अमेरिका में नौकरी कर रहा यह उद्यमी भारतीय मार्केट में हो रहे बदलावों को बड़ी करीब से देख रहे थे । 2010 तक भारत में e-कॉमर्स की धमक देना शुरू हो गयी थी और Flipkart के साथ ही Snapdeal एवं Paytm भी अपने पैर ज़माने के लिए कोशिश कर रहे थे । माइक्रोसॉफ्ट में काम करने वाले इस उद्यमी ने अपने जीवन में बड़ा कुछ करने के लिए अमेरिका छोड़कर भारत आने का फैसला किया और भारत लौट कर एक वेब पोर्टल बनाया और इसके बाद लोगों की ज़िन्दगी बदलने के लिए एक ऐसा e-कॉमर्स प्लेटफार्म खोला जिसने उनकी कंपनी को तीसरा सबसे बड़ा ऑप्टिकल निर्माता कंपनी बना दिया । चुनौतियों को चुनौती देने वाले इस उद्यमी का नाम है पीयूष बंसल (Peyush Bansal)

पीयूष बंसल ने अपने दोस्तों अमित चौधरी एवं सुमित कपाही के साथ मिलकर लेंसकार्ट (Lenskart.com) की नीवं रखी जो कि चश्मा निर्माण के साथ कांटेक्ट लेंस के साथ ही आईवेयर प्रोडक्ट्स में जाना-माना नाम बन चुकी है । आज देशभर में लेंसकार्ट के ऑफलाइन आउटलेट्स 1500 से ज्यादा शहरों में हैं। फ्रेंचाइजी मॉडल को अपनाते हुए लेंसकार्ट देश के हर शहर में अपने कारोबार का विस्तार कर रहा है।

साल 2010 में Lenskart की शुरुआत की गई। लेंसकार्ट हर महीने करीब 1,50,000 चश्मा बेचता है। साल 2015 के आंकड़ों के अनुसार पीयूष की लेंसकार्ट का नेट वर्थ 2000 करोड़ है लेकिन पीयूष के दिमाग में लेंसकार्ट का आइडिया कहां से आया। देश के सबसे सफल स्टार्टअप कारोबारियों में शुमार पीयूष की सफलता की कहानी से आप भी बहुत कुछ सीख सकते हैं ।

लेंसकार्ट ने आईवियर मार्केट के हर ग्राहक के लिए अनूठी सुविधाएं जुटाई हैं। नेत्र समस्या के सॉल्यूशंस खोजने वाले लोगों के लिए लेंसकार्ट डॉट कॉम ने लॉन्च की है – बाइक आई चेक-अप सर्विस। कंपनी के आॅप्टोमेटरििस्टशियन ग्राहकों के घर पर आंखों की नि:शुल्क जांच करते हैं। पीयूष का दावा है कि वे 70 फीसदी कम मूल्य पर लोगों को दिग्गज कंपनियों के ब्रांडेड फ्रेम्स और काॅन्टेक्ट लेंस उपलब्ध करवा रहे हैं।

एक साल की वारंटी और 14 दिन में बिना पूछताछ रिटर्न जैसी सुविधा लेंसकार्ट प्रदान करती है। लेंसकार्ट पूरे देश में फ्रेंचाइजी के तहत विस्तार कर रहा है। उत्साह से भरे पीयूष कहते हैं,उद्यमी को ध्यान-भंग से बचना चाहिए और निशाने से निगाहें नहीं हटानी चाहिए

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लेंसकार्ट के विज्ञापन में बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ | साभार : लेंसकार्ट के फेसबुक पेज से

पीयूष की कंपनी और भारत में बढ़ते आईवेयर बिज़नेस ने कई निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है । कंपनी के शानदार आईडिया ओर ग्राहकों के जुड़ाव ने देश के नामी-गिरामी निवेशकों को लेंसकार्ट में निवेश करने के लिए मजबूर किया । टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा भी उनके निवेशकों में शामिल है । निवेशकों से मिले पैसे से पीयूष ओर उनकी टीम कंपनी के विस्तार के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में पैसा खर्च कर रहे है । इसके साथ ही मजबूत फ्रैंचाइज़ी नेटवर्क ओर सप्लाई-चैन को भी दुरुस्त कर रहे है ।

पीयूष बंसल ने एक ऐसे क्षेत्र में बिजनेस शुरू किया, जिसे कभी आजमाया ही नहीं गया गया था । लेकिन पीयूष ने बिजनेस शुरू करने से पहले ही जोख‍िम के सभी पहलुओं पर नजर रखी और सारा कैलकुलेशन किया। यही वजह है कि उनका प्रयास सफल हुआ और IIM Bangalore से पढ़ाई करने वाले पीयूष ने ऑनलाइन चश्मा बेचने का काम शुरू कर दिया।

पीयूष के पिता चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। वो चाहते थे कि उनका बेटा भी खूब पढ़े और अच्छी जगह नौकरी करे ।पीयूष ने पिता का कहा मानकर कनाडा से इंजीनियरिंग की डिग्री ली और USA में ही माइक्रोसॉफ्ट ज्वॉइन कर लिया हालांकि, पीयूष की यहां सैलरी बहुत अच्छी थी, पर वो खुश नहीं थे । साल 2007 में उन्होंने वापस भारत आने का फैसला कर लिया, जिससे उनके पिता खासा नाराज हुए थे।

भारत पहुंचते ही पीयूष अपना कारोबार शुरू करने में लग गए । हालांकि उनके पिता अब भी यही चाहते थे कि वो नौकरी करें । पर पीयूष के ऊपर बिजनेस का फितूर सवार था । ई-कॉमर्स भारत में नया कॉन्सेप्ट था । पीयूष को भी इस क्षेत्र में कुछ करना था, इसलिए उन्होंने क्लासिफाइड वेबसाइट सर्च मार्य कैंपस डॉट कॉम की शुरुआत की । यह वेबसाइट दरअसल, छात्रों के लिए थी । यहां छात्र हॉस्टल से लेकर किताबों, कारपुल, पार्ट टाइम जॉब तक देख सकते थे।

Searchmycampus.com वेबसाइट को तीन साल चलाने के बाद पीयूष ने एक साथ चार वेबसाइट शुरू किया। ये चार वेबसाइट आईवियर, ज्वेलरी, घड़ी और बैग्स के लिए थीं ।लेकिन समय के साथ पीयूष ने आईवियर को अपनी प्रायोरिटी बना ली और उसी पर फोकस करने लगे ।

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लेंसकार्ट के ऑफलाइन स्टोर की झलक | Image Source

पीयूष गोयल के अनुसार उनकी सफलता के लिए तीन बातें जिम्मेदार हैं : पहला, जमीन पर रहते हुए आइडिया तैयार करना । यानी कारोबार हवा-हवाई बातों से नहीं, धैर्य और एकाग्रता से चलता है । दूसरा, सपोर्ट सिस्टम. कोई भी काम शुरू करने से पहले अपना सपोर्ट सिस्टम जरूर तैयार रखें ।तीसरा, पीयूष मल्टीटास्क‍िंग में यकीन रखते हैं और किस ई-मेल का जवाब देना है और किस तरह ये जानना भी जरूरी है । यह कारोबार के सफल होने की बड़ी वजहों में एक है।

पीयूष कहते हैं कि फैसला लेने वो वक्त नहीं लेते । इसलिए उनके हाथ से मौके जल्दी चूकते नहीं। इसके अलावा उनका मानना है कि जिम्मे‍दारियों को बांटने के बाद कर्मचारियों की प्रोडक्ट‍िविटी बढ़ जाती है। इससे उन्हें पावर का भी एहसास होता है । इसलिए जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं। टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम कर चुके पीयूष खुद भी टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते है । पीयूष रात को 11 बजे सोते हैं और सुबह 5 बजे उठते हैं और सेहत को सबसे कीमती चीज मानते हैं।

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