ही ज्ञानपीठ पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया ।

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कुसुमाग्रज के नाटक नटसम्राट के मंचन के दौरान अभिनेता नाना पाटेकर | Source : Marathi Kavita Sangrah

कुसुमाग्रज का जन्म 27 फरवरी 1912 को महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुआ था । उनके जन्म का नाम गजानन रंगनाथ शिरवाडकर था लेकिन बाद में उनका नाम विष्णु वामन शिरवाडकर पड़ गया । उन्होंने अपने साहित्य सृजन में कुसुमाग्रज (Kusumgraj) नाम का उपयोग किया जो ही अब सबसे ज्यादा प्रचलित है । उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा पिंपलगांव से की और सेकेंडरी शिक्षा के लिए नाशिक का रूख किया । मुंबई यूनिवर्सिटी से उन्होंने आगे की पढाई की और उसके बाद राजाराम कॉलेज कोल्हापुर से जुड़ गए ।

कुसुमाग्रज जब HPT कॉलेज नाशिक में पढाई कर रहे थे तभी उनकी कविताए रत्नाकर नाम की प्रसिद्ध पत्रिका में छपना शुरू हो गयी थी । 1932 में 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने दलितों के मंदिर में प्रवेश को लेकर नाशिक में सत्याग्रह कर दिया । 1933 में उन्होंने ध्रुव मंडल नाम से एक संस्था की स्थापना की और एक न्यूज़ पेपर “नवा मनु” में लिखना शुरू कर दिया । इसी साल उनके पहले काव्य संग्रह जीवन लहरी भी प्रकाशित हुई । 1934 में नाशिक के ही कॉलेज से उन्होंने मराठी एवं अंग्रेजी भाषा में बी.ए. की डिग्री हासिल की ।

1936 में उन्होंने गोदावरी सिनेटोन लिमिटेड में काम करना शुरू किया और वहां पर उन्होंने एक फिल्म के लिए स्क्रीनप्ले लिखना शुरू किया । उन्होंने एक फिल्म में अभिनय भी किया लेकिन फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर आशातीत सफलता नहीं मिली ।

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Source : Marathi Kavita Sangrah

विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव के बाद कुसुमाग्रज ने पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करना शुरू किया और कई पात्र-पत्रिकाओं में लेख, कविताए , समसामयिक घटनाओं पर टिप्पणियां भी लिखी । 1942 का वर्ष उनके लिए जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा क्योंकि इसी वर्ष मराठी भाषा के मजबूत स्तम्भ एवं कवि विष्णु सखाराम खांडेकर (Vishnu Sakharam Khandekar) ने कुसुमाग्रज के कविता संग्रह “विशाखा” को अपने खर्चे पर प्रकाशित करवाया । यह कविता संग्रह अपनी धारदार कविताओं के कारण जल्द ही भारत छोड़ो आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया और देश को गुलामी एवं दासता से मुक्ति दिलाने में युवाओं को जोश दिलाने के लिए इनकी कविताओं का भरपूर इस्तेमाल किया गया ।

इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी एवं अंग्रेजी के उपन्यासकारों एवं नाटकों का मराठी में रूपांतरण करना शुरू कर दिया। इस समय में उन्होंने कई नाटकों का सृजन किया जो मराठी भाषा एवं थियेटर के लिए मील का पत्थर साबित हुए । इसी बीच 1970 में उनका नाटक नटसम्राट आया जिसने कुसुमाग्रज को देश के साहित्य मानचित्र में स्थापित कर दिया । इस अदभुत रचना के लिए उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए ।

साहित्य सृजन के दौरान भी वो सामाजिक समस्याओं को लेकर काफी सजग रहे और अपनी कलम से रूढ़िवादी सोच एवं असामाजिक तत्वों पर कुठाराघात किया था । उन्होंने समाज उत्थान के लिए लोकहितवादी मंडल की स्थापना नाशिक में की । इसके साथ ही उन्होंने कई टेक्स्ट बुक्स की भी एडिटिंग की जो अभी महाराष्ट्र शिक्षा विभाग में पढाई जाती है ।

कुसुमाग्रज को कई सम्मान से नवाजा गया है जिनमे देश के जाने -माने साहित्य सम्मान है । उनके सम्मान में भारत सरकार ने अंतरिक्ष में एक तारे का नाम उनके नाम पर रखा क्योंकि कुसुमाग्रज सही अर्थों में मराठी साहित्य के चमकते सितारे थे । उनके जन्म दिन को मराठी भाषा दिन के नाम से मनाया जाता है ।

Be Positive, भारत के इस महान साहित्यकार के मराठी भाषा के विकास में योगदान को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि देश के नौजवान और साहित्यकार इनके जीवन से सीखकर भारतीय भाषाओँ के विकास में अपना सहयोग करेंगे ।

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