आज के दौर में बहुत कम लोग होते है जो अपने मन की कर पाते हैं। उनके सामने एक सुनहरा भविष्य होता है लेकिन अपने जुनून को जीने के लिए वो अंधेरे रास्तों पर निकल पड़ते है और अपनी मेहनत से सफलता का सूरज चमकाते है जो समाज एवं देश के लिए एक मिसाल बन जाता है। ऐसी कई कहानियां हमारे समाज में भरी पड़ी है जिनमें लोगों ने समाज के अघोषित नियमों को ताक में रखकर अपनी सफलता की कहानियां गढ़ी हैं।

आज हम एक ऐसे ही एक संगीतकार के बारे में बात कर रहे हैं जिनके सामने भारतीय आई टी इंडस्ट्री में एक सुखद भविष्य इंतजार कर रहा था। मोटी तनख्वाह और उच्च स्तर का लाइफ स्टाइल  भी उनके इरादे एवं दिल में बसे अपने जुनून को कम नहीं कर सका और आज बॉलीवुड में वो अपनी खास पहचान बना चुके हैं। इसका सीधा प्रमाण विश्व की जानी- मानी मूवी रेटिंग वेबसाइट IMDb पर उनका प्रोफाइल बतौर संगीतकार लिस्टेड है।

राजस्थान के श्रीगंगानगर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 21 नवंबर 1991 को जन्में इस युवा म्यूजिक कंपोजर ने छोटे से  शहर से निकल कर बड़े शहर यानि माया नगरी मुंबई के बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाई हैं।  अपने संगीत से कई लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाले इस संगीतकार और कंपोजर का सपना है कि वो एक दिन बॉलीवुड के सुपर स्टार  के लिए म्यूजिक बनाए । इस युवा का नाम है मयूर नागपाल (Mayur Nagpal)

बचपन से ही संगीत के शौकीन मयुर ने अपनी स्कूली शिक्षा गंगानगर से पूरी की और इनके पिता एलआईसी में अधिकारी है तथा परिवार में उनके अलावा उनकी बहन है जो कि एक निजी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजिनियर हैं। घर में शुरू से ही संगीत का माहौल था और मयूर पर उनकी मां का बहुत गहरा प्रभाव हैं। उनकी मां और बहन ने शुरू से ही कई संगीत वाद्य यंत्रों के बारे में मयूर नागपाल (Mayur Nagpal) को अवगत कराया जिसने मयूर के संगीत में रुचि पैदा करने में काफी मदद की।

अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मयूर ने अपनी पढ़ाई के लिए  जयपुर का रुख किया और वहां पर राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी से आई टी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। कॉलेज में उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय करवाते हुए मिस्टर फ्रेशर का खिताब जीता लेकिन साथ ही अपने संगीत के शौक को आगे बढ़ाने के लिए कॉलेज बैंड में काम करना शुरू किया । कॉलेज बैंड में काम करते हुए उन्होंने कई कॉलेज फेस्टिवल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया तथा संगीत कंपोजर के रूप में भी अपने हाथ आजमाए ।

कॉलेज में पढ़ाई के बाद उनके सामने मुश्किल परिस्थिति पैदा हो गई क्योंकि एक तरफ उनके सामने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में बेहतरीन कैरियर विकल्प था तो दूसरी तरफ संगीत के क्षेत्र में काम करके अपने जुनून को जीने का ऑप्शन था । मयूर ने संगीत के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया जिसे उनके पिता और बहन ने पूरा सपोर्ट किया।

इसके साथ ही अपनी पढ़ाई के बाद उनके जीवन का अगला पड़ाव माया नगरी मुंबई बनी। बिना गॉडफादर के मयूर (Mayur Nagpal) मुंबई पहुंचे और फिर शुरू हुआ संघर्ष का अंतहीन सफर। मुंबई में अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए मयूर कहते हैं कि ” शुरुआती दिनों में काम मिलना बहुत मुश्किल है । सब लोग आप से मुफ्त में काम करवाना चाहते है । कई घंटो तक हमनें म्यूजिक डायरेक्टर के स्टूडियो के सामने इंतजार किया हैं। इसके चलते हमने कई बार फ्री में काम किया लेकिन हमारी मेहनत और काम को देखते हुए जल्द ही हमें काम मिलना शुरू हो गया।

शुरुआत में मयूर ने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक बैंड की स्थापना की और कई शोज में परफॉर्म किया । वो बैंड में लीड सिंगर की भूमिका में थे । उसके बाद उन्होंने गाने कंपोज करना शुरु किया । इसी बीच उन्हें एक विज्ञापन के लिए संगीत बनाने का ऑफर आया जिसमें उन्होंने गाने बनाने के साथ ही खुद भी परफॉर्म किया। इस तरह मयूर की गाड़ी माया नगरी में चल निकली और आज वो कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के  विज्ञापनों में अपना हुनर बिखेर चुके हैं।

आज उनकी लिस्ट में बिसलेरी, पेप्सी, आईबॉल, कल्याण ज्वेलर्स,ओला कैब और जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग जैसे नाम शामिल हैं। इसी के साथ वो विज्ञापन जगत में अपनी खास पहचान बना चुके हैं।  वो अभी अपने खुद के म्यूजिक विडिओ पर भी काम कर रहे हैं तथा धीरे- धीरे वो बॉलीवुड के कमर्शियल म्यूजिक क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी में हैं।

मयूर नागपाल के अब तक के सफ़र में उनके पिता, बहन एवं पत्नी का खास योगदान रहा है। परिवार से मिले सपोर्ट ने ही मयूर को अपने मन की करने का पूरा मौका मिला। मयूर ने समाज के अघोषित नियमों को धता बताते हुए अपनी मंजिल खुद तय करने का साहसिक निर्णय लिया और उस मंजिल तक पहुंचने के लिए पूरी शिद्दत से लगे हुए हैं।

Be Positive , मयूर नागपाल के कभी हार न मानने के जज्बे को सलाम करता है तथा अपने जुनून को जीने के लिए लिये गए मुश्किल निर्णय की सराहना करते है। उम्मीद है हमारे पाठक भी इनसे प्रेरणा लेकर के अपने दिल की सुनने की कोशिश करेंगे।

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