मानव जब जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है….

ये पंक्ति जो अभी आपने ऊपर पढ़ी दरअसल वो रामधारी सिंह दिनकर की लिखी कविता ‘वीर‘ का अंश है। लेकिन ये पंक्तिया इस उद्यमी के लिए सटीक बैठती है। बैंक से दिवालिया घोषित हो चुके अपने पिता से सींख लेते हुए इन्होने मेहनत और किस्मत का शानदार मिक्स किया और आज देश की प्रसिद्ध एवं जानी-मानी एयरलाइन्स के मालिक बन चुके है । कभी दस रुपये के लिए दर-दर की ठोकरे खाने वाले इस उद्यमी ने देश के अरबपतियों में अपना स्थान बना लिया है । इसी तरह संघर्ष की पराकाष्ठा एवं धैर्य के धनी है जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल (Naresh Goyal)

नरेश गोयल की कहानी शुरू होती है पंजाब के संगुर से, जहां 29 जुलाई 1949 को नरेश का जन्म हुआ था। नरेश के पिता ज्वैलरी के व्यापारी थे। नरेश तब बहुत ही छोटे थे जब उनके पिता का देहांत हो गया था। तब नरेश की उम्र करीब 11 साल की थी। पूरा घर कर्ज में डूबा हुआ था। सब कुछ बिक गया। यहां तक कि रहने को खुद का घर भी नहीं बचा। घर की नीलामी हो गई थी। इसके बाद वो अपने ननिहाल में रहने लगे।

हालात इतने बुरे थे कि नरेश के पास घर से स्कूल जाने तक के लिए पैसे नहीं होते थे और रोज नरेश कई मील पैदल चल कर स्कूल जाया करते थे। मां के पास इतने पैसे नहीं थे कि बेटे के लिए एक साइकिल भी खरीद लें। नरेश जब थोड़े बड़े हुए तो उनका मन था कि वो चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई करें लेकिन पैसे के अभाव ने वो भी छुड़वा दिया। वे लंदन जाकर चार्टेड अकांउटेसी करना चाहते थे। उन्हें दाखिला तो मिल गया, पर उनके पास वहां जाने के लिए पैसे ही नहीं थे। अंत में पास के ही एक कॉलेज से बीकॉम पूरा करके मन को संतोष दिला लिया।

उनकी मां ने कहा कि बेटा तुम लंदन क्यों जा रहे हो यहीं नौकरी ढूंढ लो, यहीं रहोगे तो परिवार की मदद भी होती रहेगी। तब उनकी मां के चाचा से मुलाकात हुई। 1967 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद नरेश ने अपने मामा जी के ट्रेवल एजेंसी में काम करना शुरू कर दिया। यहां वो एक लेबनीज एयरलाइन्स के लिए काम देखते थे। वहां काम करने के बदले नरेश को दिन के 10 रुपये मिल जाया करते थे, मतलब महीने के 300 रुपये।   

तकरीबन 7 सालों तक काम ऐसे ही चलता रहा। लेकिन 7 सालों ने नरेश को इस बिजनेस में ट्रेंड कर दिया था। बावजूद इसके कि शुरुआती 3 सालों के बारे में नरेश का कहना था कि मुझे सिर्फ सोना आता था।

इसके बाद से उन्होंने कई कंपनियों के लिए कई अच्छे-अच्छे पोस्ट पर काम किया। जिनमें इराक एयरवेज के लिए पीआर के काम से लेकर, रॉयल जॉर्डियन एयरलाइन के लिए रीजनल मैनेजर का काम और इन सब के अलावा मिडिल ईस्टर्न एयरलाइन कंपनियों के इंडिया ऑफिस में टिकटिंग, रिजर्वेशन सहित सेल्स तक का काम किया।

इंटरनेशनल कंपनियों के ऑपरेशन को करीब से देखने के बाद नरेश को इंडिया में लोगों को हो रही परेशानी का पता चला और इसके सॉल्यूशन के लिए नरेश ने काम करने की सोची, लेकिन इसके लिए अपना खुद का काम शुरू करना था।

ट्रैवल एजेंसी शुरू करने के लिए उनके पास पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी मां से बात की। मां ने अपने जेवर देकर कहा, इन्हें बेच दो। जेवर बेचने से उन्हें करीब 15 हजार रुपए मिले। उन्होंने दस हजार रुपए से जेट एयर शुरू की। फिर शुरू हुआ जेटएयर (प्राइवेट) लिमिटेड लेकिन शुरुआती दिनों में कंपनी ने सिर्फ कुछ विदेशी एयरलाइन कंपनियों के मार्केटिंग और सेल्स के काम का जिम्मा लिया। इसके बाद फिलिप्पिंस एयरलाइन ने उन्हें पूरे इंडिया रीजन का मैनेजर बना दिया।

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जेट एयरवेज का एक विमान | Image Source

साल 1991 के बाद असल में जेट एयरवेज के लिए रास्ता खुलना शुरू हुआ। जब भारत सरकार ने ‘ओपन स्काई पॉलिसी‘ को हरी झंडी दी और नरेश गोयल ने मौके भांप लिया और डोमेस्टिक ऑपरेशन के लिए 05 मई, 1993 को जेट एयरवेज की शुरुआत हुई। कंपनी लगातार अपने काम को बढ़ाती रही और एक वक्त पर जब कंपनी अपने शीर्ष पर थी तब नरेश गोयल देश के 20 सबसे अमीर लोगों में से एक हुआ करते थे

वर्तमान में जेट एयरवेज भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी है। जेट एयरवेज का मुख्यालय भारत के वाणिज्यिक राजधानी मुंबई में स्थित है। इसके अलावा चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली में भी कंपनी के महत्वपूर्ण कार्यालय हैं। स्थापना से लेकर अभी तक जेट एयरवेज को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। सन 2005 में जेट एयरवेज ने अपना IPO निकला जो बहुत सफल रहा।

बिजनेस है तो इसमें उतार-चढ़ाव होता ही रहता है। वो भी हुआ। एक वक्त था जब जेट एयरवेज ने $500 मिलियन डॉलर में ‘एयर सहारा’ को खरीद लिया था। कंपनी का सालाना टर्नओवर $14 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई थी। फिर 2014 में करोड़ों का नुकसान भी हुआ लेकिन लड़ने वाले अपने लिए जीत का रास्ता ढूंढ ही लेते हैं।

कंपनी ने नई-नई रणनीतियों को अपना कर खुद को फिर से संभाल लिया और ऑपरेशन सही तरीके से चल रहा है। नरेश गोयल के दो बच्चे हैं, दोनों ही लंदन में रहते हैं।

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