आज हम जिस शख्सियत के बारे में लिख रहे है , उनके बारे में यह हरिवंश राय बच्चन साहब की कविता की चंद पंक्तियाँ ठीक बैठती है ।

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

कितनी भी मुश्किल आ जाये लेकिन कुछ लोग होते है जो अलग ही मिट्टी के बने हुए होते है जिनकी डिक्शनरी में हार या नाकामयाबी जैसे शब्द होते ही नहीं है । लगातार संघर्षों से जूझते जाते है और तब तक नहीं रुकते जब तक उनको लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता ।

आज हम बात कर रहे है हिंदी माध्यम से IAS का पेपर देने के बाद एग्जाम में टॉप करने वाले IAS गौरव सोगरवाल (Gaurav Sogarwal) की जो ऐसी मिट्टी से बने है कि लगातार नाकामयाबी और मुसीबतों के बाद भी पीछे नहीं हटे और आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा के टॉपर्स में से एक है ।

यह भी पढ़े : सरकारी नौकरी छोड़कर खेतीबाड़ी करके करोड़पति बनने वाले युवा उद्यमी

कुछ लोगों की जिंदगी इतनी आसान नहीं होती है जितनी आम आदमी अपने जीवन के बारे में सोचता है तो गौरव का जीवन भी कभी आसान नहीं रहा । पग -पग पर गौरव ने इम्तिहान दिए और कड़ी मेहनत से अपने लक्ष्य की प्रति अग्रसर होते गए ।

गौरव का जन्म राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाके में एक किसान परिवार में हुआ उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और साथ ही खेतीबाड़ी का काम भी देखते थे । गौरव ने अपनी स्कूली शिक्षा गांव और उसके आसपास के कस्बों से हिंदी माध्यम से की ।

दो घटनाए जिन्होंने जिंदगी बदल दी

गौरव की ज़िन्दगी में हुई दो घटनाओं में उनका पूरा जीवन बदल कर रख दिया । जब वो 3 साल के थे तभी उनकी माँ का स्वर्गवास हो गया । उनके पिता ने उनको कुछ साल अकेले पाला और बाद में उन्होंने दूसरी शादी कर ली । सौतेली माँ ने कभी भी गौरव को अपनी माँ की कमी नहीं अखरने दी और उनके बचपन को संवारने में लग गयी ।

यह भी पढ़े : क्लास के बुद्धू बच्चे से IAS टॉपर बनने के बाद मोदी सरकार में मंत्री बनने का सफर

लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था क्योंकि जब गौरव दसवीं में पढ़ रहे थे तभी उनके पिता का भी स्वर्गवास हो गया जिससे किशोरावस्था में ही गौरव के कन्धों पर पुरे परिवार की जिम्मेदारी आ गयी । उस समय गौरव पूरी तरह टूट गए लेकिन अपने माता-पिता की सींख और अपने परिवार से मिले सपोर्ट से गौरव को काफी मदद मिली ।

गौरव के पिता हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा प्रशासनिक सेवाओं में जाये और आज गौरव ने उनके पिता का यह सपना पूरा कर दिया । पिता कि मृत्यु के बाद घर से लेकर समाज और खेतीबाड़ी के सारे कामकाज गौरव को ही करने पड़े । सरकारी पेंशन और मेहनत के दम पर गौरव ने अपनी बड़ी बहन , छोटे भाई और माँ की जरूरतों को पूरा करना शुरू कर दिया ।

पढ़ने में तेज गौरव ने दसवीं में इतनी बड़ी घटना के बाद भी 90 प्रतिशत अंक के साथ पास की और फिर गणित एवं विज्ञानं विषय से बारहवीं की परीक्षा पास कर ली । घर और खेतीबाड़ी के काम काज में उलझे गौरव को IAS बनना असमंभव सा लगने लग गया था लेकिन अपने पिता के सपने को पूरी करने की ज़िद ने उन्हें हमेशा IAS बनने के लिए प्रेरित किया ।

यह भी पढ़ेकिसान परिवार से निकल कर राजस्थान बोर्ड के चैयरमेन बनने तक का सफर

बारहवीं के बाद गौरव ने पुणे के एक कॉलेज में इंजीनियरिंग के लिए पढाई शुरू की लेकिन अपने खर्चे के साथ परिवार को चलाने के लिए वो सुबह जल्दी उठकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाते थे और बाद में तैयार होकर कॉलेज पढ़ने निकल जाते । बड़ा शहर होने के कारण वो ट्यूशन से अच्छी कमाई कर लेते जिससे उनकी और उनके बहन एवं भाई की पढाई में कोई रूकावट नहीं आये ।

जब कॉलेज के सारे विद्यार्थी अपना जीवन आनंद से गुजार रहे थे तब गौरव अपने परिवार के लिए अभिभावक का रोल अदा कर रहे थे । सुबह और शाम दोनों समय वो ट्यूशन पढ़ाते जिससे कि उनके परिवार में पैसों की कमी न रहे ।

यह भी पढ़े : ई-कॉमर्स के दौर में भी लोग जिनकी दुकान पर रात भर लाइन में खड़े रहते है

मुश्किल लेकिन साहसिक निर्णय

इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में गौरव को एक बहुत ही मुश्किल निर्णय लेना था, उनको कॉलेज प्लेसमेंट या सिविल सर्विसेज की तैयारी में से एक को चुनना था । एक तरफ प्लेसमेंट के बाद आरामदायक ज़िन्दगी की गारंटी थी लेकिन गौरव ने अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए मुश्किल रास्ता जो सिविल सर्विसेज परीक्षा का था, चुनने का फैसला किया ।

इंजीनियरिंग के बाद गौरव दिल्ली आ गए और यहाँ पर एक निजी कोचिंग संस्थान में एक शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू कर दी । गौरव का दिल्ली चुनने का मुख्य कारण यह था कि वो सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी भी कर सके ।

IIT की तैयारी करवाते – करवाते गौरव को कोटा के एक संस्थान ने 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष का ऑफर दिया जिससे गौरव को साहस मिला और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधर गयी । लगभग 2 वर्ष उन्होंने कोटा में काम किया और अपने दिल्ली के दोस्तों से लगातार संपर्क बनाये रखा और साथ ही सिविल सर्विसेज की तैयारी भी जारी रखी।

यह भी पढ़े : एक साल पहले नोटबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शख्स की दिलचस्प कहानी

इसी दौरान गौरव ने अपने छोटे भाई को MBA में एडमिशन दिलवाया और बड़ी बहन की शादी भी करवा दी जिससे उनको जिम्मेदारियां पूरी करने में काफी मदद मिली । 2012 में गौरव ने कोटा में पढ़ाना छोड़ दिया और दिल्ली का एक बार फिर रुख किया ।

इस बार गौरव का लक्ष्य दिल्ली में सिविल सर्विसेज की तैयारी करना था, इसलिए वो मुखर्जी नगर में एक छोटे से कमरे में पढ़ाई करने के लिए जुट गए । 6-7 महीनो के बाद पैसों की तंगी के कारण गौरव ने एक बार फिर ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया । इसी बीच गौरव BSF में कमांडेट पद पर चयनित हो गए जिसके कारण उन्हें एक अच्छा एक करियर ऑप्शन मिल गया ।

यह भी पढ़े : पर्यावरण और किसानों को आत्महत्या से बचाते युवा उद्यमी की दिलचस्प कहानी

इसी बीच उन्होंने सिविल परीक्षा की जोर-शोर से तैयारी शुरू कर दी और 2015 में सिविल सर्विसेज मैन्स का एग्जाम क्लियर कर लिया और हिंदी माध्यम से IAS बनने वाले गौरव ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया ।

गौरव की ज़िन्दगी से सब लोग प्रेरणा ले सकते है क्योंकि जितनी मुसीबते आपके जीवन में आती है उतने ही नए दरवाजे खोल के जाती है । हिंदी माध्यम से IAS में पास होकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा और मेहनत मौके या किस्मत की मोहताज नहीं होती है ।

Comments

comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.