अपनी कंपनी खोलने के लिए गृह-प्रवेश के एक दिन बाद ही अपना फ्लैट बेच देना और किराये के घर में शिफ्ट हो जाना का रिस्क बहुत कम लोग ही उठा सकते है । अपनी शानदार नौकरी को अपने आईडिया के सामने छोड़ देना तथा अपने आईडिया को मूर्त रूप देना कतई आसान काम नहीं है । इस पति-पत्नी की जोड़ी ने अपनी आरामदायक जॉब को अलविदा कह दिया और अपने आईडिया को सफल बनाने के लिए काम करने लग गए । यह जोड़ी है – निधि और शिखर सिंह (Nidhi and Sikhar Singh)

समोसा जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है और चाय की चुस्कियों के साथ समोसे का आनंद लेना एक विशेष अनुभव कराता है । सुबह में नाश्ते से लेकर दोपहर के खाने के साथ भी समोसे को बड़े चाव से खाया जाया है । समोसा भारत का लोकप्रिय व्यंजन है , इसे पुरे भारत में बड़े ही चाव से खाया जाता है और शायद इकलौती खाने की चीज़ है जिसे आसाम से लेकर गुजरात और कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक बराबर प्यार मिलता है । निधि और शिखर ने मिलकर समोसा सिंह (Samosa Singh) ब्रांड के नाम से समोसा बेचना शुरू किया जो उच्चतम गुणवत्ता एवं स्वाद को ध्यान में रखकर बनाये जाते है । अभी उनके कई आउटलेट बैंगलोर में कार्य कर रहे है तथा पुणे एवं हैदराबाद में भी इनके ब्रांड के विस्तार का कार्य चल रहा है ।

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निधि और शिखर ने मिलकर इनोवेटिव समोसा बेचने के लिए वेंचर शुरू किया था और धीरे-धीरे उनके आउटलेट्स पर भीड़ बढ़ती जा रही थी । अभी मैन्युअली समोसे बनाये जा रहे थे जिनसे केवल उनके आउटलेट की ही पूर्ति हो पाती थी लेकिन कॉर्पोरेट में उनकी पैठ बढ़ने के साथ आर्डर वॉल्यूम भी बढ़ गया और उन्हें अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट या सेंट्रल किचन की क्षमता बढ़ाने के लिए काम करना शुरू किया । अभी तक किये जा रहे मैन्युअल प्रोडक्शन प्रोसेस को ऑटोमेट करने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत थी उसके लिए उन्होंने निवेशकों के पास जाने की बजाय अपना खुद का फ्लैट बेचना उचित समझा । इस तरह समोसा सिंह की प्रोडक्शन क्षमता 2000 से बढ़कर 10000 समोसे प्रतिदिन हो गयी है ।

इस सफल आईडिया और उसके सही निष्पादन के पीछे कई वर्षों का रिसर्च एवं कड़ी मेहनत छुपी हुई है । निधि और शिखर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बायो-टेक्नोलॉजी की पढाई कर रहे थे और इसी दौरान उनके बीच दोस्ती हुई और यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार और उसके बाद शादी में  तब्दील हो गयी । निधि जिन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन के बाद MBA करने का प्लान किया क्योंकि उन्हें मार्केटिंग और सेल्स में ज्यादा रूचि थी , वही दूसरी और शिखर ने ग्रेजुएशन के बाद बायोटेक्नोलॉजी में ही पोस्ट-ग्रेजुएशन करने के लिए हैदराबाद स्थित स्कूल ऑफ़ लाइफ साइंसेज में दाखिला लिया । यही पर शिखर को महसूस हुआ कि भारतीय व्यंजनों के लिए फ़ास्ट -फ़ूड जैसे पिज़्ज़ा या बर्गेर की तरह पैकेजिंग और हाइजीन की कमी है । यदि हमें कोई भी व्यंजन खाना हो तो गली-नुक्कड़ों पर स्थित स्टाल्स या मिठाई की दुकान का रुख करना पड़ता है । इस तरह शिखर ने यह आईडिया निधि को बताया लेकिन उस समय उन्होंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया ।

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अपनी पढाई के बाद शिखर ने रिसर्चर के रूप में Biocon को ज्वाइन किया और निधि ने भी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्य करना शुरू कर दिया । जॉब के दौरान भी दोनों के बीच समोसा या उसके बिज़नेस के बारे में लगातार बातचीत होती रहती थी । इसी बीच उन्होंने पाया कि केवल हाइजीनिक समोसा ही काफी नहीं होगा क्योंकि उसके साथ इनोवेटिव प्रोडक्ट भी सोचने होंगे । इस तरह 2015 में इन्होने समोसा बिक्री के लिए पूरा बिज़नेस प्लान बनाया और बिज़नेस प्लान के कुछ ही दिन बाद शिखर ने अपनी जॉब छोड़ दी और पूरी तरह से अपने वेंचर को स्थापित करने में लग गए ।

शुरुआती कुछ दिनों में शिखर और निधि ने एक छोटी सी जगह किराये पर ली और वहां पर कुछ रसोइये के साथ काम करना शुरू किया । पहले चार महीनों में समोसे के साथ विभिन्न मिश्रण एवं पदार्थों के साथ प्रयोग किये गए और स्वाद एवं गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखने पर जोर दिया गया । दोनों को पहले से ही पता था कि उन्हें गुणवत्ता के साथ ही तेल में उबले हुए समोसे ही बनाने है और कोशिश करनी है कि उसमे से ज्यादा वसा और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों का उपयोग नहीं करना है । इस काम को पूरा करने के लिए शिखर का बायोटेक्नोलॉजी में अनुभव बहुत काम आया और समोसे को ज्यादा स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक बनाने में जुट गए ।

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कुछ महीनों की रिसर्च के बाद उन्होंने अपना पहला आउटलेट बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रॉनिक सिटी में खोला । शुरुआती दिनों में निधि बिलिंग काउंटर पर काम देखती थी तो शिखर सेंट्रलाइज्ड किचन से आउटलेट तक समोसे पहुंचाने का काम कर रहे थे । होम डिलीवरी के साथ ही विभिन्न व्यापारिक रणनीतियों के तहत मात्र दो महीने में उनके 500 समोसे प्रतिदिन बिकने लग गए । इन्होने उच्च गुणवत्ता के साथ ही वाजिब दाम पर भी ध्यान दिया और विभिन्न तरह के समोसे जैसे आलू , चिकन मखनी, चॉकलेट और कई अन्य तरह के कॉम्बिनेशन के समोसे तैयार किये जिससे ग्राहकों को कई वैरायटी के समोसे मिलने लग गए ।

निधि जो कि मार्केटिंग एवं सेल्स का अनुभव रखती थी , ने कॉर्पोरेट एवं बड़ी कंपनियों को अपने समोसे बेचने के लिए संपर्क करना शुरू किया । शुरुआती कुछ निराशाजनक परिणामों के बाद उन्हें एक जर्मन कंपनी से 8000 समोसे का आर्डर मिला लेकिन अभी उनके प्लांट की इतनी क्षमता नहीं थी । अतः उन्होंने कंपनी को कुछ दिन इंतज़ार करने के लिए कहा और एक बड़ा किचन बनाने के लिए जुट गए । मैन्युअली इतने समोसे बनाना आसान नहीं था इसलिए इन्होने ऑटोमेशन को अपनाने का निश्चय किया ।

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उसके बाद इन्होने अपने आउटलेट खोलने के बजाय अन्य क्लाइंट्स को समोसे सप्लाई करने की रणनीति बनाई और जल्द ही INOX, PVR, CCD और TCS में इनके समोसे जाने लगे । कुछ सिनेमाघरों में इन्होने अपने आउटलेट भी खोले है तथा अब तक पुरे बैंगलोर में सात आउटलेट्स खोल चुके है । कॉर्पोरेट्स में जाने के लिए निधि ने कई तरह की मार्केटिंग रणनीति पर कार्य किया जिनमे एक सप्ताह तक चलने वाले “समोसा फेस्ट” का आयोजन भी है ।

समोसा सिंह अभी मुनाफे में चल रहा है और इस वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग आठ करोड़ रुपये का रेवेन्यू का लक्ष्य रखा है , इसके साथ ही अन्य शहरों में भी इन्होने विस्तार की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया । इस तरह पति-पत्नी ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक समोसे को ब्रांड बना दिया है और करोड़ो का व्यापार कर रहे है ।

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