हम लोगों में से कितने ऐसे लोग है जो रेलवे या बस स्टैंड के पास बैठे भिखारी जिसने शायद पुरे दिन में कुछ नहीं खाया हो या जो बच्चे पढ़ने और खेलने की उम्र में ट्रैफिक सिग्नल या रोड पर छोटे-मोटे सामान या पत्रिकाए बेचकर अपना जीवनयापन करते है , उनके बारे में सोचते है , शायद कोई भी नहीं ।

दौड़भरी इस ज़िन्दगी और लालच में डूबे अपने जीवन में किसी के पास अपनी इच्छाओं या आवश्यकताओं की पूर्ति करने के अलावा किसी ओर के लिए समय नहीं है । जब लोगों को मनुष्य पर दया नहीं आती है तो मूक प्राणियों के बारे में संवेदनशीलता की अपेक्षा करना बेमानी है ।

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हम में से कई लोग होंगे जो अपने पालतू जानवरों के लिए महंगे खाद्य पदार्थ की व्यवस्था करते है लेकिन हमारे चारो तरफ घूमने वाले आवारा पशुओं के बारे में क्या ? जो कीचड़ एवं कचरे में से अपना पेट भरने की कोशिश करते है । देश में आज गौ मांस के नाम पर हत्या तक हो जाती है लेकिन उन गायों का क्या जो सडकों पर घूमने के लिए मजबूर है । ये मनुष्य का स्वार्थ और दानव रूप नहीं है तो और फिर क्या है ?

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जोसफ शेखर की छत पर दाना चुगते तोते

लेकिन शायद ये संसार अभी तक इसीलिए बचा हुआ है क्योंकि दुनिया में और भारत में जोसफ शेखर (Joseph Sekar) जैसे लोग अभी ज़िंदा है । एक कैमरा मैकेनिक के तौर पर काम करने वाले शेखर चेन्नई में रोयालपेट्टाह क्षेत्र में रहते है तथा उनका खुद का कोई एक भी पालतू जानवर नहीं है लेकिन फिर भी रोज़ वो हज़ारों जानवरों का पेट भरते है । अपना पेट काटकर उन्होंने कई बार इन मूक प्राणियों का परत भरा है और पुरे विश्व में “बर्डमैन” के नाम से विख्यात है ।

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शेखर ने शुरुआत में अपने घर की छत पर अनाज एवं चावल डालना शुरू किया था जिससे चिड़ियाओं और गिलहरी का पेट भर जाये । सुनामी के कारण दक्षिण भारत में भरी तबाही मची थी । जान – माल के अलावा भी कई उद्यान एवं जंगल तबाह हो गए थे , इसी वजह से दो तोते शेखर की छत पर भोजन ढूंढने के लिए आये । शेखर अपनी दिनचर्या के अनुसार रोज अनाज डाल देता था जिसे तोते भी खाने लग गए ।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दो तोते से शुरू हुआ ये कारवां अब दस से ज्यादा वर्ष के बाद तीन हज़ार से अधिक तोते उनकी छत पर भोजन की तलाश में आते है ।

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शेखर के ऊपर अभी डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बन चुकी है तथा वो बताते है कि सुबह इन पक्षियों का पेट भरने के लिए उन्होंने अपना रात का खाना भी कई बार छोड़ दिया है ।

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तोतो के लिए दाने की व्यवस्था करते हुए जोसफ शेखर

सुबह से शाम तक अपनी दुकान पर काम करने के बाद वो घर लौटकर अगली सुबह पक्षियों के लिए खाना तैयार करने में जुट जाते है । सुबह 4:30 बजे शेखर उठकर वो लगभग 1 घण्टे में पक्षियों के लिए चावल के साथ ही अन्य अनाजों के मिश्रण से भोजन तैयार करते है । अभी उन्हें लगभग 20 Kg से ज्यादा अनाज की जरूरत रोजाना पड़ती है लेकिन वो अपनी आय के साथ ही दूसरे लोगों की मदद से पिछले 13 वर्षों से अनवरत अपना काम कर रहे है ।

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शेखर के लिए ये पक्षी परिवार का हिस्सा बन चुके है तथा यदि वो कभी घर से दूर जाते है तो पक्षियों के लिए खाने की व्यवस्था पहले करते है । वो सुबह उठकर 14-15 लकड़ी के पट्ठो पर खाने का सामान इन पक्षियों के लिए रखते है और सभी पक्षी बड़ी शालीनता के साथ बैठकर खाना कहते है ।

शेखर अभी अपनी आमदनी का लगभग 40% हिस्सा इन पक्षियों के खाने में करते है लेकिन वो इस कार्य से बहुत खुश है तथा मानते है कि ईश्वर ने हमें यह जीवन किसी ओर के लिए जीने के लिए दिया है । सबकों अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों की मदद करनी चाहिए ।

Be Positive  शेखर के जज्बे को सलाम करते है तथा उम्मीद करते है कि अन्य लोग भी इनसे प्रेरणा लेकर मानवता के पुनीत कार्यों में अपनी भागीदारी निभाएंगे ।

 

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