भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने कुछ दिनों पहले पीएसएलवी सी-40 के जरिये एक साथ 31 उपग्रह लांच किये। इनमें तीन भारतीय और 28 छह अन्य देशों से हैं। इसके साथ ही इसरो का सैटेलाइट भेजने का शतक पूरा हो गया है। इस तरह अंतरिक्ष में यह भारत की एक बड़ी छलांग है। जिस पीएसएलवी सी-40 के जरिये एक साथ 31 उपग्रह लांच किये उसके पीछे तमिलनाडु के एक छोटे से गांव के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति का दिमाग एवं मेहनत है । इसी धैर्य और सच्ची लगन के धनी को अब इसरो का चेयरमैन बनाया गया है , इस अंतरिक्ष वैज्ञानिक का नाम है – के सिवन ( K Sivan or Dr Kailasavadivoo Sivan)।

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राकेट निर्माण में किये गए महत्वपूर्ण कार्यों के कारण पुरे इसरो में “राकेट मैन” के नाम से प्रसिद्ध  के सिवन ( K Sivan),  12 जनवरी 2015 से इस पद पर काबिज डॉ. ए.एस.किरण कुमार ( Dr A. S. Kiran Kumar ) का स्थान लेंगे। मंत्रिमंडल की नियुक्ति संबंधी समिति ने बुधवार को उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी एक आदेश के मुताबिक मंत्रिमंडल की नियुक्ति संबंधी समिति ने अंतरिक्ष विभाग में सचिव पद और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। सिवन वर्तमान में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में निदेशक हैं।

सिवन को जब इसरो अध्यक्ष की नियुक्ति की खबर मिली, तब वह 12 जनवरी को लॉन्च होने वाले पीएसएलवी सी-40 की समीक्षा बैठक कर रहे थे। इस मिशन में पांच भारतीय सहित 31 उपग्रहों को प्रक्षेपण किया जाना है। यह अहम मिशन है, क्योंकि इसके जरिये भारत कक्षा में अपना 100वां उपग्रह प्रक्षेपित करेगा।

सिवन ने बताया, इस खबर को सुनने के बाद भी शरीर में कंपन हो रही है। मैं एक बात जानता हूं, इस पद पर विक्रम साराभाई, सतीश धवन,माधवन नायर जैसे महान लोग रहे। इसलिए यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। 12 जनवरी की लांचिंग सहित कई मिशन कतार में है। इसलिए जश्न का नहीं जिम्मेदारी का वक्त है।

पिछले साल भारत ने एक साथ 104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर नया कीर्तिमान स्थापित करने के साथ-साथ दुनिया में अपनी तकनीकी कुशलता का लोहा मनवाया था। लेकिन इस उपलब्धि में सिवन की अहम भूमिका रही। वह उन अहम लोगों में थे, जिन्होंने इस मिशन की तकनीकी परेशानियां दूर की।

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K Sivan का जन्म तमिलनाडु के तटीय जिले नागरकोइल के एक छोटे से गांव में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती पढाई गांव के ही सरकारी विद्यालय में तमिल भाषा में पूरी की लेकिन अपनी प्रतिभा के दम पर उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का अवसर ले लिया उन्होंने 1980 में IIT मद्रास से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक, 1982 में IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर, 2006 में IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से पीएचडी की डिग्री ली। के सिवन वर्ष 1982 में इसरो में आये और पीएसएलवी परियोजना पर उन्होंने काम किया। उन्होंने एंड टू एंड मिशन प्लानिंग, मिशन डिजाइन, मिशन इंटीग्रेशन ऐंड एनालिसिस में काफी योगदान दिया।

इन्हें 6D ट्रैजेक्टरी सिमुलेशन सॉफ्टवेयर के मुख्य विशेषज्ञ के तौर पर जाना जाता है। इसकी मदद से रॉकेट के लांच से पहले रास्ता निर्धारित किया जाता है। 2011 में वह जीएसएलवी परियोजना से जुड़े । वह इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया में फेलो हैं। कई जर्नल्स में उनके पेपर प्रकाशित हुए हैं।

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उन्हें कई अवार्ड मिल चुके हैं, इसमें चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से अप्रैल 2014 में डॉक्टर ऑफ साइंस, 2011 में डॉ बीरेन रॉय स्पेस साइंस अवॉर्ड और वर्ष 1999 में डॉ विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड सहित कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

एक छोटे से गांव से किसान परिवार से निकल कर भारत की विश्व-प्रसिद्ध अंतरिक्ष एजेंसी के चेयरमैन का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा है लेकिन उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी धाक कायम करने के बाद इस पद के लायक बने है । अपने तीन दशक से लम्बे करियर के दौरान उन्होंने कई उतार-चढाव देखे है लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य जो कि भारत को विश्व मानचित्र पर स्थापित करना था , के लिए हमेशा प्रयासरत रहे है ।

Be Positive,  के सिवन ( K Sivan) की उपलब्धि पर गर्व महसूस करता है तथा उम्मीद करता है कि आपके नेतृत्व में इसरो कई नयी बुलंदियों को छुएगा ।

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