राजस्थान के पाली जिले के मादड़ी गांव से आने वाले इस नौजवान ने संघर्ष और मेहनत को ही अपनी किस्मत बना लिया। भेड़ चराने से लेकर फैक्ट्री तक में मजदूरी की लेकिन सरकारी नौकरी लगने की चाहत न कभी हार नहीं मानी ।

एक छोटे से गांव में पचास परिवारों के साथ रहने वाले इस नवयुवक ने ऊंट एवं भेड़ चराने का काम किया। गांव में किसी ने स्कूल से आगे बढ़कर कॉलेज  जाने की हिम्मत नहीं की लेकिन इस नवयुवक ने न केवल पढाई पूरी की बल्कि सरकारी अध्यापक बनकर एक मिसाल भी कायम की।

मादड़ी का मांगीलाल देवासी वाकई गुदड़ी का लाल है। काफी संघर्ष भरा जीवन होने के बावजूद कुछ कर गुजरने की चाह और जुनून की वजह से आज वो एक सरकारी टीचर है।

मांगीलाल का कहना है, उसने गरीबी बहुत करीब से देखी है। मां-बाप मजदूरी कर घर चलाते हैं। लेकिन उनका सपना है कि औरों की तरह बेटा भी काबिल बने। हालांकि, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से मांगीलाल भी दिन में भेड़ चराने से लेकर मनरेगा में मजदूरी करता था।

साथ ही मां-बाप के सपने भी पूरा करना चाहता था। कोचिंग के लिए पैसे नहीं थे, तो दोस्तों से किताबें मांगकर पढ़ाई की। जब अपॉइंटमेंट लेटर आया, तो गांव वाले इतने खुश हुए कि कंधों पर बैठाकर उसका स्वागत किया।

Mangilal dewasi work
भेड़ चराते हुए मांगीलाल देवासी

मांगीलाल अपने गांव ढाणी में देवासी समाज के 50 परिवारों के साथ रहता है। उसके परिवार की कई पीढ़ियों से सरकारी सेवा में तो दूर, किसी ने कॉलेज का मुंह तक नहीं देखा।

वह संस्कृत और सोशल सब्जेक्ट में सेकंड ग्रेड टीचर बना है। एक अक्टूबर 2018 से मांगीलाल ने स्कूल भी ज्वॉइन कर लिया है।

उसने दैनिक भास्कर को  बताया, बीएड करने के बावजूद जब उसे नौकरी नहीं मिली तो उसने एसटीसी भी कर ली। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार मिल रही असफलता के बावजूद उसने हार नहीं मानी। 

6 साल की मेहनत और 20 प्रतियोगी परीक्षा देने के बाद आखिरकार उसे कामयाबी हासिल हुई। इससे पहले तृतीय श्रेणी लेवल-1 और लेवल-2 में भी सिलेक्शन हो चुका है।

मांगीलाल का सपना RAS बनना है। इसकी परीक्षा राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन(RPSC) के जरिए आयोजित होती है।

घर चलाने में मां-बाप का हाथ बटाने के लिए मांगीलाल दिन में भेड़-बकरी चराता था। इसके अलावा मनरेगा में भी उसने मजदूरी की है।  उसने बताया, जिस काम नहीं मिलता था, वह पाली की फैक्ट्रीज में काम करने चला जाता था।

किसी ने सही ही कहा है कि अभावों में ही इंसान की कीमत एवं कामयाबी के लिए ललक सामने आ पाती है। मांगीलाल देवासी ने यह साबित करके दिखाया है कि मेहनत करने वालों की हार नहीं होती है ।

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