भारत में क्रिकेट को लेकर एक अलग ही तरह की दीवानगी है क्योंकि क्रिकेट को भारत में एक खेल कम और धर्म ज्यादा मानते है । क्रिकेट के प्रति दीवानगी का यह आलम है कि क्रिकेटर्स को यहाँ भगवान की तरह पूजा जाता है । ग्लैमर और पैसे की बारिश के बीच क्रिकेट को यहाँ बहुत देखा एवं फॉलो किया जाता है । लोग भले ही अपना शर्ट का बटन ठीक से बंद नहीं कर पाते है लेकिन सचिन को स्ट्रैट ड्राइव और कोहली को कवर ड्राइव के टिप्स देने में पीछे नहीं रहते है ।

आज हम बात कर रहे है ऐसे ही एक क्रिकेट के दीवाने की, जो आज क्रिकेट की दुनियां में अपना नाम कमा रहा है और बिना क्रिकेट के प्रोफेशनल अनुभव के बाद भी अपने हुनर का जलवा बिखेर रहा है। इस युवक का जन्म कश्मीर में हुआ और घाटी में तनाव की वजह से उन्हें अपना घर और परिवार की ज़मीन छोड़ कर दिल्ली आना पड़ा । संघर्ष के इस दौर में इनके पिता ने कठिन मेहनत करके घर एवं शिक्षा के लिए जरूरी बंदोबस्त किये । 08 अप्रैल 1986 को जन्मे जतिन सप्रू (Jatin Sapru) आज किसी भी परिचय के मोहताज नहीं है ।

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जतिन के दादा कश्मीर में प्रोफेसर थे और खुशहाली से अपने फार्म हाउस में उनका बचपन बिता लेकिन घाटी में उपजे तनाव ने जतिन के घर की खुशियों की उजाड़ दिया और दिल्ली में अपना नया बसेरा बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा । बचपन में जतिन जेवलिन और शॉट-पुट के साथ ही क्रिकेट खेला करते थे , स्कूली दिनों के दौरान जतिन की खेल में काफी रूचि थी । जतिन ने एक इंटरव्यू में बताया कि ” दिल्ली की भारी गर्मी में क्रिकेट किट लेकर यात्रा करना काफी रोमांचकारी होता था और प्रैक्टिस के बाद सोडा पीने में अलग ही आनंद आता था ।”

जतिन ने अपनी स्कूली शिक्षा रेयान इंटरनेशनल स्कूल से की और पढ़ने में तेज जतिन ने साइंस में बारहवीं तक पढाई पूरी की । इसके बाद पढाई में अपना ध्यान देने के लिए उन्होंने स्पोर्ट्स को इतनी कम उम्र में ही अलविदा कह दिया । जैसा की हर आम भारतीय परिवार सोचता है कि विज्ञान की पढाई के बाद उनका बेटा इंजीनियर बने तो जतिन ने भी एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया । शुरुआती दिनों में जतिन को इंजीनियरिंग ज्यादा समझ नहीं आई तो उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ने के लिए अपने पिता से बात की, जो वाकिया 3 इडियट्स मूवी में माधवन के साथ होता है वैसा ही कुछ जतिन ने भी अपने पापा को मनाया ।

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जतिन ने इंजीनियरिंग छोड़ कर जर्नलिज्म की पढाई करना शुरू किया . जतिन की बचपन से ही हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में अच्छी पकड़ थी जिसका फायदा उन्हें अपनी पढाई और शुरुआती प्रोजेक्ट्स में मिला । जतिन को शुरू से ही साहित्य एवं थिएटर में इंटरेस्ट था और पत्रकारिता में प्रवेश लेने के बाद जतिन को लगा कि उन्हें अपनी ज़िन्दगी में यही करना था ।

जतिन अपनी सफलता के लिए अपनी अच्छी किस्मत को मानते है लेकिन उन्होंने एक-एक चरण में अपनी मेहनत से अपना मुकाम बनाना शुरू किया और यही छोटे-छोटे स्टेप्स आज जतिन की सफलता के मुख्य कारण है। जतिन को शुरुआत से ही खेल में रूचि थी और उनके पिता भी बड़े क्रिकेट फैन थे जिनसे उन्हें क्रिकेट की कई कहानियों के बारे में पता चला और अच्छी अंग्रेजी और हिंदी का श्रेय, जतिन अपनी माँ को देते है ।

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कॉलेज के दौरान ही जतिन ने काम करना शुरू कर दिया था और एक इवेंट मैनेजर के साथ उन्होंने दिल्ली में कई इवेंट्स का आयोजन किया और कॉलेज ख़त्म होने के बाद उन्होंने एक छोटे मीडिया हाउस को ज्वाइन किया क्योंकि वो चाहते थे कि अपने क्षेत्र का पूरा ज्ञान लेना छोटे मीडिया हाउस में आसान है और आपको कई तरह के काम करने और सिखने का मौका मिलता है जो शायद एक बड़े मीडिया हाउस में नहीं मिल सकता ।

पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने टाँगेरिने नाम के मीडिया हाउस में काम करना शुरू किया और शुरुआत में स्पोर्ट्स के आर्टिकल्स लिखना शुरू किया और धीरे-धीरे ऐस्पन क्रिकइंफो में मोबाइल कमेंट्री के साथ ही अन्य मैगज़ीन में भी आर्टिकल लिख रहे थे । तब तक वो महीने के लगभग 6500 रुपये कमा रहे थे और एक अच्छे करियर ऑप्शन को ढूढने के लिए विभिन्न एजुकेशन फेयर के चक्कर लगाना शुरू किया ।

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उन्होंने ESPN टैलेंट हंट शो में हिस्सा लिया और अपनी काबिलियत के दम पर वो उस शो के विनर बने । इसके बाद जतिन ने ESPN के साथ काम करना शुरू किया जो अभी तक बदस्तूर जारी है । शुरुआत में उनका काम सुबह नाश्ते के साथ शुरू होता था जो रात के खाने के साथ खत्म होता और साल के लगभग 10 महीने आपको अलग -अलग जगहों पर यात्रा करनी पड़ती , उसके साथ ही प्रोडक्शन एवं कंटेंट पर भी मेहनत करनी पड़ती ।

उसके बाद जतिन ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और वो अपने प्रोफेशन के बारे में बाते है कि ” मुझे सुबह उठकर अपने पसंदीदा खेल को देखने और उसके बारे में एनालिसिस का मौका मिलता है । साथ ही क्रिकेट के दिग्गजों के साथ बात करना और उनके ज़िन्दगी के अनुभव सुनना बहुत ही दिलचस्प है और इसके साथ ही आपको अपने फेवरेट काम करने के पैसे भी मिलते है ।

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वो अपने पहले इंटरव्यू जो कि उन्होंने 2008 में श्रीलंकाई क्रिकेटर सनथ जयसूर्या का लिया एवं अपने बचपन के आदर्श रहे राहुल द्रविड़ के साथ शो करने को  सबसे बेहतरीन करियर के क्षणों में से एक मानते है । आज भी जतिन लगभग 10 साल के बाद उतनी ही शिद्दत एवं मेहनत के साथ अपने काम को कर रहे है ।

Be Positive जतिन की कठिन मेहनत और कभी न हार मानने के जज्बे को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि आप ऐसे ही आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देते रहेंगे ।

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