देश में इन दिनों परीक्षा परिणामों का दौर चल रहा है। रिजल्ट्स के दौर में कई बच्चे आत्महत्या जैसा घातक कदम भी उठा रहे है। समाज में चल रहे नंबर गेम और होड़ के कारण देश के आधे से ज्यादा बच्चे तनाव में है। समाज और परिवार के दबाव के बाद जब बच्चे परीक्षा में अच्छे मार्क्स नहीं ला पाते है तो आत्महत्या जैसे कदम उठा देते है।

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण (IAS Awanish Sharan) 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और 10 मई को परीक्षा परिणाम आने और 11 मई को छात्र के आत्महत्या की खबर पढ़कर उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा। रायगढ़ में 18 वर्षीय छात्र ने छत्तीसगढ़ की बोर्ड परीक्षा में दोबारा फेल हो जाने पर कर ली थी खुदकुशी।

अविनाश लिखते है कि आज मैंने अखबार में एक चौंकाने वाली खबर पढ़ी कि एक छात्र ने परीक्षा में फेल हो जाने के कारण आत्महत्या कर ली। मैं सभी छात्रों और उनके माता-पिता से अपील करता हूं कि वे परिणाम को गंभीरता से न लें। यह एक नंबर गेम है। आपको अपने कैलिबर को साबित करने के कई और मौके मिलेंगे। परीक्षा में नंबर कम आना या फिर फेल हो जाना यह आपकी काबीलियत को नहीं बताता।

छात्रों को मोटिवेट करने के उद्देश्य से आईएएस अफसर ने अपनी कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं, कॉलेज के नंबर भी फेसबुक पर शेयर किए। उन्होंने कक्षा 10वीं में 44.5 फीसदी, 12वीं की परीक्षा में 65 % और स्नातक में 60.7 % नंबर हासिल किए थे। अफसर ने अपने संदेश में यह भी बताया है कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा 1996 में, 12वीं की परीक्षा 1998 और स्नातक की डिग्री साल 2002 में पूरी की थी। भले ही अवनीश कुमार शरण के नंबर कम आए हों, लेकिन उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर दिखा दिया कि काबिलियत नंबर देखकर नहीं मापी जा सकती।

बेटी को पहले आंगनबाड़ी में पढ़ाया, फिर सरकारी स्कूल में

वर्ष 2017 में पहली बार आईएएस अवनीश कुमार शरण चर्चा में आए थे। बलरामपुर के कलेक्टर रहते हुए उन्होंने बेटी वेदिका का दाखिला सरकारी स्कूल प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय में कराया था। जहां वे उससे अक्सर मिलने जाते थे।

awinash sharan with daughter
अपनी बेटी के साथ IAS अवनीश शरण । तस्वीर साभार : IAS अवनीश शरण की फेसबुक वाल से

वहां पर बेटी के साथ मिड डे मील खाते उनकी फोटो काफी वायरल हुई थी। उनका मानना है कि हमें सरकारी संस्थाओं में यकीन करना चाहिए तभी उनकी हालत सुधर सकती है। इसके पहले उन्होंने वेदिका को आंगनबाड़ी भी भेजा था।

संघर्षों से भरा रहा है आईएएस अवनीश का जीवन

दरअससल आईएएस अधिकारी अवनीश शरण का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके घर में बिजली की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्हें लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की थी। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के केवटा गांव के रहने वाले आईएएस अवनीश के पिता और दादाजी भी शिक्षक थे।

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