एक गरीब किसान का बेटा जिसने कड़ी मेहनत और आर्थिक दिक्कतों के बावजूद पढाई पूरी की. अपने परिवार का खर्चा चलाने के लिए रेस्टोरेंट में खाना तक बनाया. निजी स्कूल में शिक्षक की नौकरी के साथ ही ट्यूशन दी लेकिन अपनी पढाई जारी रखी. गरीबी को बहुत नजदीक से झेलने वाले इस शख्स ने गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल खोला जिसके जरिये वो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे है. इस शिक्षक का नाम है जगभान यादव (Jagbhan Yadav).

देश के नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुम्हारी में रहने वाले जगभान यादव वर्त्तमान में सरस्वती ज्ञान मंदिर और उदय कान्वेंट स्कूल के नाम से दो स्कूल चलाते है. इनके संस्थान में शिक्षा के अधिकार के अलावा भी गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाया जाता है.वो न केवल श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते है बल्कि उनके लिए पुस्तके, गणवेश एवं जुत्तों की भी व्यवस्था करते है. पिछले वर्ष उन्होंने 24 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाया था और इस बार वो 30 बच्चों को मुफ्त में पढ़ाएंगे.

बी पॉजिटिव मीडिया से खास बातचीत में जगभान यादव ने बताया कि यह संख्या अगले कुछ वर्षों में और भी बढ़ेगी. कुम्हारी और इसके आसपास के क्षेत्र में श्रमिक परिवार ज्यादा रहते है और उनका शिक्षा स्तर न के बराबर है. कम आया और शराब की लत के चलते अधिकांश परिवार गरीबी में जीने को मजबूर है जिसके चलते उनके बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित यह जाते है.

Jagbhan yadav
बच्चों के साथ जगभान यादव

हमने स्कूल के माध्यम से ऐसे ही परिवारों के बच्चों को चिन्हित करके उन्हें मुफ्त में पढ़ाने का काम शुरू किया है, मैंने खुद ने भी ज़िन्दगी में कई तकलीफे झेली है और शिक्षा ही इन समस्याओं का एकमात्र उपाय लगता है.

जगभान यादव मुलत: मध्यप्रदेश के सतना जिले से है लेकिन निजी शिक्षण संस्थानों में काम करते हुए वो कुम्हारी आ पहुंचे. इसके बाद गरीब बच्चों को कम पैसे में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए ब्याज देकर पैसे उधार लिए और अपना शिक्षण संस्थान खोला.

शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद करते हुए जगभान यादव बताते है कि “पैसो की कमी के चलते मैंने कही पर विज्ञापन नहीं दिया. घर-घर जाकर लोगों से बातचीत की और उन्हें अपने बच्चों को मेरी स्कूल में दाखिला करवाने के लिए प्रेरित किया.

शुरुआती संघर्ष के बाद अच्छी शिक्षा के चलते स्कूल का इलाके में नाम हो गया लेकिन मैंने पैसे कमाने के बजाय गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने की योजना पर काम किया. पिछले सत्र में यह संख्या 24 थी और इस सत्र में यह 30 होगी तथा मेरा लक्ष्य इसे 100 तक पहुंचाने का है.

Jagbhan yadav
बच्चों के साथ जगभान यादव

शिक्षा के बाज़ारीकरण के दौर में जगभान यादव की पहल वाकई शानदार है. जगभान यादव अपने स्कूल के साथ ही कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए है और सामजिक परिवर्तनों में अपनी भूमिका अदा कर रहे है. उन्होंने महिला दिवस के अवसर पर गरीब महिलाए जो अपना घर पेट्रोल पंप या टोल बूथ पर काम करके चला रही है, को सम्मानित किया.

बी पॉजिटिव, जगभान यादव की सकारात्मक सोच एवं शिक्षा के प्रति किये गए कार्यों को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर हमारे पाठक भी जीवन में सकारात्मक करेंगे.

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