Inspiring Story of Wrestler Kavita Goswami

हिम्मत हारने वालों को कुछ नहीं मिलता जिंदगी में, मुश्किलों से लड़ने वालों के पैरों में जहां होता है. यह पंक्तियाँ अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी और उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में तैनात कविता गोस्वामी ( Wrestler Kavita Goswami ) पर ठीक बैठती है.

अगर आपको लगता है कि आपके जीवन में बहुत परेशानियाँ हो तो कविता की कहानी एक बार पढ़िए . इसके बाद आपका जीवन के प्रति नजरिया बदल जायेगा.

कविता गोस्वामी ( Wrestler Kavita Goswami ) अभी पुलिस विभाग के साथ काम कर रही है और पुलिस विभाग के खेलों में अपना जलवा बिखेर रही है. इससे पहले उन्होंने एक निजी स्कूल में खेल प्रशिक्षक के रूप में काम किया. उन्होंने कई वर्षों बाद कुश्ती का अभ्यास शुरू किया है.

अब सीनियर नेशनल गेम्स में जलवा बिखेरने के लिए तैयार है. उससे पहले उन्होंने नेशनल लेवल पर कुश्ती में कई पदक जीते है. इसी के साथ उन्होंने एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधत्व करते हुए ब्रोंज मैडल भी जीता.

आपको लग रहा होगा कि कविता गोस्वामी की ज़िन्दगी तो शानदार है. पुलिस विभाग की नौकरी के साथ कुश्ती में देश का प्रतिनिधत्व किया है. लेकिन कविता गोस्वामी की ज़िन्दगी आसान लग रही है, उतनी दरअसल थी नहीं.

 Wrestler Kavita Goswami with medals
मैडल के साथ कविता गोस्वामी । तस्वीर साभार : अमर उजाला

कविता गोस्वामी का जन्म हरियाणा में हुआ था लेकिन दस वर्ष की उम्र में उनके पिता उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर आ गए. बचपन से ही कुश्ती में दिलचस्पी रखने वाली कविता ने जूनियर स्तर पर अपनी छाप छोड़ना शुरू कर दिया.

इसके बाद नेशनल और अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधत्व किया. इसी बीच उन्हें चोट के चलते कुश्ती के खेल को छोड़ना पड़ा.

यही से कविता की ज़िन्दगी में बदलाव आने शुरू हो गए. एक-दो वर्ष इलाज के बाद जब उन्हें लगा कि वो अब वापस कुश्ती नहीं खेल पायेगी तो उनके पिता ने उनकी 21 वर्ष की उम्र में शादी कर ली. शादी के बाद लगा कि ज़िन्दगी अब बदल जाएगी लेकिन ज़िन्दगी स्वर्ग की जगह नर्क बन गयी.

उनके पति जयपुर में नौकरी करते थे और साल में एक या दो बार ही अपने घर आते थे. ससुराल वालों की जबरदस्ती के बाद कविता भी जयपुर शिफ्ट हो गयी. जब वो जयपुर आयी तो उनके गर्भ में एक बचा पल रहा था.

 Wrestler Kavita Goswami childhood photos
कविता गोस्वामी की बचपन की कुछ झलकियां । तस्वीर साभार : अमर उजाला

एक-दो महीने में ही उन्हें पता चला कि उनके पति ने दूसरी शादी कर रखी है. इसके बाद उन पर अत्याचार शुरू हो गए. न वक्त पर खाना और न ही कोई सुविधा. अनजान सी जगह में कविता को रखा गया.

पड़ौसियों की मदद से कविता अपने पति के चंगुल से बच निकली और अपने पिता के घर आ गयी. उन्होंने उसके बाद एक बच्चे को जन्म दिया लेकिन कुछ महीनो बाद ही उनका एक एक्सीडेंट हो गया. शरीर पर कई चोंटे और फ्रैक्चर का दर्द सहन करना पड़ा. लेकिन कविता ने हार मानने के बजाय ज़िन्दगी से लड़ना जारी रखा.

इसी बीच उन्होंने अपने पति से तलाक लिया और खुद अपने पैरो पर खड़े होने का फैसला किया. कविता ने खेलों के साथ ही पढाई को भी महत्त्व दिया और बीपीएड की पढाई की थी.

 Wrestler Kavita Goswami at Practice
कुश्ती के अभ्यास के बाद कविता गोस्वामी। तस्वीर साभार : अमर उजाला

इस मुसीबत के समय में अपने परिवार वालों और दोस्तों के साथ ही पढाई भी काम आयी. उन्होंने एक निजी संस्थान में खेल प्रशिक्षक के रूप में काम करना शुरू किया.

नौकरी के दौरान उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए भी आवेदन किया. उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में उन्हें सिपाही के रूप में नौकरी मिल गयी. कविता चाहती तो यहाँ रूक सकती थी लेकिन उन्होंने वापस से कुश्ती खेलने का निर्णय किया. इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग की खेलकूद प्रतियोगिता में कई पदक जीते और अब वो राष्ट्रीय पटल पर छा जाने के लिए तैयार है.

कविता की कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो घरेलू हिंसा का दंश झेल रही है. इसी के साथ उन खिलाड़ियों के लिए भी जिनका करियर चोट के चलते ख़त्म हो जाता है. अगर आपको भी लगता है कि आपका जीवन बड़ा मुश्किल है तो कविता गोस्वामी की कहानी एक बार फिर पढ़ लीजिये.

स्टोरी साभार : अमर उजाला

Comments

comments