दसवीं एवं बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही प्रवेश परीक्षाओं का परिणाम घोषित हो रहा हैं. सफल होने वाले बच्चे तो खुश होते हैं लेकिन कम अंक या असफल होने वाले विद्यार्थियों के लिए परीक्षा परिणाम का दबाव झेलना मुश्किल होता हैं.

समाज एवं परिवार के दबाव में कुछ बच्चे बिखर जाते हैं और आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम उठा देते हैं लेकिन किसी परीक्षा में असफल होना या कम अंक प्राप्त करना ही जीवन नहीं हैं. जीवन में इसके अलावा भी कई अवसर मिलते हैं जिन्हें उचित समय पर भुनाना चाहिए. ऐसे ही एक अफसर ने छठवी क्लास में फ़ैल होने के बाद भी IAS जैसी कठिन परीक्षा पास की.

IAS अफसर रुक्मणि रियार ने यह कर दिखाया हैं. उन्होंने न केवल यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि पुरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया. अभी रुक्मणि रियार राजस्थान के बूंदी जिले के जिला कलेक्टर का पद पर कार्य कर रही हैं.

चंडीगढ़ में पली-बढ़ी रुक्मणि ने 2011 में UPSC परीक्षा में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया था. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर्स डिग्री लेने के बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में ही यह बड़ी कामयाबी हासिल की थी. सबसे खास बात यह है कि उन्होंने देश की कठिनतम परीक्षा के लिए किसी प्रकार की कोई कोचिंग नहीं ली थी.

IAS rukmani riar with family
अपने परिवार के साथ IAS रुक्मिणी रियार

IAS अधिकारी रुक्मणि बताती हैं कि उनका जन्म पंजाब के होशियारपुर में डिप्टी अटार्नी रहे बलजिंदर सिंह के यहां हुआ था. उन्हें छोटी सी उम्र में ही बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया था. वह बोर्डिंग स्कूल का दबाव सहन नहीं कर पाई और कक्षा 6 में फेल हो गई. फेल होने के बाद वह बहुत घबरा गई और डिप्रेशन में रहने लगीं.

उन्होंने कहा था कि फेल होने के बाद परिवार के लोग और शिक्षकों के सामने जाने की उनकी हिम्मत नहीं होती थी. वह यह सोचकर घबरा जाती थीं कि फेल होने को लेकर उनके घर वाले और शिक्षक उनके बारे में क्या सोचते होंगे. बहुत समय तक तनाव में रहने के बाद उन्होंने सोचा कि इस समस्या का उन्हें सामना करना होगा.इसके बाद रुक्मणि ने मन बना लिया कि वो कड़ी मेहनत करेंगी और अपना सर्वश्रेष्ठ देंगी.

उनका मानना है कि यदि हम ठान लें तो असफलताएं हमारा रास्ता कभी नहीं रोक सकतीं. धैर्य और योजना के साथ तैयारी की जाए तो दुनिया की किसी भी परीक्षा में पास होना संभव है. रुक्मणि ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर्स डिग्री लेने के साथ-साथ कई NGO के साथ काम भी किया. रुक्मणि अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अपने शिक्षकों के साथ ही दोस्तों को देती हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, आईएएस अधिकारी रुक्मणि रियार की सफलता पर शुभकामनाए देता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश के विद्यार्थी और युवा असफल होने के बाद भी हार नहीं मानेंगे.

[ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित ]

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