परीक्षा और परिणाम के दौर में लड़कियां हर क्षेत्र में बाजी मार रही है. बोर्ड रिजल्ट्स से लेकर यूपीएससी के रिजल्ट तक लड़कियां टॉपर बन रही है. यह परिणाम देश की उस मानसिकता पर कुठाराघात करते है जिसमें बेटे की छह में बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है. मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से एक खबर आयी है जो पुरे देश के लोगो तक पहुचनी चाहिए. इंदौर में सफाई का काम करने वाले माता-पिता ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए. Indore girl rohini got 1 crore scholarship

बेटी ने भी अपने माँ-बाप के संघर्ष को मंजिल तक पहुंचाते हुए स्कॉटलैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए प्रवेश मिला. पढाई के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ की स्कालरशिप दी.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर की महिला सफाईकर्मी नूतन घावरी की बेटी रोहिणी को प्रदेश सरकार के अनुसूचित जनजाति विभाग ने एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप दी है. मार्केटिंग में एमबीए कर चुकी रोहिणी अब पीएचडी के लिए स्कॉटलैंड जाएंगी. रोहिणी की मां नूतन कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल में सफाईकर्मी हैं. Indore girl rohini got 1 crore scholarship

नूतन बताती हैं, ‘मैं दस साल तक रोहिणी को अपने साथ ही ड्यूटी पर ले जाती थी, लेकिन उसका मन तो पढ़ाई-लिखाई में ही लगता था. उसने आगे पढ़ने की इच्छा जताई तो हम भी मना नहीं कर पाए. गहने गिरवी रखकर उसे पढ़ाया. गहने आज भी गिरवी रखा हुआ है.

रोहिणी ने बताया कि मैं जब भी परिवार के साथ किसी शादी समारोह में जाती थी, तो लोग पापा को ताने मारते हुए कहते थे कि बेटी बड़ी हो गई है. हाथ पीले कर दो नहीं तो अच्छा लड़का नही मिलेगा. अब वे लोग ही पापा को बधाई देते हैं और अपने बच्चों को मेरा उदाहरण देते हैं. पढाई के बाद मैं अपनी माँ के गहने गिरवी से मुक्त करवाउंगी.

राेहिणी वालीबाॅल की राष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं. उसकी दो बहनें- कोमल, अश्विनी, एक भाई हर्ष है. कोमल नीट क्वालिफाई हैं. अश्विनी 12वीं में है और वह भी स्टेट लेवल की वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं. भाई हर्ष नेशलन अंडर 14 बास्केटबाॅल टीम का कप्तान है.

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