ऊंचाइयों की कोई सीमा नहीं होती हैं, यह केवल मनुष्य की इच्छाशक्ति पर निर्भर करती हैं.

यह पंक्तियाँ एक IAS अधिकारी पर सटीक बैठती हैं. सरकारी स्कूल से पढ़ने के बाद इन्होने देश की कठिनतम परीक्षा UPSC पास करके IAS अधिकारी बने. पंजाब के जिस इलाके से वो आते हैं, उसके बारे में यह धारणा थी कि कोई आईआईटी की परीक्षा में पास नहीं होता है. इस धारणा को उन्होंने चुनौती की तरह लिया और न केवल इंजीनियरिंग की पढाई की बल्कि फ्रांस की कंपनी में नौकरी भी हासिल की. लेकिन देश और समाज की सेवा करने के लिए यूपीएससी की परीक्षा दी और 2010 में सफलता प्राप्त की. धारणाओं और मुसीबतों को पार करके सफलता की कहानी लिखने वाले का नाम हैं IAS इंद्रजीत सिंह.

IAS इंद्रजीत सिंह पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा सन् 1990 से 2000 तक गुरदासपुर के लिटिल फ्लॉवर कॉनवेंट स्कूल में हुई. इसके बाद वर्ष 2001 से 2002 तक उन्होंने गुरदासपुर के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की. सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने के बाद दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बी.ई व इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की. यहां से उन्होंने वर्ष 2006 में डिग्री प्राप्त की और फिर करीब दो साल तक निजी कम्पनीज में काम किया.

IAS Indrajeet Singh
IAS Indrajeet Singh

सन् 2008 में उन्हें एक लाख रुपए महीना मिलता था कि लेकिन देश की सेवा करने का जज्बा लेकर IAS बनने के बारे में सोचा. निजी कंपनी से इस्तीफा देने के बाद वे यूपीएससी की तैयारियों में जुट गए. अगस्त 2010 में सफलता मिली. पहली नियुक्ति असम मे मिली और अभी राजस्थान के अलवर जिले में जिला कलेक्टर के पद पर कार्य कर रहे हैं.

IAS इन्द्रजीत सिंह अपने कार्यकाल के दौरान नवाचारों को लेकर भी काफी चर्चित रहे हैं. खासकर बालिका शिक्षा के लिए चित्तौडग़ढ़ जिला कलेक्टर रहते हुए चलाया गया ‘उड़ान प्रोजेक्ट‘ शानदार रहा. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गाँवो ने सर्वे करवाया गया. सरकारी स्कूलों में मुलभुत सुविधाओं जैसे कमरे, शौचालय, स्वच्छता और शिक्षकों की उपलब्धता निश्चित की गयी. इसके साथ ही शिक्षा चौपाल के जरिये ग्रामीण अंचल में जागरूकता का काम किया. उनके प्रयास के कारण न केवल छात्रों का नामांकन बढ़ा बल्कि स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गयी.

udaan project
उड़ान प्रोजेक्ट की सराहना यूनाइटेड नेशन तक ने की

IAS इन्द्रजीत सिंह का कहना है कि ऊंचाइयों की कोई सीमा नहीं होती है. मैं आईएएस में चयनित होने के बाद जिला कलक्टर बनने के बाद भी नई ऊंचाइयां छूना चाहता हूं. मेरा सपना है कि मैं कुछ नया करू जिसके माध्यम से देश और समाज की सेवा कर सकू. मैं मध्यमवर्गीय परिवार से हूं जिसके कारण सरकारी स्कूल में पढ़ा.

IAS इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि मैंने हर साल स्कूली शिक्षा में टॉप किया. मैं हर काम में अपना शत प्रतिशत देता रहा हूं. मैं पंजाब के गुरदासपुर जिले का था. उस समय यह कहते थे कि गुरदासपुर के बच्चे आईआईटी नहीं कर सकते, वहां तो दिल्ली और अमृतसर के बच्चे पहुंचते हैं. आपको अपनी मेहनत से अपने आपको साबित करना होगा.

IAS indrajeet singh at work
काम के दौरान IAS इंद्रजीत सिंह

हम आज भी नया सीखने का प्रयास करते हैं. युवावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें हम जैसे सोचते हैं और वैसे ही बन जाते हैं. इस समय कॅरियर पर पूरा फोकस रहना चाहिए. हर रोज अपना बेस्ट देने की कोशिश करनी चाहिए.

बी पॉजिटिव इंडिया, IAS इंद्रजीत सिंह की सफलता पर उन्हें शुभकामनाए देता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर हमारे पाठक जीवन में अच्छा करेंगे.

[ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित ]

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