एक नवयुवक जिसे अपने देश की अर्थव्यवस्था के बिगड़े हालात के कारण अपने देश को छोड़ना पड़ा । 16 वर्ष की उम्र में अपनी माँ के साथ 1992 में अमेरिका में प्रतिस्थपित होने का निर्णय किया। एक किराणे की दुकान पर साफ-सफाई का काम करके अपने पेट भरने का काम किया । अमेरिका सरकार द्वारा दिए गए छोटे से घर में अपनी माँ के साथ रहने को मजबूर होना पड़ा और उनके पिता अपने गृह देश में ही रह गए जिसके चलते उनकी माँ को कई छोटे-मोटे काम करके गुजारा करना पड़ा ।

किराणे की दुकान में नौकरी के दौरान ही उन्होंने स्कूल जाने का भी फैसला किया लेकिन किताबी ज्ञान में कम होती दिलचस्पी के कारण उन्होंने बहुत जल्द ही स्कूल भी छोड़ दिया । इसी बीच उन्होंने खुद ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखने का निर्णय लिया लेकिन पैसो की तंगी के चलते किताबे खरीदने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा । इसके लिए उन्होंने पुरानी किताबे खरीदने का फैसला किया और उन्हें पढ़कर वापस वाजिब दामों में बेच देते थे । ऐसी ही कहानी है व्हाट्सएप्प बनाने वाले यूक्रेन में जन्मे और अमेरिका में संघर्ष करने वाले जां कॉम (Jan Koum) की ।

नेटवर्किंग और कंप्यूटर की पढाई खुद से करने के बाद जां कॉम कंप्यूटर में एक्सपर्ट हो गए और एक हैकर नेटवर्किंग ग्रुप से जुड़ने के बाद उन्हें कई काबिल प्रोग्रामर के साथ काम करने का मौका मिला । इसी बीच उन्होंने अपने समय के जबरदस्त सर्च इंजन याहू में नौकरी मिल गयी और इसी नौकरी के दौरान उन्हें एक दोस्त ब्रयान ऐक्टन के रूप में मिला जिसने उनके कठिन समय में बहुत मदद की और आगे जाकर व्हाट्सएप्प कंपनी के सह-संस्थापक बने ।

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व्हाट्सएप्प के संस्थापक सदस्य | Image Source

 

कभी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरे खाने वाले इस व्यक्ति ने एक ऐसी कमाल की एप्लीकेशन बनायीं जिसने लोगों के बातचीत करने के तरीके को बदल दिया । फेसबुक के साथ जुड़ने के बाद भी वाहट्सएप्प की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी । आज भारत की जनसँख्या के बराबर इस एप्लीकेशन के यूजर्स की संख्या है । इनकी बनायीं हुई एप्लीकेशन चलाने में इतनी आसान है कि अनपढ़ भी इसका उपयोग कर सकता है ।

यूनिवर्सिटी में काम करते हुए उन्होंने याहू में नौकरी करना शुरू कर दिया। एक दिन सर्वर में कुछ परेशानी आने पर याहू के फाउंडर फिलो ने कॉम को फोन किया और पूछा कि वह कहां है। कॉम ने जवाब दिया कि मैं क्लास में हूं। फिलो ने कहा तुम क्लास में क्या कर रहे हो? मेरी टीम बेहद छोटी है और यह सर्वर की परेशानी जल्द से जल्द ठीक करनी है। कॉम कहते हैं कि उन्हें पढ़ाई वैसे भी पसंद नहीं थी। उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।

सन 2000 में जब कॉम की मां की मृत्यु हुई वे अचानक बेहद अकेले हो गए। 1997 में पहले ही उनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी। कॉम उस वक्त को याद करते हुए ऐक्टन के लिए शुक्रगुजार महसूस करते हैं। वे कहते हैं कि उस वक्त ऐक्टन ने मेरा बहुत साथ दिया। हम साथ रहते थे। वह मुझे अपने साथ घर ले जाता था। मेरा मन बहलाने के लिए हम सॉकर और फ्रिस्बी खेला करते थे।

2007 में कॉम और ऐक्टन दोनों ने याहू की अपनी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने फेसबुक में नौकरी पाने की कोशिश की पर दोनों नाकाम रहे। फेसबुक में नौकरी नहीं मिलने के बाद एक कॉफी शॉप में बैठ कर कॉम और ऐक्टन दोनों बात करते रहे। उन्होंने सोचा कि यह कितना कूल होगा कि एक ऐप का स्टेटस यह बताए कि आप क्या कर रहे हो। जैसे आप फोन पर हो, बैटरी लो है, जिम में हूं।

वाट्स ऐप का नाम रखे जाने में कोई लिस्ट नहीं थी जो बनी और रिजेक्ट हुई हो। कॉम ने एक बार में ही यह नाम सोच कर तय कर लिया था… ”what’s up” इसके बाद ऐप की कोडिंग के लिए कॉम लगातार काम करते रहे। वे लगातार कोड लिखते रहे। और दुनियाभर के मोबाइल में इस ऐप को सिंक करने की कोशिश करते रहे।

शुरुआत में वॉट्स ऐप लगातार क्रैश या हैंग होता रहा। इसके बाद वे लगातार अपने दोस्तों के फोन में ऐप पर काम करते रहे उनके कॉन्टैक्ट को डाउनलोड करते रहे और यह नोट्स बनाते रहे कि कहां कहां दिक्कते आ रही हैं।

इस बीच एक दिन कंप्यूटर गेम खेलते हुए कॉम ने ऐक्टन से कहा कि हमें फिर से नौकरी की तलाश करनी चहिए। इस पर ऐक्टन ने कॉम को डपटते हुए कहा कि इतना आगे आकर अब अगर तुम इस प्रोजेक्ट को छोड़ दोगे तो यह बड़ी बेवकूफी होगी।

कॉम के अनुसार शुरू में हमने यह नहीं सोचा था कि यह ठीक-ठीक कैसा बनेगा। हमने सोचा था कि कितना मजेदार होगा कि किसी ऐप में जब भी कोई अपना स्टेटस बदलेगा वह उसके पूरे नेटवर्क में चला जाएगा। जैसे.. मैं नहाने जा रहा हूं बाय।

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लेकिन धीरे-धीरे इसमें इंस्टेंट मैसेज जुड़ा। इसके बाद दोनों दोस्तों ने सोचा कि अगर दुनिया भर में काम करने वाला कोई ऐसा ऐप बने जो सभी जगह काम करे और लोग आपस में जुड़ जाएं तो वह बहुत कारगर साबित होगा और ताकतवर भी।

जां कॉम और ब्रायन ऐक्टन ने कॉफी शॉप्स में बैठकर वॉट्स ऐप डेवलप किया। कई साल लगे जब वे लगातार इसी तरह साथ बैठते और काम करते। कुछ ही सालों का समय लगा और वॉट्स ऐप की कीमत कुछ डॉलर से बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। जब फेसबुक ने वॉट्स ऐप को खरीदा तो कंपनी ने उन्हें 4 बिलियन डॉलर कैश दिए बाकी 12 बिलियन डॉलर के कंपनी के शेयर दिए।

जां कॉम कहते हैं कि 2009 में उन्होंने एक ही मिशन से वॉट्स ऐप बनाना शुरू किया था। वे कहते हैं, ” एक ऐसा कूल प्रोडक्ट को दुनिया भर के लोग इस्तेमाल कर सकें। इसके अलावा हमारे लिए और कोई दूसरी बात मायने नहीं रखती थी। हमने फेसबुक से अपनी डील साइन की है और हम कोशिश करेंगे हमारा जो मिशन था वो इसी तरह चलता रहे।

जिस वक्त तक वॉट्स ऐप ने काम करना शुरू किया उस समय फ्री मैसेजिंग के लिए स्काइप, बीबीएम या जीचैट जैसे ऑप्शन थे लेकिन वॉट्स ऐप में खास बात यह भी कि यह मोबाइल नंबर से लॉग इन होता था।

वॉट्स ऐप पर काम करते हुए कॉम और ऐक्टन आपस में एक दूसरे से वॉट्स पर बात करते हुए उसे टेस्ट करते थे। उस वक्त भी वॉट्स ऐप में राइट के दो निशान का मतलब होता था कि मैसेज दूसरे फोन में पहुंच गया है। और ऐक्टन को यह अहसास हुआ कि जिस चीज पर काम कर रहे हैं उसमें कितनी क्षमताएं हैं।

इसके बाद कॉम और ऐक्टन काम करते गए। एक छोटा सा ऑफिस खोला जहां कुछ लोग मिलकर काम करते रहे। कॉम और ऐक्सटन भी कोडिंग पर लगातार काम करते रहे। इसके बाद दोनों के कुछ पुराने साथियों ने वाट्स ऐप पर काम करने के लिए लगभाग 250,000 डॉलर इन्वेस्ट किए।

ये सारे लोग उत्साहित थे क्योंकि वे एक ऐसा फ्री ऐप इस्तेमाल करने वाले थे जिसे दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्हें यह बहुत ही बेहतरीन आइडिया लगा कि एक छोटे से ऐप से इतनी आसानी से दुनिया के किसी भी कोने में बैठा इंसान अपनी कोई भी तस्वीर या वीडियो किसी को इतनी आसानी से भेज सकता है।

शुरुआत में काम करते हुए वॉट्स ऐप के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी लोगों के मोबाइल नंबर पर वेरिफिकेश न कोड भेजने की। जो सर्विस कंपनी लोगों को वेरिफिकेशन कोड भेजती थी वह दुनिया की अलग-अलग जगहों के हिसाब से अलग पैसा लेती थी और यही कॉम के बैंक अकाउंट को सबसे ज्यादा भारी पड़ रहा था। लेकिन गनीमत थी कि 2010 तक आते-आते कंपनी थोड़ा रेवन्यू जनरेट करने लगी।

2011 तक आते आते वॉट्स ऐप ने कई चीजें डेवलप की जिनमें एक दूसरे को फोटो भेजना शामिल था। इंस्टेंट चैट के लिए इस ऐप को इतना ज्यादा पसंद किया जा रहा था कि इसी साल यह ऐप अमरीका के टॉप 20 ऐप में शामिल हो गया।

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व्हाट्सएप्प एप्लीकेशन की एक झलक | Image Source

वॉट्स ऐप की लॉन्चिंग बेहद चुपचाप तरह से हुई। एक स्टाफ मेंबर ने जब कॉम से कहा कि आपने प्रेस या विज्ञापन के लिए किसी को क्यों नहीं बुला या, ये सब थोड़ी धूल झाड़ते और हमारा प्रोडक्ट थोड़ा और चमकता। इस पर कॉम ने बहुत प्रेम से कहा , “हां और वह धूल हमारी ही आंखों में उड़कर जम जातीं और हम अपना काम कभी फोकस के साथ नहीं कर पाते। “

कॉम और ऐक्टन ने शुरुआत से यह बात सोच रखी थी कि वे मीडिया से दूर र हेंगे और उन्हें कोई अपडेट नहीं देंगे। और उन्होंने 2011 में वॉट्स ऐप के वायरल होने के बाद भी मीडिया में इससे जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी। और 2013 में वॉट्स ऐप ने सारी चैट ऐप्स को मात देते हुए मार्केट पर कब्जा जमा लिया और अपने साथ200 मिलियन यानी 20 करोड़ यूजर जोड़ लिए।

ऐप के को-फाउंडर ब्रायन ऐक्टन ने फोर्ब्स को बताया था कि एक दिसंबर 2013 के बाद से हर दिन वॉट्स ऐप में 10 लाख नए लोग लॉग इन कर रहे हैं। ये वही दो दोस्त हैं जो पैसे की कमी के चलते एक वक्त वॉट्स ऐप का काम छोड़कर नौकरी करने की सोच रहे थे। आज ये दोनों दोस्त सिर्फ 55 लोगों की टीम के साथ पूरी दुनिया में वॉट्स ऐप की सर्विस चला रहे हैँ।

एक समय था जब दो दोस्तों ने याहू जैसी एक कंपनी की नौकरी छोड़ दी, यह सोचकर कि अपना कोई काम किया जाए। लेकिन फिर लगा कि बात बन नहीं रही है और फिर नौकरी पकड़ ली जाए। लेकिन दूसरे दोस्त ने पहले को समझाया कि इतनी दूर चलने के बाद मंजिल की आस छोड़नी नहीं चाहिए। और काम चलता रहा। रास्ते में और दोस्तों का भी साथ मिल गया। इस तरह बिना पैसों के प्रयोग के तौर पर शुरु हुआ काम देखते ही देखते लोकप्रिय होने लगा और बाजार में उसकी कीमत बढ़ते बढ़ते अरबों डॉलर की हो गई।

फिर एक वक्त ऐसा भी आया कि कॉम ने 19 बिलियन डॉलर में खुद के बनाया हुए वॉट्स ऐप की डील उसी वेल फेयर के ऑफिस में साइन की जहां वो एक समय राशन कार्ड लेकर खाना जुटाने के लिए खड़े रहते थे। और इसी वेल फेयर ऑफिस के बगल में जां कॉम ने वॉट्स ऐप का हेड ऑफिस बनाया। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि व्हाट्सएप्प की कुल वैल्यू आज यूक्रेन देश की कुल जीडीपी का लगभग 10% है ।

News Source : Amar Ujala & Inc42

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