बचपन में वजन ज्यादा होने के कारण इनके पिता एवं चाचा खेतों पर ले जाकर काम करवाते थे जिससे की उसका शरीर तंदुरुस्त हो जाये । शरीर को फिट करने के चक्कर में पानीपत के एक स्टेडियम में दौड़ लगाना शुरू कर देता है । इसी स्टेडियम में देश के नामी खिलाड़ियों को देखकर उन्हें भी खेल का चस्का लग जाता है । साथी खिलाड़ियों एवं कोच के मार्गदर्शन से यह खिलाड़ी बहुत कम उम्र में ही अपने नेशनल रिकॉर्ड ध्वस्त कर देता है । 2017 में हुई विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाला पहला खिलाड़ी बन जाता है । ऐसी ही कुछ कहानी है कामनवेल्थ गेम्स – 2018 में भाला-फेंक (जेवलियन थ्रो) प्रतियोगिता में क्वालीफाई करने वाले 21 वर्ष के नीरज चोपड़ा ( Neeraj Chopra)  की

अंजू बॉबी जॉर्ज के बाद किसी विश्व चैम्पियनशिप स्तर पर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक को जीतने वाले वह दूसरे भारतीय हैं। Bydgoszcz, पोलैंड में आयोजित 2016 आइएएएफ U20 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। इस पदक के साथ साथ उन्होंने एक विश्व जूनियर रिकॉर्ड भी स्थापित किया है।

चाचा के डर से वजन कम करने के लिए नीरज खेलकूद से जुड़े थे। इतनी कामयाबी मिली कि रियो ओलंपिक में खेलने से केवल 90 सेमी. से चूक गया लेकिन अभी कामनवेल्थ गेम्स – 2018 की तैयारी कर रहे है। साथ ही आज देश में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी है हरियाणा के नीरज चोपड़ा। जो महज चार साल के खेल कैरियर में पांच बार नेशनल रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुका है।

नीरज चोपड़ा ( Neeraj Chopra) मूल रूप से हरियाणा के पानीपत स्थित खंदारा गांव के रहने वाले हैं। इनका जन्म 24 दिसंबर 1997 को हुआ था। पिता सतीश कुमार किसान हैं। खेतीबाड़ी से घर परिवार का खर्च चलता था। स्कूली शिक्षा इन्होंने चंडीगढ़ से पूरी की है। इन्हें पढ़ाई के साथ पिता और चाचा के साथ खेत पर जाकर उनके साथ काम करना पंसद था। बचपन से ही गोलमटोल थे। इसलिए पिता और चाचा इन्हें खेतों में ले जाते थे कि कुछ काम करेंगे तो शरीर ठीक होगा।

ग्यारह साल की उम्र में ही इनका वजन करीब 80 किलो था। वजन से परेशान रहने लगे तो इन्होंने पानीपत स्टेडिमय में दौड़ लगाने की योजना बनाई। स्टेडियम घर से 17 किलोमीटर दूर था और बस से जाने के लिए तीस रुपए किराया लगता था। कई बार किराया बचाने के लिए ये लिफ्ट लेकर स्टेडियम पहुंच कर रनिंग की प्रेक्टिस करते थे। जब ये दौड़ते थे तो स्टेडियम में इन्हें देखने वालों की भीड़ लग जाती थी। उस वक्त लोग इन्हें तूफान कहकर बुलाने लगे थे।

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U-20 प्रतियोगिता में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद नीरज चोपड़ा | Image Source

पंचकुला में बास्केटबॉल खेलने के दौरान इनकी कलाई की हड्डी टूट गई थी जिसके बाद डॉक्टरों ने छह महीने आराम की सलाह दी थी। कलाई टूटने के बाद इन्होंने मान लिया था कि उनका कॅरियर लगभग खत्म हो गया है और ये अब कभी जेवलिन नहीं फेंक पाएंगे। आराम के लिए घर आए तो दो महीने तक अभ्यास एवं एक्सरसाइज बंद होने से इनका वजन 82 से 93 किलो हो गया। कलाई ठीक हुई तो चार महीने तक लगातार एक्सरसाइज की तब जाकर वजन 83 किलो हो सका। इसके बाद अपना वजन संतुलित रखने के लिए लगातार नीरज एक्सरसाइज करते है ।

यह खिलाड़ी खेल के मैदान में उतरता है तो बड़े बड़ों के पसीने छूटने लगते हैं। कहीं इस बार भी कोई नया रिकार्ड न बना दे। बता दे कि नीरज ने पंचकूला सेक्टर 3 ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में एथलेटिक्स की ट्रेनिंग एथलेटिक कोच नसीम अहमद से ली है।

12 फरवरी 2016 को गुवाहाटी में आयोजित साउथ एशियन गेम्स के जेवलिन थ्रो प्रतियोगिता में अंडर 19 आयु वर्ग में 82.23 मीटर का नीरज चोपड़ा ( Neeraj Chopra) ने एक नया रिकार्ड बनाया है। इससे पहले हरियाणा के राजेंद्र ने नेशनल गेम्स में केरला यह रिकार्ड कायम किया था।  नीरज का भाला रिओ ओलंपिक से सिर्फ 90 सेमी दूर रह गया था ।

रोजाना सुबह छह बजे से दस बजे तक एक्सरसाइज के साथ प्रेक्टिस करते हैं। मसल्स की रिकवरी के लिए थोड़ा आराम करते हैं। इसके बाद लंच लेते हैं। शाम चार से आठ बजे तक प्रेक्टिस करते हैं। जिम के साथ मेडिन बॉल और साइड होल्डिंग एक्सरसाइज करते हैं जिससे शरीर मजबूत रहे। खाने में रोटी, हरी सब्जी और खीर लेते हैं। चैंपियनशिप की तैयारी के दौरान प्रोटीन युक्त डाइट अधिक मात्रा में लेते हैं।

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एक इवेंट में अपने कोच के साथ नीरज चोपड़ा | Image Source

नीरज की जेवलिन में दिलचस्पी का भी एक शानदार किस्सा है । पानीपत स्टेडियम में इन्होंने वरिष्ठ जेवलिन (भाला फेंक) खिलाड़ी जयवीर को प्रेक्टिस करते देखा था। धीरे-धीरे इन्हें भी जेवलिन में रुचि हो गई और रोजाना प्रेक्टिस मैच देखने लगे। कुछ दिन बाद ये जयवीर द्वारा फेंके गए जेवलिन को उठाकर लाने का काम करने लगे। इन्हें जब भी मौका मिलता था भाला फेंकने की प्रेक्टिस करने लगे। इनके जेवलिन फेंकने की तकनीक को जयवीर ने देखा और तारीफ करते हुए इस खेल में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। इसके बाद से ही इन्होंने जेवलिन खिलाड़ी बनने के लिए मेहनत शुरू की थी।

हाल ही जर्मनी के ऑफेनबर्ग में आयोजित इंटरनेशनल जेवलिन मीट (भाला फेंक प्रतियोगिता) में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है। मेडल जीतने के बाद कहा है कि मैच में पॉवर और स्पीड में कमी की वजह से गोल्ड से चूक गए। हालांकि प्रेक्टिस जारी है और आने वाले अन्य मैच में ये बेहतर परफॉर्म करेंगे।

Be Positive, नीरज चोपड़ा ( Neeraj Chopra) को कामनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए शुभकामनाए देता है और उम्मीद करता है कि आप पदक जीतकर देश को विश्व-मंच पर गौरान्वित करेंगे ।

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