लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षा गार्ड का काम करने वाले के बेटे कुलदीप द्विवेदी (Kuldeep Dwivedi) ने यह साबित कर दिया कि यदि आप में सफल होने की इच्छाशक्ति है तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती। कुलदीप को अफसर बनाने के लिए पिता ने हर मुमकिन कोशिश की। खुद भूखा रहे लेकिन कभी भी अपने बच्चे को भूखे पेट सोने नहीं दिया।

सूर्य कांत की कमजोर आर्थिक स्थिति भी उनके बेटे को भारतीय समाज में सबसे प्रतिष्ठित नौकरी हासिल करने हेतु प्रोत्साहित करने से न रोक सकी। उन्होंने अपने बेटे की महत्वाकांक्षा का सिर्फ नैतिक रूप से बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक रूप से भी समर्थन किया।

आखिरकार बेटे ने 2015 में आईआरएस का एग्जाम क्वालीफाई करके अपने पिता के सपने को साकार कर दिखाया। वर्ष 2015 में यूपीएससी द्वारा आयोजित की गई सिविल सेवा परीक्षा में कुलदीप द्विवेदी की अखिल भारतीय रैंक 242 रही। पिछले 27 साल से गार्ड की नौकरी कर रहे सूर्यकान्त द्विवेदी के बेटे कुलदीप द्विवेदी (Kuldeep Dwivedi) वर्तमान में आईआरएस की ट्रेनिंग कर रहे है।

कुलदीप द्विवेदी का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ के बछरावां में हुआ है । उनके पिता सूर्यकान्त द्विवेदी लखनऊ यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 4 पर गार्ड की नौकरी करते है तथा मां हाउस वाइफ है। कुलदीप के परिवार में उनके अलावा दो भाई और एक बहन है। सबसे बड़े भाई संदीप तेलीबाग में डेरी फार्म चलाते है। मझले भाई प्रदीप द्विवेदी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते है। चार भाई-बहनों में कुलदीप तीसरे नंबर पर है। परिवार में सबसे छोटी उनकी बहन स्वाती है। वह फैमिली में सबसे छोटी है। वह अभी दिल्ली में रहकर पीसीएस की तैयारी कर रही है। कुलदीप की 2017 में शादी हो गई है।

Kuldeep with his brothers
अपने भाइयों के साथ कुलदीप द्विवेदी | Image Source : Bhaskar.com

उनके पिता ने परिवार का खर्च चलाने के लिए 1991 में एलयू में गार्ड की नौकरी शुरू की।उन्हें तब 11 सौ रूपये सैलरी मिलती थी। मुश्किल से परिवार का गुजारा हो पाता था। बच्चे बड़े होने लगे तो उनकी शिक्षा की चिंता बढ़ने लगी। बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके पिता ने पुश्तैनी खेत में काम करने के अलावा गार्ड की नौकरी भी जारी रखी।

उनके पिता के पास कोई अच्छी जॉब नहीं थी और उन्हें घर का खर्च चलाने में भी काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उस समय घर में वित्तीय दिक्कतों के कारण घर में बिजली भी नहीं थी। जिसके चलते कुलदीप ने लालटेन की रोशनी में पढ़कर हाईस्कूल की परीक्षा दी और वो अच्छे अंकों से पास हुए । 1995 में उनके घर में पहली बार बिजली का कनेक्शन लगा। कुलदीप और उसके परिवार वाले घर में बिजली आने से बेहद खुश हुए थे।

कुलदीप द्विवेदी (Kuldeep Dwivedi) ने 2009 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया था और 2011 में अपने स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। 2015 में उन्होंने आईएएस की परीक्षा दी थी और प्रथम प्रयास में ही उन्होंने द्वितीय चरण के लिए क्वालीफाई कर लिया था।

उस समय कुलदीप इलाहाबाद में रहकर अकेले तैयारी कर रहे थे। उनके पास उस समय कोई मोबाइल नहीं था। अक्सर पीसीओ से या दूसरे से फोन मांग कर उनको घर पर फोन करना पड़ता था। उनकी समस्या को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें नया मोबाइल दिलवाया । तब से उन्होंने अपने पास मोबाइल रखना शुरू कर दिया।

आईएएस के एग्जाम में उनकी 242 वीं रैंक आई थी। उनके रैंक के हिसाब से उन्हें आईएएस तो नहीं लेकिन आईआरएस में जगह जरूर मिल गयी। अगस्त 2016 में नागपुर में उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई। वो अभी भी ट्रेनिंग पर है । ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग असिस्टेंट कमिश्नर इन इनकम टैक्स ऑफिसर की पोस्ट पर होगी।

Kuldeep Dwivedi's father
कुलदीप के पिता सूर्यकान्त द्विवेदी ड्यूटी करते हुए | Image Source : Bhaskar.com

उनके पिता सूर्यकान्त आज भी एलयू के गेट नंबर 4 पर गार्ड की ड्यूटी करते है। खाली टाइम में वे खेती भी करते है। उनके पिता आज भी साइकिल से चलते है और एक छोटे से मकान में अपने परिवार के साथ रहते है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित की जाने वाली लोक सेवा परीक्षा में रैंक लाने का अर्थ क्या है, यह अपने परिवार को समझाने में कुलदीप द्विवेदी को समय लगा।

कुलदीप द्विवेदी (Kuldeep Dwivedi) ने साबित कर दिखाया कि कड़ी मेहनत किसी भी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती बल्कि खुद की क्षमताओं पर भरोसा करना सबसे महत्वपूर्ण है। उनकी सफलता दृढ़– संकल्प एवं लक्ष्य पर केंद्रित मन और पिता के प्रयासों का उदाहरण है। इन्होंने अपनी गरीबी को पीछे छोड़ते हुए सफलता के लिए काफी मेहनत की।

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