भारतीय खेल जगत पिछले कुछ सालों में बड़े बदलाव के दौर से गुजरा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्रिकेट के दीवाने इस देश ने विश्व स्तर पर अन्य खेलों में भी अद्भुत सफलताएं हासिल कीं। अब इन सफलताओं की फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है और ये नाम एक ऐसे खेल से संबंधित है जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना भी की थी।

दक्षिण कोरिया के इंचियोन शहर में 2014 में आयोजित एशियन गेम्स में अमृतसर की खुशबीर कौर ( Khushbir Kaur ) ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया था । ये मेडल एक ऐसे खेल में मिला जिसके बारे में अंदाज लगाना भी मुश्किल था। ये खेल है ’20 किलोमीटर रेस वॉक’।  रेसवॉकिंग के लिए गजब की निष्ठा और कर्मठता की आवश्यकता होती है।  20 किमी की रेस में किसी भी समय आपका दोनों पैर हवा में नहीं होना चाहिए, ऐसा होने पर यह रनिंग की कैटेगरी में आ जाता है और प्रतिभागी को डिसक्वालिफाई कर दिया जाता है । 

खुशबीर इस प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतकर ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनी। अमृतसर की 24 वर्षीय इस भारतीय इस सफलता के दौरान 1:33:07 का समय दर्ज किया जिसके साथ उन्होंने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बना डाला।

khushbir-kaur-with-her-mother
मैडल जीतने के बाद अपनी माँ के साथ खुशबीर कौर | Image Source

इस तरह अपना करियर शुरू करने वाली खुशबीर कौर एथलेटिक्स में भारतीय उम्मीद बन कर उभरी है । साल 2014 उनके लिए बहुत अच्छा रहा क्योंकि हर टूर्नामेंट में वें अपना नेशनल रिकॉर्ड और अच्छा करते जाती रहीं। मार्च में हुए एशियाई वाकिंग रेस चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर नेशनल रिकॉर्ड कम किया। इसके दो महीने बाद टाईचांग में हुए वर्ल्ड रेस वाकिंग चैंपियनशिप में वापस नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया।

खुशबीर की मेहनत, लगन और बुद्धि ने उन्हें आज इस काबिल बनाया है। इसलिए सभी को उनसे कामनवेल्थ गेम्स -2018 में पदक की उम्मीद हैं। उनके कोच को भी अपने स्टूडेंट से काफी अपेक्षा है और वें खुशबीर की बहुत तारीफ करते हैं।

वैसे मुश्किलों का सामना करना उन्हें अच्छे से आता है इसलिए उन्हें पछाड़ना कोई आसान काम नहीं है। खुशबीर का जन्म पंजाब के अमृतसर के करीब छोटे से शहर रसुलपुर कलां में 9 जुलाई 1993 में हुआ था । सामान्य परिवार से आने वाली इस खिलाड़ी का बचपन बहुत मुश्किलों से बिता लेकिन इन्ही अभावों एवं संघर्षों ने खुशबीर कौर को मानसिक रूप से मजबूत बनाया ।

सात साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया और फिर परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी उनके माँ के कन्धों पर आ गयी। इस मुश्किल परिस्थिति ने उन्हें और मजबूत बना दिया। साल 2008 के जूनियर नेशनल्स में इस युवा खिलाड़ी ने बिना जूते पहने रेस में हिस्सा लिया, क्योंकि वें जूते खरीदने में असक्षम थी।

लेकिन कई मुश्किलों का सामना करने के बाद भी खुशबीर की माँ ने ही उन्हें खेल में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन दिया। उनकी काबिलियत पहचानने में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगा। खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद भारत सरकार ने 2017 में खेलों के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड देकर सम्मानित किया है ।

khushbir-kaur-arjuna-award
भारत के राष्ट्रपति से अर्जुन अवार्ड लेती खुशबीर कौर | Image Source

खुशबीर का करियर अभी तक उतार-चढ़ाव वाला रहा है क्योंकि एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें रिओ ओलिंपिक में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला लेकिन ख़राब प्रदर्शन की वजह से उन्हें पदक नहीं मिल सका । उनका यह सिलसिला 2017 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी रहा लेकिन खुशबीर कौर ने निराश होने के बजाय अपना पूरा ध्यान कामनवेल्थ गेम्स पर केंद्रित कर रखा है और इन खेलों में मिला पदक खुशबीर को वापस भारतीय एथेलटिक्स पटल पर स्थापित कर देगा ।

एंग्लियन मैडल-हंट कंपनी उनको आर्थिक रूप से मदद करती है और अगले महीने होने वाले कामनवेल्थ गेम्स में उनसे पदक की उम्मीद पुरे भारत को रहेगी । Be Positive,  खुशबीर कौर को कामनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए शुभकामनाए देता है और उम्मीद करता है कि आप पदक जीतकर देश को विश्व-मंच पर गौरान्वित करेंगे ।

कामनवेल्थ गेम्स – 2018  के अन्य भारतीय प्रतिभागियों के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करे !

Comments

comments