जो अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते है, वो ही अक्सर मंजिल तक पहुँचते है.

यह पंक्तियाँ इस युवा IPS अफसर के लिए सटीक बैठती है. अपने गांव में कलेक्टर के दौरे ने उन्हें IAS अफसर बनने के लिए प्रेरित किया. गुजराती माध्यम से अपनी शुरुआती शिक्षा ग्रहण की लेकिन यूपीएससी के इंटरव्यू के लिए अंग्रेजी भाषा का चयन किया.

कड़ी मेहनत से अपनी मंजिल के रास्तें में आने वाले हर संघर्ष का डट कर मुकाबला किया और 22 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्लियर करके देश के सबसे युवा आईपीएस अफसर बन गए. हाथों में पड़े छालों से अपनी किस्मत लिखने वाले इस अफसर का नाम है : IPS सफीन हसन (IPS Safin Hasan).

हसन गुजरात के पालनपुर जिले के कनोदर गांव से आते है. उनके माता-पिता छोटे-मोटे काम करकर परिवार का गुजारा करते है. उन्होंने अपनी शुरुआती पढाई गांव के ही सरकारी विद्यालय से गुजराती माध्यम से पूरी की. पढ़ने में तेज हसन का चयन सूरत के प्रतिष्ठित कॉलेज SVNIT में इंजीनियरिंग के लिए हो गया.

कॉलेज की पढाई ख़त्म होने के बाद उन्होंने दिल्ली आने का प्लान बनाया लेकिन पैसो की कमी से कदम ठिठकने लगे तो व्यापारी ने मदद के लिए हाथ बढ़ाये. हसन ने एक साल की तैयारी में ही UPSC क्लियर कर लिया और IPS चुन लिए गए. उनका सपना आईएएस अफसर बनने का है और उसके लिए वो प्रयासरत है.

अभी तक जो भी आपने पढ़ा वो हसन की ज़िन्दगी का एक पक्ष है. परिवार में केवल इतनी ही कमाई होती थी कि जैसे-तैसे गुजारा हो जाए. कभी-कभी खाली पेट भी सोना पड़ता. माँ और पिता हीरे की फैक्ट्री में काम करते लेकिन ज्यादा कमाई नहीं हो पाती. इसके चलते उनकी माँ नसीमबानू ने शादी एवं पार्टियों में रोटियां बनाने का काम भी किया लेकिन अपने बच्चों की जरूरते पूरी की.

एक इंटरव्यू में हसन बताते है कि मेरी माँ ने रोटियां सेंकते हुए जो पसीने की बुँदे बहाई है, वही मेरे लिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही. समाज के कई लोगों ने मेरा सहयोग किया है. एक व्यवसायी ने मुझे दिल्ली में पढ़ने के लिए 3.5 लाख रुपये की सहायता की जिससे मेरी कोचिंग सुचारु रूप से चल सकी. स्कूल की प्रिंसिपल ने मेरे ट्यूशन फी और अन्य खर्चों के लिए 80,000 रूपए की मदद की.

परीक्षा पास करने के लिए न केवल मैंने बल्कि मुझसे जुड़े हर व्यक्ति ने मेहनत की है. अब मेरा सपना है कि मैं अपने गांव में एक शानदार रेजिडेंशियल स्कूल खोल पाऊ जिसमे गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.

संघर्षो को याद करते हुए हसन कहते है कि संघर्ष और मेरा चोली दामन का साथ रहा. यूपीएससी के पेपर के दौरान एक्सीडेंट हुआ लेकिन पेपर दिया और उसके बाद अस्पताल में भर्ती हुआ. मैन्स एग्जाम के बाद बीमार पड़ा और बिना कोई तैयारी के इंटरव्यू के लिए पहुंचा और देश में इंटरव्यू में मैंने दूसरे सबसे ज्यादा मार्क्स हासिल किये.

साथी यूपीएससी प्रतिभागियों के लिए हसन कहते है कि जब मुसीबते आती है तभी तक़दीर चमकती है. मुसीबतो से घबराकर वापस लौटने के बजाय कड़ी मेहनत से आगे बढ़ाना चाहिए. नयी चीज़े सिंखने के लिए तत्पर रहना चाहिए और पहले दिन से ही तैयारी के साथ IAS का एटीट्यूड रखना बहुत जरूरी है.

बी पॉजिटिव, IPS सफीन हसन को यूपीएससी क्लियर करने के लिए शुभकामनाए देता है. उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर के हमारे पाठक भी जीवन में अच्छा करेंगे.

Disclaimer : यह कहानी इंटरनेट पर रिसर्च पर आधारित है. बी पॉजिटिव किसी भी तथ्य या जानकरी की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. हमारा उद्देश्य किसी की मानहानि करना नहीं है.

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