दिल्ली में रेलवे क्लर्क का बेटा (Kunwer Sachdev) जिसे पैसों की तंगी के चलते प्राइवेट स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में डाल दिया गया. मेडिकल का एंट्रैंस पास करने के बावजूद बारहवीं में कम अंक के कारण एडमिशन नहीं मिल पाया.

इंजीनियरिंग की पढाई की लेकिन मन नहीं लगा. केबल ऑपरेटर के यहाँ सेल्समेन की नौकरी की तो खुद का केबल का बिज़नेस शुरू किया. केबल इंडस्ट्री में तकनिकी ज्ञान नहीं होने के कारण लोगों ने उसे बेवकूफ भी बनाया.

घर में लगा इन्वर्टर ख़राब हुआ तो इन्वर्टर बनाने की सोची. बिना कोई अनुभव के नए क्षेत्र में कूद पड़े जिस पर केवल विदेशी कम्पनीज का अधिकार था. आज वो न केवल भारत के इन्वर्टर मैन (Inverter Man) कहलाते है बल्कि उनके सौर ऊर्जा के प्रोडक्ट्स भारत के लगभग सब जगह पर मिलते है. सुकाम(Su-Kam) कंपनी के संस्थापक और 2300 करोड़ के मालिक कुंवर सचदेव (Kunwer Sachdev) की ऐसी ही कहानी है.

कुंवर अपने नाम की ही तरह सकारात्मक सोच और बुलंद हौसलों के भी कुंवर निकले. नए क्षेत्र में बनी सम्भावनों को वक्त रहते समझे और कड़ी मेहनत से उस क्षेत्र के किंग बन गए है.

Kunwer Sachdev आज ‘Su-Kam’ कंपनी के मालिक हैं. आज उनकी कंपनी न केवल इन्वर्टर बल्कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कमाल का काम कर रही है. भारत ही नहीं अपितु विश्व में भी उनके प्रोडक्ट्स की पहचान बनी है. ऊर्जा क्षेत्र में उनकी कंपनी नवीनीकरण के साथ ही कई पेटेंट भी ले चुकी है.

आज उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा है. इतना बड़ा अंपायर खड़ा करने के पीछे कुंवर की कड़ी मेहनत और काम को कभी छोटा नहीं समझना है.

बचपन और शुरुआती जीवन  . .

कुंवर का जन्म दिल्ली के एक पंजाबी परिवार में 16 नवंबर 1962 को हुआ था. कुंवर अपने दो भाई और माता-पिता के साथ छोटे से घर में रहा करते थे. कुंवर के पिता भारतीय रेलवे में क्लर्क थे और मां गृहणी थीं.

एक अवार्ड समारोह के दौरान कुंवर सचदेव । चित्र साभार : हैशटैग मार्केटिंग

कुंवर ने प्राइमरी तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में की लेकिन बाद में पैसों की कमी के कारण उन्हें सरकारी स्कूल में डाल दिया गया. 12वीं पास करने के बाद कुंवर ने मेडिकल का एंट्रेस एग्जाम पास कर लिया लेकिन इंटर में उनके सिर्फ 49 फीसदी नंबर थे. इस वजह से उनका एडमिशन नहीं हो पाया.

इसके बाद कुंवर ने फिर से 12वीं का एग्जाम दिया और इस बार अपने स्कूल में टॉप किया. लेकिन इस बार मेडिकल का एंट्रेंस एग्जाम पास नहीं कर पाए . इसके बाद कुंवर को इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन मिल गया.

कुंवर का इस कोर्स में कोई खास रूचि नहीं थी लेकिन फिर भी वो लगे रहे. कॉलेज के दिनों से ही कुंवर को किताबे पढ़ने का शौक था. यही आदत बाद में उनके काम आई. पढ़ाई के साथ-साथ कुंवर अपने भाई के साथ घर-घर जाकर पेन बेचते थे. इससे वो परिवार की मदद कर पाते थे.

पढाई के बाद की सेल्समेन की नौकरी, वहीं से मिला बिज़नेस का आईडिया . .

पढ़ाई पूरी करने के बाद कुंवर ने एक केबल कम्युनिकेशन कंपनी के सेल्स डिपार्टमेंट में जॉब कर ली. यहां काम करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि भारत में बिजनेस करना एक अच्छा कमाई का जरिया साबित हो सकता है.

इसी सोच के साथ कुंवर ने जॉब छोड़ दी और दिल्ली में अपना केबल का बिजनेस शुरू किया. जिसका नाम उन्होंने ‘Su-Kam Communication Systems‘ रखा. बिजनेस तो शुरू हो गया था लेकिन कुंवर को मैन्युफैक्चर के बारे में कोई समझ नहीं थी. इसके चलते उन्होंने कुछ अच्छे इंजीनियर को अपने यहां काम दिया.

अपने ऑफिस में कुंवर सचदेव । चित्र साभार : फोर्ब्स इंडिया

नए काम के चलते कई लोगों ने उन्हें बेवकूफ भी बनाया. लेकिन कुंवर समय के साथ कुछ ना कुछ सीखते रहे. इसी बीच शुरुआती दिक्कतों के बाद केबल टीवी का काम चल पड़ा था. कुंवर ने देखा कि अब हर घर को केबल कनेक्शन की जरूरत है. इसी के साथ कुंवर ने टीवी के उपकरण जैसे एंप्लीफायर और मॉड्यूलेटर्स बनाने शुरू किए.

बार-बार इन्वर्टर के ख़राब होने पर खुद ही इन्वर्टर बनाने का निर्णय किया . .

कुंवर ने उस दौरान देखा कि भारत में बिजली की समस्या बहुत ज्यादा है. कुंवर बताते हैं कि उनके घर का इनवर्टर भी अक्सर खराब हो जाता था. इसे ठीक करवाने के लिए उन्हें मकैनिक को बार-बार बुलाना पड़ता था.

एक बार गुस्साकर उन्होंने खुद ही इनवर्टर खोला और देखने लगे कि दिक्कत क्या है. इसके बाद उन्होंने अपने बिजनेस की आर एंड डी टीम को बुलाया और कहा कि अच्छे से देखकर बताओ कि इसमें क्या खराबी है.

तब कुंवर को पता चला कि मार्केट में जो भी इनवर्टर बन रहे हैं उसमें खराब मटेरियल लगाया जा रहा है . इसके बाद कुंवर ने खुद इनवर्टर बनाने की सोची .

दिल्ली मैराथन में हिस्सा लेते कुंवर सचदेव । चित्र साभार : हैशटैग मार्केटिंग

सफलता के पथ पर Kunwer Sachdev. .

तब उन्होंने 1998 में Su-Kam Power Systems के नाम से एक कंपनी डाली. एक ओर केबल टीवी बिजनेस चल पड़ा था वहीं कुंवर ने दूसरी कंपनी की नींव भी रख दी थी.

कुंवर बताते हैं, ‘उस समय लोगों को नई टेक्नोलॉजी के बारे में बताना और उसे खरीदने के लिए मनाना बेहद मुश्किल था. काफी मेहनत के बाद लोगों ने इसे स्वीकार किया.

साल 2000 में Su-Kam दुनिया की पहली ऐसी कंपनी बन गई जो प्लास्टिक बॉडी वाले इनवर्टर बनाती थी.

प्लास्टिक बॉडी बनाने का आइडिया कुंवर को तब आया जब उनके बेटे को इनवर्टर से करंट लगा था.

अपने परिवार के साथ कुंवर सचदेव |  चित्र साभार : कुंवर सचदेव ऑफिसियल वेबसाइट

अब 56 साल के Su-Kam कंपनी के फाउंडर कुंवर सचदेव करीब 2300 करोड़ की कंपनी के मालिक हैं . इस कंपनी में सोलर प्रोडक्ट भी बनते हैं जो दिन में 10 घंटे बिजली दे सकते हैं.

इसके प्रोडक्ट अब तक भारत के 1 लाख घरों लगाए जा चुके हैं . Su-Kam के सोलर प्रोडक्ट की डिमांड देश में ही नहीं विदेश में भी हैं . कुंवर की सोच और कड़ी मेहनत ने उन्हें सच में ‘सोलर मैन ऑफ़ इंडिया बना दिया है.

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