पिछले कुछ दिनों से  #MeToo आंदोलन ने भारत (MeToo movement in India) में तहलका मचा रखा है।  न केवल बॉलीवुड बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी इस का व्यापक असर पड़ा है। नाना पाटेकर से लेकर केंद्रीय मंत्री तक पर यौन शौषण के आरोप लगाए गए। भारतीय समाज में इस आंदोलन ने तहलका मचा दिया हैं। अब तक कई सेलेब्रिटी के ऊपर यौन शौषण एवं वर्क प्लेस पर अनुचित व्यवहार के आरोप लग रहे हैं।

भारत में इसका प्रभाव :

सोशल मीडिया के माध्यम से कई महिलाओं ने यौन शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की हैं। इसकी शुरुआत पिछले साल से हुई । एक महिला पत्रकार ने बिना नाम से एक प्रसिद्ध संपादक पर इंटरव्यू और काम के दौरान यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पिछले वर्ष से चालू इस आंदोलन को ज्यादा सफलता नहीं मिली थी।

Tanu sree dutta
कंगना राणावत ने तनुश्री दत्ता का सपोर्ट किया है

यह आंदोलन धीमी गति से चल रहा था लेकिन यह आग की तरह फ़ैल गया। जब बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के ऊपर 2008 में फिल्म की शूटिंग के दौरान यौन शोषण का आरोप लगाया। इसके बाद तो जैसे बाढ़ सी अा गई। यकायक यह आंदोलन हर भारतीय की जुबान पर चढ़ गया।

तनुश्री दत्ता के आरोपों के बाद बॉलीवुड से लेकर भारतीय समाज में दो फाड़ बन चुके हैं। कुछ लोग उनका समर्थन कर रहे है तो कुछ इसे मात्र पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं।

तनुश्री दत्ता के बाद एक ओर महिला ने बॉलीवुड के एक डायरेक्टर विकास बहल पर भी यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। इसका समर्थन विकास बहल के साथ काम कर चुकी कंगना राणावत ने भी की। इन आरोपों के बाद विकास बहल की फैंटम फिल्म्स के साथी अनुराग कश्यप एवं विक्रमादित्य मोटवानी ने ट्विटर पर माफी मांगी।

इसके बाद तो जैसे आरोपों की बाढ़ अा चुकी हैं और बॉलीवुड से लेकर कॉरपोरेट जगत की कई हस्तियों को लपेटे में ले लिया। इनमे केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर, बॉलीवुड अभिनेता आलोक नाथ, उपन्यासकार चेतन भगत, गीतकार कैलाश खेर और AIB के उत्सव चक्रवर्ती का भी नाम आया है।

इन आरोपों के बाद AIB के तन्मय भट और गुरसिमरन खंभा को कंपनी से बाहर होना पड़ा। कैलाश खेर और चेतन भगत ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। यह आंदोलन कहां तक जायेगा, अभी इसके बारे में कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन एक बात तो तय है कि अगले कुछ समय में कई और खुलासे होंगे।

क्या है #MeToo

इसकी शुरुआत कई साल पहले अमेरिका से हुई थी । लेकिन मीडिया और पब्लिक की नजर में यह पिछले साल आया था। अमेरिका की प्रसिद्ध अभिनेत्री एलिसा मिलानो ( Alyssa Milano ) ने पिछले वर्ष अक्टूबर में ट्विटर पर यौन शोषण के बारे में #MeToo हैशटैग के साथ अपनी  बात रखी।

Alyssa Milano
एलिसा मिलानो के इसी ट्वीट ने तहलका मचा दिया

उन्होंने अपने साथी पर काम के दौरान अनुचित व्यवहार और यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद अमेरिका में यौन शोषण एवं काम के दौरान अनुचित व्यवहार की शिकार हुई कई महिलाओं ने इस हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए अपनी आपबीती सब के सामने रखी।

धीरे- धीरे यह एक आंदोलन बन गया जिसके चलते अमेरिका में कई हस्तियों को अपना जुर्म कबूलना पड़ा। यह एक तरह से यौन शौषण कीशिकार महिलाओं के लिए एक मंच बना जो आरोपियों को सजा दिलाने की कोशिश में लगी हुई थी। इसके बाद शिकार महिलाओं एवं लडकियों को सामाजिक कार्यकर्ता और संस्थाओं का भी साथ मिला।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि #MeToo की शुरुआत 2006 में हुई थी। तराना बुर्के (Tarana Burke) ने महिलाओं के ऊपर  हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक मुहिम छेड़ी थी।

Tarana Burke
तराना बुर्के जिन्होंने MeToo की शुरुआत की

तराना बुर्के खुद भी यौन शोषण का शिकार रह चुकी हैं। बचपन में छह वर्ष की उम्र में उनका बलात्कार किया गया। इसके बाद फिर पंद्रह साल की उम्र में एक बार फिर उनका बलात्कार किया गया। तराना अकेली लड़की नहीं थी क्योंकि आज सत्तर फीसदी लड़कियों को यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है।

इन सब गंभीर परिस्थितियों के बावजूद तराना बुर्के ने हार नहीं मानी और महिलाओं के अधिकारों के लिए 2006 में Just Be Inc नाम से एक संगठन खड़ा किया। सोशल मीडिया पर भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाते हुए यौन शोषण की शिकार महिलाओं की मदद की।

भारत में यौन शोषण की स्तिथि :

भारत में यौन शोषण को कभी भी पुरुषों ने अपराध नहीं माना। पुरुष प्रधान समाज ने हमेशा से ही महिलाओं से छेड़छाड़ एवं अनुचित व्यवहार को अपना अधिकार समझा। जागरूकता के अभाव  एवं सामाजिक दबाव के चलते नब्बे प्रतिशत से ज्यादा केसेज में पुलिस में शिकायत तक नहीं होती हैं।

घर से बाहर निकलते ही मौहले के कोने से लेकर बस में यात्रा करने के दौरान भारतीय महिलाओं को अनुचित व्यवहार एवं छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है। जब तक बलात्कार या हत्या जैसे जघन्य कृत्य नहीं होते तब तक कोई भी आगे नहीं आता है।

Be Positive, महिलाओं के प्रति किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार का विरोध करता है और उम्मीद है कि #MeToo जैसे आंदोलन महिलाओं को जागरूक करेंगे।

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