एक दशक से मौसम की बेरुखी झेल रहे बुन्देलखण्ड के हालात भयावह हो चुके हैं. एक तरफ भूख से लड़ाई है तो दूसरी तरफ क़र्ज़ की मार. हालात से बेबस किसानों की खुदकुशी की खबरें भी आती रहती हैं. बुंदेलखंड बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है.

यह कहानी एक दो साल की नहीं है बल्कि पिछले एक दशक से बुन्देलखण्ड सूखे की मार झेल रहा है. ऐसे हालात में भी बुन्देलखण्ड में एक ऐसा शख्स है जिसने ना तो कुदरत से हार मानी ना ही इन कठिन हालातों में अपने घुटने टेके, जो अपने मजबूत इरादों से आकाल से भी लड़ता नजर आ रहा है.

अकाल से जूझते हमीरपुर के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के बड़ा पचखुरा गांव में स्थित एक मंदिर में कृष्णानन्द का बसेरा है जो बचपन से ही संत बनकर जीवन जी रहे है. कृष्णानन्द ने वो काम कर किया है जिसे सुनकर कर आप को बिहार के दशरथ मांझी की याद आ जाएगी.

विपरीत हालात में एक शख्स ने अकेले अपने दम पर परोपकार के लिए 8 बीघे का तालाब खोद कर हमीरपुर की बंजर जमीन को हरा-भरा करने के साथ ही जानवरों के लिए भी पानी की व्यवस्था कर डाली है. उसकी जिद इतनी पक्की थी कि उसने जो सोचा वह कर दिखाया.

अपने गांव में पानी के हालात देख कर कृष्णानन्द ने खुद ही आठ बीघा का तालाब खोद कर समाज के लिए मिसाल पेश कर दी. करीब 4 साल से दिन-रात जी-तोड़ मेहनत और लगान से कृष्णानन्द ने 6 फुट गहरा तालाब महज इसलिए खोद डाला कि आने वाली बारिश में यह पानी से लबालब हो जाए और उसके गांव के लोगों और जानवरों को पानी के लिए दर-दर भटकना न पड़े.

कृष्णानन्द ने अकेले जब इस तालाब की खुदाई शुरू की तो गांव वालों ने उसे पागल कहते हुए उसका मजाक उड़ाया, लेकिन कृष्णानन्द ने हार नहीं मानी और अपने अटूट इरादों से तालाब खोदने में जुटा रहा और आज वह गांव वालों के लिए एक नायक बन गया है.

कृष्णानंद ने 6 फुट की गहराई से मिट्टी ऊपर लाकर पूरे तालाब की मेडबंदी भी कर दी है. जिस काम को सैकड़ों मजदूर करते उस काम को कृष्णानन्द ने अकेले कर दिखाया है. कृष्णानन्द की इस पहल ने बुन्देलखण्ड में बारिश के पानी के प्रबन्धन की एक नई पहल की शुरुआत की है. इस समय बारिश के पानी से यह तालाब भर गया है और अब जलीय जीवों के साथ स्थानीय लोगों को समुचित पानी मिल रहा है.

बी पॉजिटिव इंडिया, कृष्णानन्द के कार्यों की सराहना करता हैं और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर जनता पर्यावरण एवं जल-सरंक्षण की महत्ता को समझेंगे.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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