बोल, कि लब आजाद हैं तेरे , बोल, जबां अब तक है तेरी।

तेरा सुतवां जिस्म है तेरा , बोल, कि जां अब तक तेरी है।

यह पंक्तियाँ देश के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Rights Activist) कुंदन श्रीवास्तव पर सटीक बैठती हैं. देश और दुनियां में होने वाले महिला अपराधों, नस्लीय भेदभाव और मानवाधिकारों के लिए यह युवा कई वर्षों से संघर्षरत हैं.

दिल्ली के एक कोने में होने वाला अपराध हो या न्यूयार्क में भारतवंशी महिला के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार हो या सऊदी अरब में काम कर रहे मजदूरों के अधिकारों की बात हो, कुंदन इन सभी मुद्दों पर पीड़ितों की मदद करते हैं एवं राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मंचों पर बेबाक राय रखते हैं. मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक, इंजीनियर और दबी-कुचली आवाजों का चेहरा हैं कुंदन श्रीवास्तव (Kundan Srivastava).

कुंदन श्रीवास्तव ने कई मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं. अमेरिका में भारतवंशी एकता देसाई को नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा तो कुंदन ने एकता की मदद करते हुए इस मुद्दे को भारत के साथ ही अंतराष्ट्रीय मीडिया की सुर्ख़ियों में ला दिया. देश में भी घरेलू हिंसा और अत्याचार, यौन अपराध एवं दहेज़ उत्पीड़न जैसी घटनाओं में अपने संस्थान ‘द वॉयस रेजर’ (The Voice Raiser) के माध्यम से पीड़ितों की मदद करते हैं.

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कुंदन श्रीवास्तव अटल इनोवेशन मिशन में मेंटर के रूप में चुने गए है

कुंदन श्रीवास्तव को सामाजिक क्षेत्र में अप्रीतम कार्य करने के चलते कई मंचों से सम्मानित किया जा चूका है जिनमें महिला दिवस के मौके पर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष K.G. बालाकृष्णन के हाथों  ‘वीर पुत्र सम्मान‘ भी शामिल हैं. कुंदन श्रीवास्तव को भारत सरकार (नीति आयोग) की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘अटल इनोवेशन मिशन‘ में मेंटर (मार्गदर्शक) के रूप में कार्य करने के लिए चुना गया. इसके साथ ही कुंदन श्रीवास्तव यूनाइटेड किंगडम (UK) की संस्था Postcard for Peace  के ब्रांड एम्बेसडर हैं. भारत से इस संस्थान की ब्रांड एम्बेसडर की सूची में गुरमेहर कौर (Peace Activist & Author) को भी शामिल किया गया हैं.

सऊदी अरब में फंसे भारतीय कामगार अब्दुल सत्तार मकंदर को कुंदन श्रीवास्तव तीन महीने के अंदर सही –  सलामत भारत लेकर आ गए. इसके साथ ही अन्य कामगारों की लगातार मदद कर रहे हैं. अमेरिका में नस्लीय भेदभाव झेलने वाली एकता देसाई का मुद्दा तो चर्चा का विषय बन गया था.

उत्तरप्रदेश की संगीता जैन दहेज कानूनों (IPC- 498a) का दुरुपयोग करते हुए अपने पति और सास को प्रताड़ित करती थी. जब यह मामला कुंदन के पास आया तो उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन के जरिये वीडियो बनाकर पति संदीप जैन और उनकी माँ की मदद की. उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सरकार से मदद की गुहार लगा कर संगीता जैन जैसी क्रूर औरत को जेल भिजवाया.

कुंदन के कुछ प्रमुख कार्य :

1. ‘दुनिया में सबसे तेज़ कैशियर‘ 60 साल की महिला का गलत तरह से बनाया गया वीडियो लोगो को गुमराह करने की कोशिश करता हैं.

2. पूर्वोत्तर दिल्ली के शाहदरा इलाके में अपनी मां की पिटाई करने के आरोप में एक 40 वर्षीय आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भिजवाया.

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कुंदन श्रीवास्तव कई मंचो पर बेबाक राय रख चुके है

बचपन से ही सामाजिक समस्याओं के खिलाफ प्रखर आवाज़ उठाने के कारण उनका अपहरण कर लिया गया था. अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बचने के दौरान उन्हें अपने पैर में गोली खानी पड़ी. इसके बाद भी अपनी पढाई के दौरान सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे. बिहार के रक्सौल से आने वाले कुंदन श्रीवास्तव देश के युवा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से एक हैं , जिन्होंने मानव अधिकार, महिला विकास एवं सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. 

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान कुंदन श्रीवास्तव बताते हैं कि बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले के रक्सौल में  बचपन बीता. बिहार में उस वक़्त जंगल राज था और समस्याएं अनेक थी. जब मैंने इनके खिलाफ आवाज़ उठाई तो मेरा अपहरण करके डराया-धमकाया गया. इस घटना ने मेरे जीवन को बदल कर रख दिया. 

इस घटना के बाद मैंने अपना जीवन समाज को समर्पित करने का फैसला किया. इसके बाद मैंने सामाजिक कार्यों के साथ ही अपनी पढाई भी पूरी की. देहरादून के प्रतिष्ठित कॉलेज (देहरादून इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) से इंजीनियरिंग के बाद मैंने दिल्ली का रुख किया. इसी दौरान मेरे पिता का देहांत हो गया और भाई को कैंसर के कारण खो दिया लेकिन सामाजिक कार्यों में व्यस्तताओं ने मुझे टूटने से बचा लिया. 

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मिल चूका है वीर पुत्र सम्मान

कुंदन आगे बताते है कि दिल्ली में मैंने एक निजी कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करना शुरू किया. मुझे मेरी नौकरी से परिवार चलाने के लिए पर्याप्त पैसे मिल रहे थे लेकिन समाज में घट रही महिला उत्पीड़न और शोषण की घटनाओं ने अंदर से झकझोर दिया. महिलाओं के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए ‘Be In Humanity Foundation‘ शुरू किया. यह संस्थान पूरी तरह से स्वयंसेवियों के जरिये चलता है. हम किसी भी प्रकार का दान नहीं लेते है. स्वयंसेवी अपनी कमाई का कुछ हिंसा फाउंडेशन के काम के लिए देते है.

शुरुआत में दिल्ली को ही कार्यक्षेत्र बनाया लेकिन समय के साथ संगठन का काम बढ़ता गया और कई राज्यों से स्वयंसेवी जुड़ते चले गए. समाज के विभिन्न हिस्सों से आने वाली महिलाओं के उत्थान एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमने काम करना शुरू किया.

कुंदन श्रीवास्तव आगे बताते है कि यौन हिंसा, शोषण, बलात्कार और अपराधों के बाद महिलाओं की हालत ख़राब हो जाती है. शारीरिक दुःख के साथ ही उन्हें मानसिक दुःख भी झेलना पड़ता है. हमारा उद्देश्य उनका इलाज करवाने के साथ ही समाज में पुनः स्थापित करना रहता है. उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करने का काम करते हैं. 

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महिलाओं के ऊपर लिख चुके है किताब

इसके साथ ही हमें इन समस्याओं के हल के लिए जमीनी स्तर पर काम करना पड़ेगा. कॉलेज एवं स्कूल में पढ़ने वाले  बच्चों को लैंगिक समानता, यौन शोषण एवं अपराधों के बारे में जागरूक करने के लिए वर्कशॉप्स एवं सेमीनार का आयोजन किया जाता हैं. देशभर के प्रबुद्धजनों को एक मंच पर लाकर देश और खासकर महिलाओं की समस्याओं के हल के बारे में चिंतन करना जरूरी हैं.

कुंदन श्रीवास्तव ने ‘Title is unTitled‘ के नाम से किताब भी लिखी हैं जिसके जरिये वो सामाजिक सरंचना के बारे में विस्तार से बताते हैं. इसी के साथ कुंदन कहते हैं कि महिला सशक्तिकरण और विकास को डिबेट के मुद्दों से निकालकर असल में जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए. नहीं तो यह मुद्दें हमेशा से ही एक चर्चा का विषय बनकर रह जायेंगे. 

अगर आप भी कुंदन श्रीवास्तव से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे!

बी पॉजिटिव इंडियाकुंदन श्रीवास्तव के कार्यों की प्रशंसा करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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