शिकायत का हिस्सा तो हम हर बार बनते है लेकिन एक बार निवारण का हिस्सा भी बनके देखते है. malhar kalambe Beach Please Mumbai

यह चंद पंक्तियाँ 21 वर्षीय युवा पर सटीक बैठती है. दोस्तों के साथ समुद्र तट या बीच को साफ़ करने के लिए शुरू हुई मुहिम अब तक 20,000 लोगो को अपने साथ जोड़ चुकी है. पिछले 87 सप्ताहों से एक प्रयास अनवरत चल रहा है. मुंबई के प्रसिद्ध दादर बीच को हर सप्ताह साफ़ किया जा रहा है. इस मुहिम की शुरुआत की है, मुंबई के रहने वाले और यूनाइटेड नेशन से सम्मानित मल्हार कळंबे (Malhar Kalambe) ने.

मल्हार ने ‘बीच प्लीज(Beach Please)‘ के नाम से एक अभियान चलाया है जिसमे वो अपने दोस्तों के साथ मिलकर हर रविवार मुंबई के दादर बीच पर सफाई का काम करते है. इस मुहिम की शुरुआत 10 सितम्बर 2017 को हुई थी जिसमे मल्हार अपने कुछ दोस्तों के साथ दादर बीच पर सफाई के लिए पहुंचे. तब से लगातार 87 सप्ताह तक यह सफर चल रहा है. अब तक कई कॉलेज, स्कूल एवं सामाजिक संस्थानों के साथ ही 20,000 के आसपास लोग जुड़ चुके है. व्हाट्सएप के ग्रुप से शुरू हुआ सफर एक आंदोलन का रूप ले चूका है. अब तक लगभग 1000 टन से ज्यादा कचरा दादर बीच से हटाया जा चूका है.

Beach Please cleaning
बीच से कचरा हटाते ‘बीच प्लीज’ के स्वयंसेवी

बी पॉजिटिव इंडिया से खास बातचीत में मल्हार ने बताया कि इंडोनेशिया के बाली बीच पर मुझे परिवार के साथ जाने का मौका मिला. उस बीच की सफाई एवं सुंदरता को देखकर मैं अचम्भित रह गया था. जब हम वापस लौटे तो मैंने मेरी माँ से पूछा कि मुंबई के बीच इतने गंदे क्यों है जबकि बाली के बीच आकर्षक एवं स्वच्छ है, हमें इसके बारे में कुछ करना चाहिए. malhar kalambe Beach Please Mumbai

तब माँ ने कहा कि मुंबई के बीच गंदे है तो तुम साफ़ क्यों नहीं करते. हर बार शिकायत का हिस्सा बनते हो एक बार सोल्यूशन का हिस्सा भी बनकर देखो.

मुझे माँ की यह बात बहुत अच्छी लगी और मैंने अपने दोस्तों को इस काम के लिए कॉल किया. जब हम पहली बार बीच पर गए तो वो हमारे लिए केवल दोस्तों के साथ एक आउटिंग थी क्योंकि कई सारे दोस्त थे जिनसे मैं पिछले कई सालों से नहीं मिल पाया था.

beach cleaning
बीच की सफाई करती हुई ‘बीच प्लीज’ टीम

हमने बीच पर फैली गन्दगी को इकट्ठा किया और इस काम में हमें बड़ा मज़ा आया. उस दिन के बाद हमने अगले रविवार का भी प्लान बनाया और इस तरह सफाई का काम शुरू हो गया. हमें कभी यह नहीं लगा था कि हमारी छोटी सी शुरुआत एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगी.

इसके बाद हमारे साथ आसपास के स्कूल, कॉलेज एवं एनजीओ के लोग भी जुड़ने लगे. हम बीच से कचरा उठाकर मुंबई नगर निगम को सौंप देते है और वो उन्हें डंपिंग यार्ड ले जाते है. हमारी टीम में 10 – 15 लोग है जो हर सप्ताह बीच पर जाकर सफाई का काम करते है. इसके साथ ही अन्य संस्थाओं से भी लोग आते है, जिन्हे मिलाकर हर रविवार को 100 -150 लोग हो जाते है.

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बीच से कचरा हटाते ‘बीच प्लीज’ के स्वयंसेवी

मल्हार आगे बताते है कि बीच की सफाई के दौरान हमने पाया कि समुद्र में कचरे के लिए केवल बीच पर आने वाले पर्यटक ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि बीच से जुड़ने वाली मीठी नदी है. इस नदी से शहर का कचरा समुद्र में मिलता है और वो लहरों के साथ समुद्र तट पर आ जाता है. इसलिए हमने मीठी नदी जो कि मुंबई की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है, को साफ़ करने का बीड़ा उठाया. हमारी इस पहल से मीठी नदी अब काफी साफ़ हो चुकी है और समुद्र में कम कचरे को डालती है. malhar kalambe Beach Please Mumbai

इसके अलावा मल्हार एक और प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है जिसका नाम उन्होंने ‘मूर्तिदान‘ दिया है. मल्हार इसके बारे में बताते है कि गणेश उत्सव के साथ ही कई मौको पर समुद्र में मूर्तियां विसर्जित की जाती है जो लहरों के साथ बीच पर आ जाती है. हम उन मूर्तियों को कचरे में डालने के बजाय उन्हें वापस रिपेयर और कलर करके लोगो को गिफ्ट करते है. इस तरह से न केवल लोगो को बढ़िया मूर्तियाँ मिलती है जबकि मुर्तिया भी कचरे में जाने से बच जाती है. हमने कई बड़ी मूर्तियों को स्थानीय मंदिरों में भी स्थापित किया है.

project
हर सप्ताह रविवार को बीच की सफाई करती है ‘बीच प्लीज’ टीम

मल्हार ने ‘बीच प्लीज‘ अभियान के तहत 8 अक्टूबर 2018 को Clean Coast Cup 2018 नाम से प्रतियोगिता करवाई जिसमें मुंबई की 20 से ज्यादा कॉलेज और स्कूल से लगभग 1200 छात्रों ने भाग लिया. सबने मिलकर लगभग 23 टन कचरा इकठ्ठा किया था. विजेता टीम को मैडल के साथ ही ट्रॉफी दी गयी.

मल्हार कहते है कि पर्यावरण सरंक्षण के लिए बहुत लोग काम करना चाहते है लेकिन उन्हें एक प्लेटफार्म या साथ नहीं मिलता है जिसके चलते वो रुक जाते है. उन्हें नहीं पता होता है कि कैसे काम करना है. इसलिए वो लोग काम करना तो चाहते है लेकिन कर नहीं पाते है.

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स्कूली बच्चों के साथ ‘बीच प्लीज’ टीम

हमने भी छोटी सी शुरुआत की जो अब एक आंदोलन बन चुकी है. कॉलेज एवं स्कूली छात्र -छात्राओं के साथ ही कई संस्थाए एवं कॉर्पोरेट्स हमारे साथ काम कर रहे है.

मल्हार और उनके दोस्त अपनी पॉकेट मनी से यह काम कर रहे है. उन्हें अब तक कोई फंडिंग नहीं मिली है. बीच में सफाई करने वाले लोग ही कुछ आर्थिक मदद कर देते है. मल्हार और उनके दोस्त अभी पढाई कर रहे है और पढाई से समय निकालकर इस पुण्य काम में योगदान दे रहे है.

मल्हार के इस काम में पूनम शाह, शुभाता जोईजोड़े, अनुश्री पाटील, निदा मेनन, सिमरन चांदीरमानी, पार्थ विकम्से, हर्षित शाह, धैर्य वडालिया, राज कोठारी, दीप गाला, हर्ष जैन, निमित मेहता, धार्मिक गज्जर, सुप्रीत तळावेड़कर, मानव गाँधी, सुयोग मार्डे, चिन्मय दिघे, निखिल खोंडा, अखिलेश अधिकारी, भव्य तनेजा के साथ ही देवेंद्र कांबले सहयोग करते है.

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यूनाइटेड नेशन से सम्मान ग्रहण करते हुए मल्हार

मुंबई में 30 सितम्बर 1997 को जन्मे मल्हार कॉमर्स में ग्रेजुएशन कर चुके है. अभी वो CA की पढाई कर रहे है. पर्यावरण सरंक्षण में अतुल्य योगदान के लिए मल्हार को यूनाइटेड नेशन ने 2019 का V अवार्ड मिला है जो इस साल देश में 10 सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिया गया. नयी दिल्ली स्थित यूनाइटेड नेशन हेड क्वार्टर में मल्हार को सम्मानित किया.

अगर आप भी मल्हार और ‘बीच प्लीज‘ की मदद करना चाहते है तो उनके फेसबुक पेज से जरूर संपर्क करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, मल्हार और ‘बीच प्लीज‘ की पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करता है और उनके नेक कार्य के लिए शुभकामनाए देता है.

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