देश में खेल के प्रति बदले नजरिये ने अब लोगो को खेल को एक प्रोफेशन के रूप में लेने के लिए प्रोत्साहित किया है । सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ ही मीडिया एवं जनता भी अब खिलाड़ियों को पूरा मान-सम्मान देती है । बचपन में बच्चे हर खेल को परखने की जिद करते है और अक्सर कई बार उन्हीं खेलों को अपना करियर बना लेते है । ऐसी ही एक हरियाणा की बच्ची भी अपनी शुरुआत करती है । उसको उसके परिवार का पूरा सपोर्ट मिला जो बहुत काम खिलाड़ियों को नसीब होता है । हरियाणा में झज्जर जिले की रहने वाली 11वीं की छात्र मनु भाकर (Manu Bhaker)  ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। अब मनु विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली देश की सबसे युवा निशानेबाज बन गई है।

बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही मनु ने मां से कहा कि मुझे स्केटिंग करनी है तो उन्होंने स्केट्स लाकर दिए लेकिन फिर स्विमिंग में दिलचस्पी बढ़ी तो उसके लिए स्पेशल रोहतक से स्विमिंग कॉस्टयूम खरीदकर लाए। इसके कुछ दिन के बाद उसने लॉन टेनिस खेलना शुरू कर दिया लेकिन वर्ल्ड चैंपियन बनी शूटिंग में। वो भी महज 2 साल की प्रैक्टिस के बाद यह मुकाम हासिल किया। जी हां, ये कहानी है हरियाणा के झज्जर की रहने वाली मनु भाकर (Manu Bhaker) की।

मनु ने पहले महिला वर्ग की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में पहला गोल्ड जीता और इसके बाद प्रकाश मिथरवाल के साथ मिलकर मिक्सड इवेंट में गोल्ड मेडल जीता है। इस जीत से उनकी माँ बहुत खुश एवं उत्साहित है । पुरे परिवार में अभी खुशियों का माहौल है ।

मनु की जीत के बाद बेहद खुश उनकी मां और झज्जर के यूनिवर्सल सीनियर सैकंडरी स्कूल की प्रिंसिपल सुमेधा भाकर ने बताया कि उसकी बेटी ने महज दो साल पहले शूटिंग शुरू की थी। फरवरी महीने की 23 तारीख को उसे शूटिंग करते हुए दो साल हो गए। मनु ने शूटिंग कहीं और नहीं बल्कि अपने ही स्कूल के प्ले ग्राउंड में सीखी।

16 साल की मनु भाकर खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी अव्वल रही है। वह इस समय मेडिकल स्ट्रीम से ग्यारहवीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है। 10वीं में भी सीबीएससी बोर्ड से 10 सीजीपी लेकर स्कूल में अव्वल स्थान हासिल किया था।

मनु जो भी काम करती है पूरा मन लगाकर करती है। उसे हमने घर पर कभी पढ़ने के लिए नहीं कहा। वह खुद अपने स्कूल का काम निपटा लेती थी। मनु शूटिंग से पहले स्केटिंग, स्विमिंग और लॉन टेनिस खेल चुकी है।

एक दिन उसके पापा रामकृष्ण भाकर शूटिंग रेंज में मनु के साथ घूम रहे थे, उन्होंने मनु को शूटिंग करने के लिए कहा। मनु ने शूटिंग की तो पहले ही शूट में उसने बिल्कुल बीच में 10 नंबर टारगेट पर शूट किया। तभी से उसने शूटिंग शुरू की और स्कूल में कोच के पास सीखा। इसके बाद नेशनल कोच जसपाल राणा ने मनु को ट्रेनिंग दी। वहीं से गुर सीखकर वह वर्ल्ड चैंपियन तक पहुंच गई।

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गोल्ड मैडल जीतने के बाद मैडल सेरेमनी में मनु भाकर | Image Source

अपनी इस उपलब्धि के चलते मनु ने 2018 में होने वाले यूथ ओलंपिक चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। मनु अब 2018 में हाने वाले यूथ ओलंपिक में भी देश का परचम लहराएगी। बता दें कि मनु के पिता रामकृष्ण भाकर मर्चेंट नेवी में इंजीनियर हैं। एक बड़ा भाई अखिल (18) आईआईटी की कोचिंग ले रहा है।

इससे पहले वह एक मुक्केबाज थीं, लेकिन आंख में चोट लगने की वजह से उसने मुक्केबाजी छोड़ दी, लेकिन खेल के प्रति अपना जज्बा कम नहीं होने दिया और शूटिंग में करियर बनाया। मनु पिछले साल आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में 49वें नंबर पर रहीं थीं। अब सीनियर वर्ल्ड कप में पहले नंबर पर पहुंच गईं। मनु शूटिंग से पहले 6 अन्य खेलों में भी खुद को आजमा चुकी हैं।

वह हर साल खेल बदलती है। वह अब तक कराटे, थांग टा, टांता, स्केटिंग, स्वीमिंग और टेनिस खेल चुकी है। कराटे, थांग टा और टांता में नेशनल लेवल पर मेडल जीत चुकी है। टांता में लगातार तीन बार नेशनल चैंपियन रही है। स्केटिंग में भी स्टेट मेडल जीत चुकी है। मनु ने स्कूल लेवल पर स्वीमिंग और टेनिस भी खेला है। फाइनली शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर चैम्पियन बनी।

मनु भाकर (Manu Bhaker) ने निशानेबाजी में पदक जीतने की शुरुआत वर्ष 2016 में महेंद्रगढ़ में एक प्रतियोगिता में जीता और वहाँ पर उसने सभी को अचंभित करते हुए तीन स्वर्ण पदक जीत डाले। इस शानदार आगाज के बाद मनु भाकर ने कुमार सुरेंद्र सिंह प्रतियोगिता में जूनियर व यूथ दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद दिल्ली एवं पुणे में आयोजित प्रतियोगिता में एक स्वर्ण व एक रजत, दो कांस्य पदक भी अपने नाम किये। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में भी मनु भाकर ने गोल्ड मैडल जीता था ।

मनु ने कामनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है और देश को उनसे गोल्ड मैडल की उम्मीद रहेगी  Be Positiveमनु भाकर (Manu Bhaker) को कामनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए शुभकामनाए देता है और उम्मीद करता है कि आप पदक जीतकर देश को विश्व-मंच पर गौरान्वित करेंगे ।

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