कॉलेज में पढाई के दौरान अपने साथियों के साथ गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया. बच्चों को पढ़ाते हुए बच्चो की तकलीफ और उनका शैक्षणिक स्तर देखकर यही काम करने का निश्चय किया. पांच बच्चों से शुरुआत की और आज उनके पास 600 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे है. शौक से शुरू हुआ यह काम अब एक आंदोलन का नाम ले चूका है.

गरीब बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के साथ ही खाना एवं जरूरी सामान भी उपलबध करवाया जाता है. झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चो को मुफ्त में पढ़ाने के लिए इन्होने एक फाउंडेशन तक बना दिया. शिक्षा से गरीब बच्चो का स्तर उठाने के लिए काम कर रही है किंजल शाह (Kinjal Shah).

किंजल शाह ने गुजरात के अहमदाबाद के गुलबाई टेकरा में बच्चों को पढ़ाने के लिए ‘श्वास (SHWAS)‘ नाम से फाउंडेशन बनाया है. आज उनके पास पुरे शहर में 8 स्कूलों में 600 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे है. 19 से ज्यादा अध्यापक नियमित रूप से इन बच्चों को पढ़ाने में लगे हुए है. बच्चे सरकारी स्कूल के ही नियमित विद्यार्थी है लेकिन किंजल और उनकी टीम सुबह-शाम दो घंटे पढ़ाती है.

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बच्चो के साथ किंजल शाह | तस्वीर साभार : किंजल शाह के फेसबुक प्रोफाइल से

किंजल का जन्म गुजरात के अहमदाबाद शहर में ही हुआ और शुरुआती पढाई के बाद उन्होंने LD कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से बायो-मेडिकल में ग्रेजुएशन किया. पढाई के बाद इन्हे अच्छे पैकेज वाली जॉब मिल रही थी लेकिन उन्होंने अपने मिशन को पूरा करने के लिए जॉब के बजाय शिक्षा क्षेत्र में काम करना उचित समझा. उनके पिता निजी कंपनी में मैनेजर है जबकि माँ गृहणी. उन्हें अपने परिवार से पूरा सपोर्ट मिलता है. उनके भाई खुद का व्यवसाय चलाते है.

बी पॉजिटिव से खास बातचीत में किंजल ने बताया कि ” 2008 में जब में कॉलेज में पढ़ रही थी तो मेरे कुछ दोस्त वीकेंड पर गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने के लिए जाते थे. उनसे प्रभावित होकर मैंने भी बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. यह एक-दो साल ऐसे ही चलता रहा और हमें बच्चों के स्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा था.

कॉलेज ख़त्म होने के बाद मेरे पास दो विकल्प थे : पहला पढाई के बाद मिली नौकरी करना या इन गरीब बच्चों को पढ़ाने के काम को आगे बढ़ाऊ. मैंने दूसरा विकल्प चुना और बच्चों को पढ़ाने में जुट गयी. 2011 में हमने ‘श्वास फाउंडेशन‘ की नींव रखी और पांच बच्चों के साथ हमने शुरुआत की.

शुरुआती कुछ दिनों में बच्चों के माँ-बाप को समझाना मुश्किल था लेकिन जब उन्हें पता चला कि बच्चों को मुफ्त में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल रही है तो राज़ी हो गए. हम लगातार उनसे मिलते और उनकी तकलीफ समझने की कोशिश करते रहे.

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क्लासरूम में पढ़ते बच्चे | तस्वीर साभार : किंजल शाह के फेसबुक प्रोफाइल से

साल दर साल काम करने के बाद उनका विश्वास हमारे पर बढ़ता गया और हमारा फाउंडेशन का काम भी बढ़ा. स्टूडेंट्स बढ़ने के बाद हमने नए सेंटर्स किराये पर लिए और आज यह संख्या अहमदाबाद शहर में ही 8 हो गयी है.

हमने सुबह और शाम बच्चों को 2 घंटे पढ़ाना शुरू किया जिसमे बेसिक शिक्षा के साथ ही अंग्रेजी और कंप्यूटर को भी जोड़ा. पढाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स डे और कई गतिविधियों में बच्चों को शामिल किया. ज्यादातर बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ते है लेकिन हमने कुछ बच्चों की आर्थिक मदद करके उन्हें निजी स्कूल में भी भेजा.

इन सारे काम के लिए फण्ड जुटाने के लिए सोशल मीडिया के साथ ही क्राउड फंडिंग वेबसाइट का भी इस्तेमाल किया. इसके साथ ही दोस्तों, रिश्तेदारों ने भी समय-समय पर हमारी मदद की. कुछ संस्थाए और दानदाता भी हमसे जुड़े हुए है जिससे हम इतने बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे है.

श्वास फाउंडेशन के समाज में प्रभाव के बारे में पुछा तो उन्होंने एक महिला की कहानी सुनाई. किंजल शाह कहती है कि एक महिला अपने बच्चों को छोड़ने के लिए हमारे सेंटर्स पर आती थी. शुरुआती समय में वो बच्चों को पढ़ते हुए देखती थी. एक दिन उसने पढने की इच्छा जाहिर की तो हमने उन्हें बेसिक्स सिखाया.

धीरे-धीरे उन्होंने रफ़्तार पकड़ी और आज वो पांचवी तक के बच्चों की किताबों को पढ़ और समझ सकती है. उसके जोश को देखते हुए हमने उन्हें टीचर के रूप में रखा जो उसके लिए सपना सच होने जैसा था क्योंकि उससे पहले वो घरेलु नौकर के रूप में काम कर रही थी.

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बच्चों द्वारा बनायीं गयी पेंटिंग | तस्वीर साभार : किंजल शाह के फेसबुक प्रोफाइल से

उनके अलावा भी बच्चे अपने माता-पिता की व्यवसाय में मदद करते है. जैसे छोटा-मोटा हिसाब करना हो या मेनू बनाना हो या बस के नंबर पढ़कर उसके बारे में जानकारी देना. यह छोटे से परिवर्तन वाकई शुकुन देने वाले होते है.

आगे की योजनाओं के बारे में किंजल बताती है कि हम शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किये बिना ज्यादा से ज्यादा बच्चों को जोड़ना चाहते है. उन्हें पढाई के साथ ही स्किल और पर्सनालिटी डेवलपमेंट जैसे कोर्स भी करवाना हमारी योजनाओं में शामिल है.

किंजल शाह कहती है कि गरीब एवं पिछड़े परिवार के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. केवल उन्हें मौका और संसाधन की आवश्यकता होती है. समाज के लोगों को ऐसे बच्चों की मदद के लिए आगे आना चाहिए.

बी पॉजिटिव, किंजल शाह और ‘श्वास‘ की पूरी टीम को शुभकामनाए देता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर हमारे पाठक भी जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे.

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