भारत में कई ऐसे लोग है जो दिन में एक समय का ही भोजन कर पाते है लेकिन देश में खाना और खाने के सामान को फेंकने के मामले में भी हमारा कोई जवाब नहीं है. लेकिन अगर बात किसी फंक्शन या उत्सव की होती है तो खाना फेंकने में हमारा कोई सानी नहीं है.

देश में कई संस्थाए है जो शादी या शुभ अवसरों से बचे हुए खाने को जरूरतमंदो तक पहुंचा रही है लेकिन चेन्नई की एक डॉक्टर के आईडिया ने इस मुहीम की तस्वीर ही बदल दी.

इस आईडिया से न केवल भूखों को खाना मिल रहा है बल्कि लोग खाने के साथ ही कपड़े और अन्य जरूरतमंद चीज़े भी दान कर रहे है. कम्युनिटी फ्रिज नाम से चल रही मुहिम में लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे है. इस सकारात्मक पहल की शुरुआत की है डॉक्टर ईशा फातिमा (Dr. Issa Fathima) ने. वो पेशे से एक डेंटल सर्जन हैं.

कम्युनिटी फ्रिज से कई लोगो की मदद हो रही है | तस्वीर साभार : नवभारत टाइम्स

शुरुआत में उन्होंने चेन्नई से पब्लिक फ्रिज लगाकर की. इसके बाद यह पहल बेंगलुरु तक पहुँच चुकी है. यहां जरूरतमंद लोगों की भूख मिटाने के लिए पब्लिक फ्रिज लगाया गया है. लोग इसमें खाना रख जाते हैं. जरूरतमंदों का पेट भरता है.

कहते है हर बड़े परिवर्तन की शुरुआत घर से होती है तो ईशा फातिमा शुरुआत में अपने घर के पास रह रहे मजदूर परिवार को बचा हुआ खाना दे देती थीं. कुछ समय के बाद मजदूर परिवार वहां से चला गया तो ईशा खाना गाड़ी में रखकर ले जाती और आसपास के जरूरतमंदों को देती थीं.

इसके बाद उन्होंने पब्लिक फ्रिज के आइडिया पर काम करना शुरू किया. इस आईडिया को मूर्त रूप देने के लिए उन्होंने पब्लिक फाउंडेशन की शुरुआत की और इसके तहत कई जगह पर पब्लिक फ्रिज लगाए गए.

कम्युनिटी फ्रिज के पास चौकीदार भी तैनात किया जाता है | तस्वीर साभार : नवभारत टाइम्स

इस आईडिया को सही चलाने के लिए कुछ नियम भी बनाए. सफाई पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. इसके साथ फूड पैकेट पर एक्सपायरी डेट भी लिखनी होती है. खाने की ताजगी का पूरा ध्यान रखा जाता है. यहां तक कि इस फ्रिज के पास एक चौकीदार भी तैनात किया गया है. संस्था को कई गैरसरकारी संस्थाओं ने फंडिंग दी है जिससे यह संस्था अपनी पहुँच बढ़ा रही है.

इस पब्लिक फ्रिज से जरूरतमंद कभी भी खाना निकाल सकते हैं. बस नियमों का ध्यान रखना होता है. मसलन लाइन ना तोड़ना और खाने की कम बर्बादी करना. इतना ही नहीं, अब इस पब्लिक फ्रिज के बगल में पुराने कपड़े, किताबें, खिलौने और जूते भी देने की व्यवस्था है.

बी पॉजिटिव, डॉ. ईशा फातिमा के अभिनव प्रयोग को सलाम करता है. उम्मीद करता है कि डॉ ईशा फातिमा के आंदोलन से किसी भी जरूरतमंद को भूखा नहीं सोना पड़ेगा.

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