महिला किसान की बात करने पर लोगों के जेहन में अभी तक सिर्फ महिला मजदूरों की तस्वीर आती थी, लेकिन कुछ महिलाएं सफल किसान बनकर इस भ्रम को तोड़ रही है। देश के दूर-दराज इलाकों में रहने वाली युवा पीढ़ी विकास के नए-नए तरीके खोज रही है । आज भी गांव में रहने वाले लोग एग्रीकल्चर के क्षेत्र में करियर बना रहे हैं । जहां आज के युवा पहाड़ो से पलायन करके अपने रोजगार के लिए बाहर शहरो की तरफ दौड़ रहे हैं वही दिव्या रावत (Divya rawat) की उच्च सोच ने इसके विपरीत नॉएडा से पढाई करके पहाड़ो में रोजगार देकर न सिर्फ खुदको बल्कि वहाँ की कई महिलाओ को भी स्वावलंबी  बना दिया।

उतराखंड में मशरूम गर्ल के नाम से मशहूर दिव्या रावत की कहानी काफी प्रेरणादायक है। दिव्या ने कई नौकरियां की, लेकिन उसके दिल में कुछ अलग करने का जुनून था, इसलिए उसने नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय करने की ठानी। दिव्या ने गांव के प्राकृतिक संसाधनों का इस्‍तेमाल करके मशरूम की खेती शुरू की। धीरे-धीरे दिव्या ने अपने इस बिजनेस में कई और लोगों को जोड़ लिया और एक कंपनी बनाई, जिसका आज सालाना टर्नओवर 2 से 2.5 करोड़ रुपए है।

दिव्या रावत का जन्म उत्तराखंड के उस जिले में हुआ जहाँ विश्व विख्यात फूलो की घाटी है यानि चमोली जिले में हुआ।इनके पिताजी का नाम स्व तेज सिंह रावत है जिनका देहांत तभी होगया था जब दिव्या मात्र 7 साल की थी ,जिसके कारण उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

दिव्या ने सामाजिक कार्य करने हेतु अपनी पढाई लिखाई एएमआईटीवाई विश्वविद्यालय नोएडा से बीएचडब्ल्यू से पूरी की और उसे बाद इग्नू (IGNOU) से सामाजिक कार्य करने हेतु मास्टर डिग्री भी प्राप्त की । फिर तीन साल तक NGO  में नौकरी भी की । जहाँ वे मानव अधिकारों के मुद्दों पर काम करती थी मगर उनका दिल हमेशा पहाड़ो में ही रहता था ।

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अपनी टीम के साथ मशरूम लेडी दिव्या रावत | Image Source

दिव्या जल्द ही समझ गई थी कि अगर कुछ बड़ा करना है, तो नौकरी को छोड़ना होगा। कुछ समय बाद वह नौकरी छोड़ कर गांव आ गई। उन्हें शुरुआत से ही खेती में दिलचस्पी थी। जिसके बाद उन्हें आइडिया आया क्यों ना मशरूम का उत्पादन किया जाए।

पहाड़ के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा  उन्हें फिर से पहाड़ो में खींच लाया,और फिर दिव्या ने देहरादून में आकर डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर, डिफेंस कालोनी, देहरादून से एक हफ्ते का मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया । आज दिव्या सौम्या फूड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर है जो जो देहरादून के मोथरवाला में स्थित है।

जिसके बाद उन्होंने एक छोटे से कमरे में मशरूम का बिजनेस शुरू किया। धीरे-धीरे कर उनका कारोबार बढ़ा और वह अपनी कंपनी ‘सौम्या फूड प्राइवेट लिमिटेड‘ की मालकिन भी बन गईं।  बतादें, आज कंपनी का टर्नओवर लाखों में है। कंपनी के तीन मंजिले मशरूम प्लांट से भारी मात्रा में प्रोडक्शन हो रहा है। उनके प्लांट में वर्ष में तीन तरह के मशरूम उत्पादित किये जाते हैं- बटन, ओएस्टर और मिल्की मशरूम। इनकी सप्लाई उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि दिल्ली की आजादपुर मंडी तक हो रही है।

जब 2013 में केदारनाथ आपदा आई तो उसके बाद दिव्या अपने गाँव कंडारा, चमोली ,उत्तराखंड गयी जहाँ उन्होंने ग्रामीण महिला को मशरूम का प्रशिक्षण दिया और वहाँ के खाली पड़े बंजर घरो में ही मशरूम का उत्पादन शुरू कर दिया । माना जाता है की मशरूम का उत्पादन 20-22 डिग्री के तापमान पर संभव होता है मगर दिव्या ने 30-40 डिग्री के तापमान पर भी मशरूम का उत्पादन संभव कर दिखाया ।

इसी सफ़र को बरक़रार रखते हुए उन्होंने अपने आस पास के जिले रुद्रप्रयाग,कर्णप्रयाग,चमोली की महिलाओ को भी इसका प्रशिक्षण देकर उनको इस काम से जोडकर उनको स्वावलंबी बनाया। जहां वह लाखों में कमाई कर रही है, वहीं उनकी कंपनी ने कई गांव के लोगों को रोजगार भी दिया है। आज दिव्या अपने कारोबार में सफल होने के साथ गांव में किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

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पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी से सम्मान ग्रहण करती दिव्या रावत | Image Source

दिव्या का कहना है कि अगर जीवन में किसी भी काम में सफलता चाहिए, तो पहले अपना काम सीखों और फिर दूसरों को सीखा दो। ऐसा करने से आपके काम आगे बढ़ेगा और आप जरूर तरक्की करोगे। आज दिव्या मशरूम के प्रॉडक्शन की ट्रेनिंग भी देती हैं। ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सके।

बता दें, मशरूम लेडी के नाम से पहचान बनाने वाली देहरादून की दिव्या रावत को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में यह पुरस्कार पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों ग्रहण किया था। उत्तराखंड सरकार ने दिव्या को ‘मशरूम की ब्रांड एम्बेसडर’ के सम्मान से नवाजा था।

Be Positive, दिव्या रावत के साहस एवं किसानों की हालत को बदलने के जज्बे को सलाम करता है । उम्मीद करता है कि आपकी सार्थक पहल से देश की किसान आत्मनिर्भर बनेंगे तथा निश्चित रूप से हमारे पाठक आपके सफर को पढ़कर प्रेरित होंगे ।

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