मुंबई के उप-महानगरीय इलाके में एक बच्चे का जन्म होता है और उसके 10 साल बाद उसकी मां का देहांत हो जाता है लेकिन उसके पिता जो एक छोटी सी कपडे की दुकान चलते है,  ने उस बच्चे की परवरिश में कोई कमी नहीं रखते है और नन्हे से उस बच्चे में ईश्वर ने गजब की प्रतिभा दी है और अपने स्कूली क्रिकेट के दिनों में ही उन्होंने क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर(Sachin Tendulkar) के रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया । अभी जल्दबाजी होगी कि वो अपने क्रिकेट करियर में कितने रिकॉर्ड तोड़ेगा लेकिन उसने इतनी कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लौहा मनवा लिया और आज वो अंडर – 19 भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान है तथा अभी U 19 वर्ल्ड कप में अपना जलवा बिखेर रहे है , उस प्रतिभा का नाम है : पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw)

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टीम इंडिया के बने कप्तान

लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे पृथ्वी को बहुत जल्द ही इंडिया टीम की जर्सी में खेलने का मौका मिल गया तथा अंडर – 19 टीम में उनका चयन हो गया । इंडिया अंडर – 19 की ओर से अपना पांचवा मैच खेलते हुए 6 February 2017 को Prithvi Shaw ने पहला अंडर 19 लेवल का शतक बनाया। नवंबर 2017-18 के रणजी ट्राफी टूर्नामेंट में Prithvi Shaw ने मुंबई की ओर से खेलते हुए दो लगातार शतक ठोंके। यह उनका अब तक खेले कए सभी पांच प्रथम श्रेणी मेचों में कुल चौथा शतक था।

Prithvi Shaw
शतक बनाने के बाद दर्शकों का अभिवादन करते पृथ्वी शॉ

3 दिसंबर 2017 को Prithvi Shaw को भारतीय क्रिकेट प्रबंधन की ओर से एक और अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें 13 जनवरी 2018 से न्यूजीलैंड में शुरू होे रहे आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए 15 सदस्यीय भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत इस टूर्नामेंट को 3 बार जीत चुका है और सर्वाधिक बार इस टूर्नामेंट जीतने वाली टीमों में आॅस्ट्रेलिया के साथ पहले नंबर पर है। टूर्नामेंट में दुनिया भर की कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं।

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रणजी ट्रॉफी में शानदार आगाज

पृथ्वी ने इसी साल मुंबई रणजी टीम में पर्दापण किया और सचिन तेंदुलकर के कदमों पर चलते हुए अपने पहले ही मैच में शतक बना दिया । मुंबई रणजी टीम में ओपनिंग बैट्समैन के रूप में खेलते हुए इन्होने इस रणजी सीजन में 6 मैचों में 3 शतकों की मदद से 537 रन बनाये जिनमे तमिलनाडु के खिलाफ पहले मैच में बनाये 123 रन भी शामिल है । 18 साल के इस बल्लेबाज ने सभी को अपनी बैटिंग से रोमांचित किया है और उनमे सचिन की झलक भी मिलती है ।

Prithvi Shaw
शतक बनाने के बाद दर्शकों का अभिवादन करते पृथ्वी शॉ

लेकिन संघर्षमय रहा बचपन

पृथ्वी का जन्म 9 नवंबर 1999 को मुंबई के उपनगरीय इलाके ठाणे में पंकज शॉ के घर पर हुआ । तीन वर्ष की छोटी उम्र में ही उनके पिता ने उन्हें विरार ​क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन करा दी थी। पृथ्वी जब सिर्फ 10 साल के थे, तो इनकी मां का निधन हो गया। पिता ने अकेले Prithvi Shaw की परवरिश की। बेटे का क्रिकेट प्रशिक्षण बाधित न होने पाए, इसके लिए इनके पिता ने अपना बिजनेस भी छोड़ दिया। अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए वो मुंबई चले आये और पूरी मेहनत से अपने बेटे के सपने पुरे करने के लिए स्वयं के सपनों को भुला दिया ।

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क्लब स्तर पर Prithvi Shaw मुंबई के मिडिल इनकम ग्रुप (MIG) की ओर से खेलते हैं। क्रिकेट पर बनी डॉक्युमेंटरी ​फिल्म Beyond All Boundaries में वे प्रमुख किरदार के रूप में थे। उन्हें अपनी क्रिकेट स्किल को निखारने के लिए दो बार इंग्लैंड भेजा जा चुका है। Prithvi Shaw के टैलेंट को देखते हुए खेल सामान बनाने वाली कंपनी एसजी ग्रुप की ओर से उन्हें 36 लाख रुपए का विज्ञापन अनुबंध भी मिला है।

स्कूली क्रिकेट में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

Prithvi Shaw पहली बार तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे, ​जबकि नवंबर 2013 में उन्होंने हैरिस शील्ड एलीट डिवीजन के एक मैच में 546 रन बना डाले थे। ये पिछले 100 साल में ​किसी संगठित टूर्नामेंट में किसी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वश्रेष्ठ स्कोर था। हालांकि उनका यह रिकार्ड जनवरी 2016 में महाराष्ट्र के प्रणव धनावड़े ने तोड़ दिया।

अपने शुरुआती दिनों में ही पृथ्वी ने स्कूली क्रिकेट में मिले मौकों को भुनाना शुरू कर दिया और आगे से नेतृत्व करने की खासियत से Prithvi Shaw ने दो बार (2012 और 2013 में) हैरिस शील्ड ट्रॉफी में Rizvi Springfield High School की कप्तानी की। 2012 के सत्र में उन्होंने सेमीफाइनल में 155 रन और फाइनल में 174 रन बनाकर अपनी प्रतिभा साबित की। यहीं वे मुंबई के प्रतिष्ठित Middle Income Group (MIG) Cricket Club से जुड़ गए। यह वही क्लब है जहां सचिन तेंदुलकर के बेट अर्जुन तेंदुलकर भी ट्रेनिंग ले रहे थे। यहां राजीव पाठक उनके कोच थे। अर्जुन और पृथ्वी ने मिलकर क्रिकेट की बारीकियां सीखी और उनके क्लब को कई मैच दोनों ने मिलकर जिताये ।

prtihvi shaw
शतक बनाने के बाद दर्शकों का अभिवादन करते पृथ्वी शॉ

पृथ्वी ने स्कूली क्रिकेट में कई रिकॉर्ड तोड़े जिनसे वो रातोरात क्रिकेटिंग स्टार बन गए । नवंबर 2013 में Prithvi Shaw ने हैरिस शील्ड ट्राफी के एक मैच में रिजवी स्प्रिंगफील्ड हाइस्कूल की ओर खेलते हुए मात्र 330 गेंदों में 546 रन बना डाले। यह वर्ष 1901 से लेकर तब तक यानी कि पिछले 102 सालों में किसी भारतीय स्कूली स्तर के टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ स्कोर था। Prithvi Shaw के पहले किसी भारतीय क्रिकेटर द्वारा किसी भी स्तर के संगठित क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ स्कोर 515 रनों का था जो कि 1933 में दादाभाई हवेवाला ने बनाया था।किसी भी स्तर पर किसी भी बल्लेबाज की ओर से बनाया गया यह चौथा सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी था।

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इस पारी में Prithvi Shaw ने कुल 6 घंटे 7 मिनट तक बल्लेबाजी की थी, और कुल 85 चौके और 5 छक्के लगाए थे। Prithvi Shaw की पारी की बदौलत रिजवी स्कूल की टीम ने 991 रन बनाए। जवाब में उतरी St Francis d’Assisi की टीम सिर्फ 93 रन पर सिमट गई।

इंग्लैंड में भी बिखेरा अपना जलवा

स्कूली क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन का इनाम पृथ्वी को मिला और अप्रैल 2012 में Prithvi Shaw को इंग्लैंड के Cheadle Hulme School Manchester की ओर से खेलने के लिए आमंत्रित किया गया। यहां इन्होंने न सिर्फ पहले ही मैच में शतक ठोंका बल्कि मात्र दो महीने के भीतर 1448 रन बना डाले। इस दौरान Prithvi Shaw का बल्लेबाजी औसत 84 का रहा। साथ ही साथ गेंदबाजी में कमाल दिखाते हुए इन्होंने 84 विकेट भी चटकाए। आपको बता दे कि पृथ्वी ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करते है और टीम को जरूरत पड़ने पर कीमती विकेट दिलवाये है ।

एक साल के शानदार प्रदर्शन के बाद पृथ्वी भारत लौट आये और मुंबई की अंडर- 14 की टीम की कप्तानी की और अपनी टीम को जिताने में लग गए । अगले वर्ष फिर Prithvi Shaw को इंग्लैंड के एक अन्य क्लब Cryptics क्लब की ओर से खेलने का आमंत्रण मिला। Cryptics की ओर से Middleton Stoney Cricket Club के खिलाफ खेले गए एक मैच में शुरू के 10 ओवरों में ही Prithvi Shaw ने अकेले 68 रन ठोंक डाले, जबकि दूसरा ओपनिंग पार्टनर मात्र 7 रन ही बना सका था। गेंदबाजी में भी कमाल दिखाते हुए 5 ओवर में सिर्फ 1 रन देकर 3 विकेट झटके।

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