देश में रक्षाबंधन के उत्सव की शुरुआत हो चुकी हैं. भाई और बहन के पवित्र रिश्ते को उत्सव के रूप में मनाया जाता हैं. भाई और बहन एक दूसरे के प्रति प्यार और समर्पण का भाव रखते हैं. ऐसी ही एक बहन ने अपने भाई की जान बचाने के लिए अपना लीवर दान कर दिया. डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे लेकिन बहन अपने भाई के साथ खड़ी रही और भाई को मौत के मुंह से खींच कर वापस ले आयी.

मध्यप्रदेश के भोपाल में रहने वाली 41 वर्षीय जाह्नवी दुबे ने अपने छोटे भाई जयेंद्र पाठक को लीवर दान किया. उनका मायका जबलपुर में है. जाह्नवी के छोटे भाई जयेंद्र पाठक बुखार से पीड़ित थे. शुरुआत में डॉक्टरों को बीमारी समझ में नहीं आई तो उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. कई परीक्षणों के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि जयेंद्र का लीवर 90% तक ख़राब हो चुका है. अब उनके बचने की संभावना बहुत कम है. उन्हें दिल्ली ले जाएं और जल्द से जल्द लीवर डोनेट करने की व्यवस्था करें तभी जयेन्द्र बच सकते है.

भाई की बीमारी की बात भोपाल में रहने वाली उसकी बहन जाह्नवी को पता चली तो वो पति प्रवीण दुबे के साथ जबलपुर पहुँच गयी. जाह्नवी के पति प्रवीण ने बताया कि हम लोग जबलपुर को लिए निकले तो पूरे रास्ते में जाह्नवी एक ही बात कह रही थी- मैंने अपने भाई को गोद में खिलाया है, वो मुझसे 15 साल छोटा है उसे किसी कीमत पर जाने नहीं दूंगी. मैं उसे अपना लिवर दूंगी. एयर एंबुलेंस से हम उसे दिल्ली लेकर गए. जाह्नवी भी अपने भाई के साथ दिल्ली चली गई और वहां अपना लीवर डोनेट किया.

प्रवीण आगे बताते हैं कि जाह्नवी की बहादुरी, समर्पण और जीवटता को सलाम है. प्यार तो मैं यूं भी तुम्हें करता था लेकिन अब तुम्हारा स्थान मेरे मन में आदर के सर्वोच्च दर्जे पर रहेगा. ऐसे दौर में जब कुछ लोग सगे भाई को एक पैकेट दूध देने में नाक भौं सिकोड़ते हों, ऐसे में अपने शरीर का अंग काटकर देना, तुम्हारी तरह कोई विरला ही कर सकता है. ईश्वर के प्रसाद के तौर पर तुम मेरे जीवन में आई हो. दीर्घायु रहो, ऐसे ही समर्पण के साथ अपने हर टास्क को पूरा करने का हौसला तुम्हें प्रभु से मिलता रहे. जल्दी पूरी तरह से स्वस्थ्य होकर आओ.

बी पॉजिटिव इंडिया, जान्हवी दुबे के साहस और त्याग को सलाम करता हैं और भाई-बहन में ऐसे ही प्यार बना रहे.

( मीडिया रिपोर्ट्स और प्रवीण दुबे की फेसबुक वाल से साभार )

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